India-US व्यापार समझौता 'बेहद करीब', रूसी तेल की खरीद पर भारत का क्लियर स्टैंड! इन मुद्दों पर बनेगी बातचीत
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद ...और पढ़ें

India US ट्रेड डील बेहद करीब
HighLights
अमेरिका-भारत व्यापार समझौता अंतिम चरण में, रूबियो ने संकेत दिए।
रूसी तेल खरीद पर शुल्क छूट व्यापार समझौते से जुड़ी।
मार्को रूबियो भारत आएंगे, जयशंकर से ऊर्जा, व्यापार पर मिलेंगे।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने सोमवार को कहा कि अमेरिका, भारत के साथ एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के ‘बेहद करीब’ है। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि रूसी तेल खरीदने पर ड्यूटी से छूट इस फैसले से जुड़ी हुई है। उज्बेकिस्तान के समरकंद में रूबियो ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ‘‘हम इस समय भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। हम ऐसा करने के बेहद करीब हैं।
भारत आ रहे हैं रूबियो
मार्को रूबियो जल्द ही भारत की यात्रा पर आने वाले हैं, जहां वह एनर्जी सेक्टर, व्यापार, डिफेंस, महत्वपूर्ण एवं उभरती टेक्नोलॉजी और द्विपक्षीय सहयोग के अन्य प्रमुख सेक्टर्स पर चर्चा करने के लिए मुंबई में विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे। रूबियो भारत के रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखने के कारणों को स्वीकार करते नजर आए।
जियो पॉलिटिक्स जटिल समस्या
अमेरिका ने सितंबर में ‘रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम’ पारित किया था, जिसके बाद यह विषय उनके और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच बातचीत के केंद्र में रहा है। रूबियो ने कहा, ‘‘आप किसी एक मुख्य मुद्दे के कारण दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था को भी पटरी से नहीं उतार सकते। इसलिए इन सभी चीजों के बीच संतुलन साधना एक जटिल काम है।’’ उन्होंने कहा कि प्रत्येक देश के सामने जटिल कारकों का एक दायरा होता है जिसे उन्हें ध्यान में रखना पड़ता है, जैसे कि जियो पॉलिटिक्स।
कुछ देशों के लिए वैकल्पिक स्रोतों से ऊर्जा प्राप्त करना बहुत कठिन होता है। रूबियो ने कहा, ‘‘यह कोई बहाना नहीं है, लेकिन जब आप विदेश नीति बनाते हैं तो इन सभी पहलुओं में संतुलन बनाना पड़ता है। बेशक, अमेरिका की विदेश नीति रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के घटनाक्रमों को ध्यान में रखती है, लेकिन यह केवल इसी से ऑपरेट नहीं होती।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘इसमें कई अन्य कारकों को भी शामिल करना होता है, जिनमें अन्य देशों के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंध और वे अपनी ऊर्जा आपूर्ति के मामले में वास्तविक रूप से क्या कर सकते हैं, यह देखना भी शामिल है।’’
तेल को लेकर एस जयशंकर ने किया साफ
माना जा रहा है कि एस जयशंकर ने रूबियो को स्पष्ट किया है कि भारत की तेल रिफाइनरियां मुख्य रूप से मध्यम 'सोर' (सल्फ्यूरिक) कच्चे तेल का प्यूरिफिकेशन कर सकती हैं, जिसकी सप्लाई पश्चिम एशियाई देशों और रूस द्वारा की जाती है। उन्होंने रूबियो को यह भी बताया कि वेनेजुएला भारी कैटेगरी के कच्चे तेल की सप्लाई करता है और अमेरिका के पास हल्की कैटेगरी का कच्चा तेल है, जिसका भारत की रिफाइनरी में उपयोग करने से पहले ब्लेंडिंग करना आवश्यक होगा। ईरान युद्ध के कारण पश्चिम एशियाई देशों से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने के बीच भारत अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखने के लिए रूसी तेल पर निर्भर है।
