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मोदीनगर की जैन शिकंजी का दिलचस्प इतिहास: 4 फुट के खोखे से परमात्मा ने की शुरुआत, आज तीसरी पीढ़ी संभाल रही विरासत

Published: Thu, 17 Sep 2026 01:46 PM (IST)

जैन शिकंजी, जो 1957 में मोदीनगर के एक छोटे पान के खोखे से शुरू हुई थी, आज उत्तर भारत का ...और पढ़ें

मोदीनगर की जैन शिकंजी का दिलचस्प इतिहास (AI फोटो)

मोदीनगर की जैन शिकंजी का दिलचस्प इतिहास (AI फोटो)

HighLights

  1. जैन शिकंजी 1957 में मोदीनगर के एक पान खोखे से शुरू हुई

  2. शार्क टैंक इंडिया में ₹40 लाख का निवेश प्राप्त किया

  3. आज ब्रांड की अनुमानित नेटवर्थ ₹40 करोड़ तक पहुंच गई है

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। आप घर पर शिकंजी बनाते हैं? जरूर बनाते होंगे। मगर शिकंजी का नाम सुनते ही आपके दिमाग में कोई नाम नहीं आता? अगर आप थोड़ा जोर लगाकर सोचें तो बहुत संभावना है कि आपके दिमाग में एक नाम जरूर आएगा। ये नाम है - जैन शिकंजी (Jain Shikanji History)। अगर आप मेरठ की तरफ जाएं तो रास्ते में कई जगह आपको इसके बोर्ड दिखेंगे।
जैन शिकंजी (Jain Shikanji Success Story) ब्रांड अपने आप में ही शिकंजी का पर्यायवाची माना जाता है। मगर इसकी शुरुआत किसने और कैसे की? आज हम आपको इसका दिलचस्प किस्सा सुनाएंगे।

मोदीनगर से हुई शुरुआत

जैन शिकंजी (Jain Shikanji Owner) उत्तर प्रदेश के मोदीनगर से शुरू हुई। ये एक साधारण पान की दुकान से निकला ऐसा अनोखा बिजनेस मॉडल है, जिसने एक लोकल ड्रिंक को आइकॉनिक ब्रांड बना दिया। सन 1957 मोदीनगर में परमात्मा शरण जैन द्वारा एक छोटी सी दुकान से इसकी नींव रखी गई थी।

छोटा-सा पान का खोखा और सफलता की कहानी

परमात्मा शरण जैन (Jain Shikanji Founder) ने अपनी पत्नी शकुंतला जैन के साथ मिलकर एक छोटे से पान के खोखे से जैन शिकंजी की शुरुआत की थी, जो केवल 4x4 फुट का था। इसमें काली मिर्च, लौंग, अनारदाना, जंबूरी नींबू और कुछ गुप्त मसालों का इस्तेमाल किया गया जो पाचन के लिए फायदेमंद हैं। उनके इस आइटम को काफी पसंद किया गया।

बाजार में उतारा पैकेट

शुरुआती दौर में दिल्ली से मेरठ घुड़दौड़ (हॉर्स रेस) देखने जाने वाले यात्री इस रास्ते से गुजरते थे और जैन शिकंजी का आनंद लेते थे। ग्राहकों की मांग को देखते हुए जैन शिकंजी को घर पर आसानी से बनाने के लिए इंस्टेंट जैन शिकंजी प्रीमिक्स पाउच के रूप में बाजार में उतारा गया।

9 साल पहले बनी कंपनी

पारंपरिक पारिवारिक बिजनेस से आगे बढ़ते हुए, इस ब्रांड ने 2017 में HBMB फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की शुरुआत की। वो साधारण सी दुकान आज उत्तर भारत में एक प्रसिद्ध ब्रांड और एफएमसीजी (FMCG) कारोबार बन चुकी है, जिसके पैकेज्ड मसाले ऑनलाइन और बाजारों में उपलब्ध हैं।

बेटे और फिर पोते ने बढ़ाया कारोबार

परमात्मा शरण जैन के बाद उनके बेटे सतीश जैन और फिर पोते अनुभव जैन ने इस पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाया और आज अनुभव ही इस कंपनी को संभाल रहे हैं। आज ये कंपनी जैन शिकंजी मसाला, इंस्टेंट जैन शिकंजी, जैन शिकंजी जीरा ड्रिंक, जैन शिकंजी एनर्जी ड्रिंक, चाट मसाला, चाय मसाला, ठंडाई पाउडर और जलजीरा मसाला बेचती है।
अनुमान के अनुसार जैन शिकंजी की नेटवर्थ FY25 में लगभग 40 करोड़ रुपये रही थी।

शार्ट टैंक में मिली सफलता

2022 में जैन शिकंजी बिजनेस शो शार्क टैंक इंडिया में पहुंची, जहां इसने निवेशकों को आकर्षित किया। शार्क टैंक में निवेशक अमन गुप्ता, विनीता सिंह, अशनीर ग्रोवर और अनुपम मित्तल ने जैन शिकंजी में 40 लाख रुपये का निवेश किया। उन्होंने कुल 30 फीसदी इक्विटी हासिल की।
अब जैन शिकंजी का लक्ष्य अपने आउटलेट्स को और ज्यादा शहरों में पहुंचाना और बड़े स्तर पर पैकेजिंग और डिस्ट्रिब्यूशन का है।

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