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भारतीय रसोई का साथी: रथ वनस्पति घी का दिलचस्प इतिहास, डालडा को हराने के लिए हुई थी शुरुआत; फिर ऐसे खोता गया चमक

Published: Sat, 24 Oct 2026 01:51 PM (IST)

रथ वनस्पति घी, जो 1950 में डीसीएम श्रीराम ग्रुप द्वारा डालडा को टक्कर देने के लिए लॉन्च किया गया था, ...और पढ़ें

रथ घी किसने किया था शुरू? (AI फोटो)

रथ घी किसने किया था शुरू? (AI फोटो)

HighLights

  1. डीसीएम श्रीराम ने 1950 में रथ वनस्पति घी लॉन्च किया

  2. डालडा को टक्कर देने के लिए छोटे पैक में आया

  3. भावनात्मक मार्केटिंग से भारतीय परिवारों में जगह बनाई

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत में ऐसे कई तेल, देशी घी और वनस्पति घी ब्रांड हैं, जिनका इतिहास बेहद खास है। इनमें से एक है रथ वनस्पति घी (Rath Vanaspati Ghee History)। अगर आप 90 के दशक या उससे पहले पैदा हुए हैं तो आपने इस ब्रांड का घी जरूर देखा होगा। मगर इसकी शुरुआत कैसे, कब और कहां हुई, आइए जानते हैं।

76 साल पुराना ब्रांड

रथ वनस्पति घी को साल 1950 में बाजार में उतारा गया था। इसकी शुरुआत प्रसिद्ध बिजनेस ग्रुप डीसीएम श्रीराम ग्रुप (DCM Shriram Group) ने की थी। गौरतलब है कि इससे पहले साल 1937 में हिंदुस्तान युनिलीवर (लीवर ब्रदर्स) का 'डालडा' वनस्पति घी बाजार में काफी लोकप्रिय हो चुका था।
डालडा के बढ़ते प्रभाव और मोनोपॉली या एकाधिकार को टक्कर देने के लिए डीसीएम श्रीराम ग्रुप ने रथ वनस्पति घी पेश किया था।

पनघट घी से अलग था आइडिया

डीसीएम श्रीराम का एक और पुराना घी ब्रांड 'पनघट' बाजार में आ चुका था। मगर वो मुख्य रूप से थोक बाजार, हलवाइयों, होटलों और रेस्तरां के लिए 15 किलो के बड़े डिब्बों में आता था। वहीं कंपनी ने रथ वनस्पति घी को विशेष रूप से आम घरों और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए छोटे पैक में लॉन्च किया गया।

मार्केटिंग रणनीति साबित हुई कारगर

रथ ने अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए फायदों या विटामिन के बजाय सीधे भारतीय पारिवारिक भावनाओं पर जोर दिया। इसके विज्ञापनों में यह दिखाया जाता था कि कैसे रथ वनस्पति में बना खाना पूरे परिवार को एक साथ जोड़ता है और घर में प्यार बढ़ाता है। हालांकि ये तब हुआ जब घरों में टीवी पर विज्ञापन आने लगे।

डालडा को टक्कर

बाजार में आते ही रथ ने 'डालडा' को कड़ी टक्कर दी और भारत के रसोई घरों में अपनी एक खास जगह बनाई। 1937 में आए 'डालडा' के बाद 1940 में 'गगन' और 1946 में 'पनघट' आए। इसके बाद 1950 में रथ ने अपनी देसी और भावनात्मक मार्केटिंग के दम पर बाजार में एक मजबूत पहचान बनाई। रथ वनस्पति आज भी भारत के कई हिस्सों में उपलब्ध है और दशकों से भारतीय रसोई का हिस्सा बना हुआ है।

कब मिला ट्रेडमार्क?

'रथ' को 10 अक्टूबर 1984 को चंडीगढ़ में अपना ट्रेडमार्क मिला। मगर 1990 के दशक में DCM समूह का पतन शुरू हो गया। उस समय तक यह ब्रांड DCM परिवार की सिद्धार्थ श्रीराम शाखा के कंट्रोल में था और साल 2000 में उन्होंने 'रथ' ब्रांड को 'कॉनएग्रो फूड्स' (ConAgro Foods) को 120 करोड़ रुपये में बेच दिया।

सिमटता गया मार्केट

'रथ' के TV पर कई दिलचस्प विज्ञापन आते थे, जो 1970 और 80 के दशक में दूरदर्शन पर अक्सर देखने को मिलते थे। साल 2010 में, 'रथ' को 'कारगिल इंडिया' (Cargill India) को बेच दिया गया। कारगिल ने ओडिशा में 'जगन्नाथ रथ यात्रा' को प्रायोजित करके और इसका प्रसारण किया और 'रथ' ब्रांड को फिर से बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें इसमें बहुत कम सफलता मिली।
अपनी शुरुआत के 76 साल बाद भी, यह ब्रांड आज भी बाजार में मौजूद है, हालाँकि अब इसका मार्केट काफी सिमट गया है।

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