ग्लोबल मंच, लोकल फायदा: भारत के युवा, किसान और महिलाओं को मिलेगा 21 देशों का सहयोग, BRICS में PM मोदी ने रखा विजन
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारों से परे व्यापार, स्टार्टअप, किसानों, महिलाओं और युवाओं को शामिल करने पर जोर दिया।

पीएम मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में 10 बड़ी बातों पर दिया जोर।
HighLights
सहयोग सरकारों तक सीमित न होकर जन-केंद्रित होना चाहिए- पीएम मोदी
MSME, स्टार्टअप्स, कृषि और कौशल विकास पर विशेष ध्यान हो।
ब्रिक्स के समाधान 'ग्लोबल साउथ' के लिए भी उपलब्ध हों।
नई दिल्ली। BRICS समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi Speech) ने ब्रिक्स देशों के लोगों पर केंद्रित एक व्यापक एजेंडा पेश किया। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच सहयोग सिर्फ़ सरकारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें सीधे तौर पर बिजनेस, स्टार्टअप्स, किसानों, मज़दूरों, शोधकर्ताओं, महिलाओं और युवाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए। पीएम मोदी ने कई ऐसे पोर्टल्स, नेटवर्क्स और सहयोग के तरीकों के बारे में बताया जो MSME, स्टार्टअप्स, खेती, स्किल्स, सोशल सिक्योरिटी, शहरी मोबिलिटी और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं।
पीएम मोदी ने कहा, "हम चाहते हैं कि हमारे उद्यमी, किसान, रिसर्चर, महिलाएं, युवा और आम नागरिक भी इसमें सक्रिय रूप से शामिल हों।" भारत के अनुसार, विस्तार के बाद ब्रिक्स समूह की हिस्सेदारी दुनिया की कुल आबादी का 49.5 प्रतिशत और ग्लोबल GDP का 40 प्रतिशत है।
BRICS में पीएम मोदी की 10 बड़ी बातें
पीएम मोदी ने ब्रिक्स समिट में जोर देकर कहा कि यह मंच केवल सरकारों के बीच सहयोग का सेतु नहीं बने रहना चाहिए। उन्होंने उद्यमियों, किसानों, शोधकर्ताओं, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों की ज़्यादा भागीदारी का आह्वान किया, साथ ही ऐसे संस्थानों और नेटवर्क के ज़रिए सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया जो सदस्य देशों के बीच काम कर सकें।
मोदी के भाषण का मुख्य संदेश यह था कि ब्रिक्स (BRICS) को अब मुख्य रूप से केवल सरकारों के बीच का मंच नहीं बने रहना चाहिए। उन्होंने उद्यमियों, किसानों, रिसर्चर, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों की ज़्यादा भागीदारी का आह्वान किया, साथ ही ऐसे संस्थानों और नेटवर्क के ज़रिए सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया जो सदस्य देशों के बीच काम कर सकें।
स्टार्टअप्स के लिए सहयोग
मोदी ने BRICS MSME सहयोग पोर्टल का ज़िक्र किया, जिसे सदस्य देशों के छोटे व्यवसायों को फ़ाइनेंस, जानकारी और नए बाज़ारों से जोड़ने के लिए बनाया गया है। PIB पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह प्लेटफ़ॉर्म MSME को टेक्नोलॉजी सेंटर्स, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस, ट्रेड एसोसिएशन, ट्रेनिंग ऑर्गनाइज़ेशन और पॉलिसी बनाने वालों से जोड़ेगा। ब्रिक्स ने सदस्य देशों की नेशनल नोडल एजेंसियों, चुने हुए इनक्यूबेटर्स और स्टार्टअप्स को जोड़ने वाला एक इनक्यूबेटर नेटवर्क बनाया है।
इस सिस्टम का मकसद योग्य स्टार्टअप्स को अपने देश के बाहर के इनक्यूबेटर्स और एक्सपर्ट्स की मदद लेने का मौका देना है।
खेती और किसानों के लिए
मोदी ने 'ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर' के ज़रिए खेती में टेक्नोलॉजी के ज़्यादा इस्तेमाल पर भी ज़ोर दिया। इस पहल का मकसद खेती, एग्रो-फॉरेस्ट्री, मछली पालन और एक्वाकल्चर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को लाना है।
पारंपरिक खेती से मॉर्डन फॉर्मिंग
ब्रिक्स देशों ने एग्रो-इकोलॉजी (कृषि-पारिस्थितिकी) और रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर पर फोकस्ड 'सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस' का एक नेटवर्क भी बनाया है। मोदी ने कहा कि ये सेंटर जलवायु के प्रति लचीलापन और कृषि उत्पादकता को बेहतर बनाने के लिए पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों के साथ जोड़ने का काम करेंगे।
जॉब्स एंड सोशल सिक्योरिटी के लिए न्यू ब्रिक्स प्लेटफॉर्म
मोदी ने एक और पहल 'BRICS CONNECT' का ज़िक्र किया, जो क्षमता निर्माण, रोज़गार की क्षमता और नई स्किल्स व टेक्नोलॉजी के लिए ब्रिक्स सहयोग नेटवर्क है। यह वॉलेंट्री प्लेटफ़ॉर्म स्किल्स और रोज़गार की क्षमता, सामाजिक सुरक्षा सिस्टम, वर्कफ़ोर्स में महिलाओं की भागीदारी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विषयों को कवर करता है।
शहरी विकास के लिए
मोदी ने 'ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब' का भी ज़िक्र किया, जो सदस्य देशों के लिए किफायती, समावेशी और टिकाऊ परिवहन के बारे में विचारों और तौर-तरीकों के आदान-प्रदान का एक मंच है। यह पहल ब्रिक्स के सहयोग को शहरी नीति के दायरे में लाती है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जो तेज़ी से बढ़ते शहरों और बुनियादी ढांचे की बढ़ती ज़रूरतों को देखते हुए सदस्य देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
एनर्जी सेक्टर के लिए अहम एजेंडा
स्मार्ट ग्रिड और एनर्जी स्टोरेज के लिए एक 'डिजिटल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस' भी एक वॉलंटरी सहयोग प्लेटफॉर्म के तौर पर शुरू किया गया है। इससे सदस्य देश बिजली ग्रिड और एनर्जी स्टोरेज से जुड़ी तकनीकी जानकारी, रेगुलेटरी तौर-तरीकों और संभावित पायलट-प्रोजेक्ट के अनुभवों को आपस में साझा कर सकेंगे। मोदी ने कहा कि यह पहल क्लीन-एनर्जी सिस्टम को ज़्यादा कुशल, भरोसेमंद और सुलभ बनाने में मदद कर सकती है।
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इसके अलावा, मोदी ने जिन कई तरीकों या सिस्टम का ज़िक्र किया है, उनमें से कुछ तो पहले से ही नेटवर्क या प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर काम कर रहे हैं, जबकि कुछ अभी भी सिर्फ़ प्रस्ताव के स्तर पर हैं। मोदी चाहते हैं कि ब्रिक्स के समाधान 'ग्लोबल साउथ' के लिए भी उपलब्ध हों। मोदी ने कहा कि ब्रिक्स के तहत शुरू की गई पहल का दायरा आखिरकार इस समूह से आगे भी बढ़ना चाहिए।
