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दुनिया का दूसरा सबसे लंबा पुल: आकार में केरल से छोटे देश में मौजूद, इसी से गुजरती बुलेट ट्रेन; भूकंप को झेलने की है ताकत

Published: Sat, 24 Oct 2026 03:22 PM (IST)

दुनिया का दूसरा सबसे लंबा पुल चांगहुआ-काओशुंग वायाडक्ट ताइवान में स्थित है, जिसकी लंबाई 157.3 किलोमीटर है। यह पुल ताइवान ...और पढ़ें

दुनिया का दूसरा सबसे लंबा ब्रिज (AI फोटो)

दुनिया का दूसरा सबसे लंबा ब्रिज (AI फोटो)

HighLights

  1. दुनिया का दूसरा सबसे लंबा पुल ताइवान में, 157.3 किमी

  2. हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए निर्मित, भूकंप-रोधी तकनीक से लैस

  3. ताइवान हाई स्पीड रेल नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया का सबसे लंबा पुल चीन में स्थित डैनयांग-कुनशान ग्रैंड ब्रिज (Danyang-Kunshan Grand Bridge) है। मगर क्या आप दुनिया के दूसरे सबसे लंबे पुल के बारे में जानते हैं, जो कि एक ऐसे देश में है, जिसका आकार भारत के केरल राज्य जितना है।
जी हां, ये छोटा सा देश तकनीक में काफी आगे है। ये है ताइवान, जिसका आकार 36,197 वर्ग किमी। वहीं केरल का आकार है 38,863 वर्ग किमी। यानी ये केरल से भी छोटा है। मगर ताइवान ने दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पुल बनाया है। आइए जानते हैं इस पुल के बारे में।

कितना लंबा है ये पुल?

2007 में बनकर तैयार हुआ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पुल (लंबाई के आधार पर) चांगहुआ-काओशुंग वायाडक्ट (Changhua-Kaohsiung Viaduct) है। इसे बनाने का काम 1999 में शुरू हुआ था। यह पुल ताइवान में बागुआशान (चांगहुआ काउंटी) से शुरू होकर जुओयिंग (काऊशुंग) तक फैला हुआ है।
इसकी लंबाई लगभग 157.3 किलोमीटर (97.7 मील) है, जबकि चीन का डैनयांग-कुनशान ग्रैंड ब्रिज 164.8 किमी (102.4 मील) लंबा है।

किसने बनाया है ये ब्रिज?

चांगहुआ-काऊशुंग वायाडक्ट का निर्माण मुख्य रूप से कॉन्टिनेंटल इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (Continental Engineering Corporation - CEC) और जर्मन कंपनी बिल्फिंगर बर्गर (Bilfinger Berger) के एक जॉइंट वेंचर ने किया है।

हाई स्पीड रेलवे नेटवर्क के लिए अहम

दुनिया का दूसरा सबसे लंबा पुल ताइवान हाई स्पीड रेल (THSR) नेटवर्क का एक प्रमुख हिस्सा है। इस विशाल परियोजना को छोटे-छोटे कॉन्ट्रैक्ट्स में डिवाइड किया गया था, जिसमें से वायाडक्ट का एक बड़ा हिस्सा CEC द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया।
वैसे पूरे रेल सिस्टम का ऑपरेशन और कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट ताइवान हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (THSRC) द्वारा किया गया।

कितने रुपये में बना?

चांगहुआ-काऊशुंग वायाडक्ट की निर्माण लागत लगभग 7.6 बिलियन पाउंड रही, जो अमेरिकी डॉलर में करीब $16 बिलियन (16 अरब डॉलर) के बराबर है। ये रकम भारतीय करेंसी में 1.52 लाख करोड़ रुपये बनती है।

इन 3 वजहों से खास है ये पुल

हाई-स्पीड ट्रेनों का संचालन : इस पुल के ऊपर से ताइवान की बुलेट ट्रेनें गुजरती हैं, जो 186 मील प्रति घंटे (लगभग 300 किमी/घंटा) से अधिक की गति से दौड़ती हैं। यह उत्तरी ताइवान (ताइपे) से दक्षिणी ताइवान (काऊशुंग) के बीच यात्रा के समय को बहुत कम करता है।

भूकंप से सुरक्षा : ताइवान एक अत्यधिक भूकंप-संभावित क्षेत्र में स्थित है। इस पुल को खास तौर पर इस तरह डिजाइन किया गया है कि बड़े भूकंप आने पर भी ट्रेनें बिना किसी दुर्घटना के सुरक्षित रूप से रुक सकें और पुल को कोई भारी नुकसान न पहुंचे।

कठिन रास्तों को पार करना : यह वायाडक्ट (ऊंचा पुल) ताइवान के अलग-अलग रास्तों जैसे कि नदियों, घाटियों, ग्रामीण इलाकों और घने शहरी क्षेत्रों के ऊपर से बिना किसी रुकावट के ट्रेन रूट को रास्ता देता है।

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