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श्रीलंका के कोलंबो पोर्ट से पीछे हटा चीन, 392 मिलियन डॉलर का लॉजिस्टिक्स प्रोजेक्ट रद्द; भारत के पास बड़ा मौका!

Published: Mon, 19 Oct 2026 08:46 PM (IST)Updated: Mon, 19 Oct 2026 08:47 PM (IST)

चीन ने श्रीलंका के कोलंबो पोर्ट पर प्रस्तावित 392 मिलियन डॉलर का लॉजिस्टिक्स हब प्रोजेक्ट रद्द कर दिया है। यह ...और पढ़ें

कोलंबो पोर्ट में बड़ी डील रद्द

कोलंबो पोर्ट में बड़ी डील रद्द

HighLights

  1. चीन ने कोलंबो पोर्ट लॉजिस्टिक्स हब परियोजना रद्द की।

  2. श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी 21.9 मिलियन डॉलर का भुगतान करेगी।

  3. भारत और जापान के लिए नए निवेश के अवसर खुले।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से अहम श्रीलंका के कोलंबो पोर्ट पर प्रस्तावित 392 मिलियन डॉलर का लॉजिस्टिक्स हब प्रोजेक्ट रद्द हो गया है। चीन की सरकारी पोर्ट ऑपरेटर कंपनी चाइना मर्चेंट्स पोर्ट होल्डिंग्स (China Merchants Port Holdings) ने इस प्रोजेक्ट से अपना नाम वापस ले लिया है। इसके बाद श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी (SLPA) ने प्रोजेक्ट से जुड़ी कंपनी के साथ 21.905 मिलियन डॉलर के भुगतान का समझौता किया है।

चीन की ओर से उठाए गए इस कदम से श्रीलंका के बंदरगाह क्षेत्र में चीन के निवेश और उसकी क्षेत्रीय रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मा चेलानी के मुताबिक, इस फैसले से श्रीलंका को प्रोजेक्ट के लिए नए इन्वेस्टर्स तलाशने का अवसर मिल सकता है। इससे कोलंबो पोर्ट पर भारत और जापान की लॉजिस्टिक्स सेक्टर में मौजूदगी बढ़ाने की संभावनाएं भी बन सकती हैं।

चाइना मर्चेंट्स पोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज में फाइल सूचना में साउथ एशिया कमर्शियल एंड लॉजिस्टिक्स हब (SACLH) प्रोजेक्ट समाप्त करने की पुष्टि की।

50 साल के लिए डेवलप होना था लॉजिस्टिक्स हब

कोलंबो पोर्ट पर प्रस्तावित इस प्रोजेक्ट को दक्षिण एशिया के सबसे बड़े लॉजिस्टिक्स परिसरों में से एक के रूप में डेवलप करने की योजना थी। इसे 50 साल के बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) समझौते के तहत बनाया जाना था। इस व्यवस्था में इन्वेस्टर्स प्रोजेक्ट का निर्माण और ऑपरेट करता है साथ ही तय अवधि के बाद उसे संबंधित अथॉरिटी को हैंडओवर किया जाता है।

प्रोजेक्ट में चीन की चाइना मर्चेंट्स पोर्ट की सहायक कंपनी फॉर्च्यून सेंटर ग्रुप लिमिटेड की 70 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी और श्रीलंका की एक्सेस इंजीनियरिंग PLC की हिस्सेदारी 15-15 प्रतिशत थी। तीनों साझेदारों ने मिलकर इस परियोजना में 37.14 मिलियन डॉलर का निवेश किया था। इसमें चीनी कंपनी की सहायक इकाई का योगदान 26 मिलियन डॉलर था।

रद्द होने पर श्रीलंका को करना होगा भुगतान

हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज में फाइल जानकारी के मुताबिक, प्रोजेक्ट रद्द होने के बाद श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी 30 दिनों के भीतर परियोजना कंपनी को 21.905 मिलियन डॉलर का भुगतान करेगी। इसके अलावा, प्रोजेक्ट कंपनी के पास करीब 7.85 मिलियन डॉलर की ऐसी नकदी बची है, जिसे शेयरहोल्डर्स में बांटा जा सकता है। समझौते के तहत लागू कटौतियों और खर्चों के बाद उपलब्ध राशि शेयरधारकों को उनकी हिस्सेदारी के अनुपात में बांटी जाएगी।

इस तरह परियोजना के रद्द होने से जुड़े फाइनेंशियल समझौते में श्रीलंका की पोर्ट अथॉरिटी की अहम भूमिका है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि इस पूरी व्यवस्था के बाद प्रत्येक इन्वेस्टर्स को अंतिम रूप से कितनी राशि मिलेगी।

टैक्स में छूट के बावजूद आगे नहीं बढ़ सका प्रोजेक्ट

श्रीलंका सरकार ने दिसंबर 2023 में इस प्रोजेक्ट को रणनीतिक डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का दर्जा दिया था। इसके तहत 15 साल तक कॉरपोरेट इनकम और डेविडेंट टैक्स से छूट सहित कई कर रियायतें दी गई थीं।

इसके बावजूद प्रोजेक्ट तय योजना के मुताबिक आगे नहीं बढ़ सका। इससे जुड़ी परिस्थितियों, ऑपरेशन के माहौल और टाइमलाइन में बदलाव के साथ व्यावसायिक कारणों को इसके रद्द होने की वजह बताया गया है।

ब्रह्मा चेलानी बोले- चीन की BRI के लिए दुर्लभ वापसी

रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने इस घटनाक्रम को चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के लिए एक रेयर वापसी बताया है। उनके मुताबिक, यह फैसला चीन की ओर से प्रोजेक्ट के जोखिम का नए सिरे से आकलन करने और अपनी रणनीति में बदलाव करने का संकेत देता है।

चेलानी ने कहा कि चाइना मर्चेंट्स पोर्ट चीन की प्रमुख सरकारी बंदरगाह संचालक कंपनियों में से एक है। कंपनी के पास श्रीलंका के हंबनटोटा पोर्ट का 99 साल का लीज अधिकार है और वह कोलंबो पोर्ट पर CICT टर्मिनल को ऑपरेट भी करती है।

चेलानी का मानना है कि अब श्रीलंका नए सिरे से निवेश के लिए टेंडर जारी कर सकता है। इससे ऐसी शर्तें तय करने का अवसर मिलेगा, जो देश की बदलती आर्थिक जरूरतों और विदेश नीति की प्राथमिकताओं के अधिक अनुकूल हों।

भारत और जापान के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?

चेलानी के मुताबिक, इस घटनाक्रम से भारत और जापान के लिए भी अवसर पैदा हो सकता है। दोनों देश कोलंबो पोर्ट पर वेस्ट कंटेनर टर्मिनल (WCT) के विकास में पार्टनर हैं। प्रस्तावित चीनी लॉजिस्टिक्स हब के रद्द होने से बंदरगाह पर वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में किसी एक चीनी कंपनी की मजबूत स्थिति के साथ कॉम्पटीशन करने का दबाव कम हो सकता है।

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यदि श्रीलंका नई निवेश प्रक्रिया शुरू करता है और भारत या जापान की कंपनियां उसमें भाग लेती हैं, तो दोनों देशों को कोलंबो पोर्ट पर अपनी लॉजिस्टिक्स मौजूदगी बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, फिलहाल उपलब्ध जानकारी में भारत या जापान की ओर से इस रद्द परियोजना में निवेश की कोई पुष्टि नहीं है।