भारत में पहली बार Xerox लाने वाले बीके मोदी: 43 साल पहले मोदीपुर से पहुंचाई फोटोकॉपी की दुनिया में क्रांति
डॉ. बी.के. मोदी ने 1980 के दशक में भारत में ज़ेरॉक्स तकनीक पेश कर ऑफिस ऑटोमेशन में क्रांति ला दी। ...और पढ़ें

बीके मोदी ने कैसे भारत में जेरॉक्स लाकर ऑफिसों का चेहरा बदल दिया?
HighLights
डॉ. बी.के. मोदी ने 1980 के दशक में ज़ेरॉक्स तकनीक भारत लाई।
'मोदी ज़ेरॉक्स' ने मोदीपुर में पहली ऑफिस ऑटोमेशन यूनिट स्थापित की।
इस पहल ने भारतीय कार्यस्थलों में उत्पादकता और दक्षता बढ़ाई।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। 1980 के दशक की शुरुआत में, जब भारतीय ऑफिसों में फोटोकॉपी मशीनें एक महंगी और दुर्लभ चीज हुआ करती थीं और डॉक्यूमेंट की कॉपी बनाने के लिए मुश्किल कार्बन पेपर या हाथ से टाइपिंग का सहारा लेना पड़ता था, तब एक दूरदर्शी उद्यमी ने भविष्य को भांप लिया था। डॉ. भूपेंद्र कुमार मोदी, जिन्हें डॉ. एम या बी.के. मोदी के नाम से जाना जाता है, ने भारत में जेरॉक्स टेक्नोलॉजी पेश की और व्यवसायों, सरकारी ऑफिसों और संस्थानों के काम करने के तरीके को बदल दिया।
1981 में, मोदी ने 'ग्राफिक्स इंडिया' की स्थापना की और पूरे देश में 'रैंक जैरॉक्स' कॉपियर के एकमात्र डिस्ट्रीब्यूटर बन गए। इस साहसी कदम ने एक ऐतिहासिक औद्योगिक साझेदारी की नींव रखी। सितंबर 1983 तक, उन्होंने रैंक जेरॉक्स के साथ मिलकर 'मोदी जेरॉक्स' नाम का एक जॉइंट वेंचर (संयुक्त उद्यम) बनाया और इस सहयोग को औपचारिक रूप दिया। इस वेंचर ने उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के मोदीपुर में भारत की पहली समर्पित ऑफिस ऑटोमेशन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की।
इसका समय और विजन बहुत शानदार था। उस समय भारत में इंडस्ट्री पर कड़े नियम लागू थे, और विदेशी टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप के लिए हिम्मत और स्थानीय समझ की जरूरत थी। IIT (BHU) से केमिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट और यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया से MBA करने वाले मोदी ने अपनी टेक्निकल समझ और एंटरप्रेन्योरशिप की भावना को एक साथ मिलाया। उन्होंने 'मोदी रबर' के प्रमुख के तौर पर कॉन्टिनेंटल के साथ टायर इंडस्ट्री में भारत का पहला बड़ा इंडो-जर्मन टेक्निकल सहयोग करके यह काबिलियत पहले ही दिखा दी थी।
दिल्ली और मुंबई में कुछ डेमो मशीनों और छोटी कॉपी शॉप्स के साथ मामूली शुरुआत करने के बाद, यह बिजनेस तेजी से बढ़ा। फोटोकॉपी मशीनें कभी-कभी ही ऑफिस में दिखने वाले इक्विपमेंट से बदलकर ऐसी आम चीज बन गईं जो गली के कोनों और आस-पास के सेंटर्स पर भी मिलने लगीं। इस टेक्नोलॉजी ने प्रोडक्टिविटी को बहुत बेहतर बनाया, जिससे सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में डॉक्यूमेंट की तेज़ी से कॉपी बनाना, रिकॉर्ड रखना और एडमिनिस्ट्रेशन को बेहतर ढंग से चलाना आसान हो गया।
मोदी जेरॉक्स जल्द ही भारत में भरोसेमंद ऑफिस ऑटोमेशन का पर्याय बन गया। इस जॉइंट वेंचर ने न सिर्फ हाई-एंड कॉपियर और उससे जुड़े प्रोडक्ट बनाए, बल्कि एक मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन और सर्विस नेटवर्क भी खड़ा किया। 1991 के आर्थिक उदारीकरण से काफी पहले घरेलू बाज़ार में ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग स्टैंडर्ड और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर लाकर इसने भारतीय इंडस्ट्री में एक नई शुरुआत की।
डॉ. मोदी का तरीका रणनीतिक पार्टनरशिप की ताकत का एक बेहतरीन उदाहरण था। बाद में उन्होंने कंप्यूटर के लिए ओलिवेट्टी और टेलीकॉम में अल्काटेल और टेल्स्ट्रा के साथ अन्य सफल जॉइंट वेंचर बनाए, जिससे उन्हें भारत के प्रमुख जॉइंट-वेंचर स्पेशलिस्ट में से एक के तौर पर पहचान मिली।
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'मोदी जेरॉक्स की 1981 में एक डिस्ट्रीब्यूशन एग्रीमेंट के तौर पर शुरू हुई यह कहानी मैन्युफैक्चरिंग और बाजार में लीडरशिप की कहानी में बदल गई, जिसने देश भर में वर्कप्लेस को आधुनिक बनाने में मदद की। दशकों बाद भी यह कंपनी जेरॉक्स इंडिया के तौर पर चल रही है। फोर्ब्स ने 2017 में बीके मोदी की नेटवर्थ 665 मिलियन डॉलर (6,384 करोड़ रुपये) रिपोर्ट की थी।
