बिना रकम गिरवी रखे बांटे 47 लाख करोड़, 'अनसिक्योर्ड लोन' देने में ये कंपनीज रही आगे, बैंकों का पैसा भी दांव पर
SBI ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2005 में असुरक्षित लोन दो लाख करोड़ रुपये था जो ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर
नई दिल्ली। बैंकों का अनसिक्योर्ड लोन (Unsecured Loans) पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ा है और इससे जोखिम संवेदनशीलता को लेकर चिंताएं बढ़ गई है। स्टेट बैंक आफ इंडिया (SBI) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2005 में असुरक्षित लोन दो लाख करोड़ रुपये था जो वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 46.90 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस तरह कुल बैंक कर्ज में असुरक्षित ऋण की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2005 में 17.7 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 24.5 प्रतिशत हो गया।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2019 से असुरक्षित कर्ज की हिस्सेदारी लगातार 20 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है और यह बैंकिंग प्रणाली में संभावित क्रेडिट जोखिम के बढ़ने को दिखाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, असुरक्षित कर्ज में तेजी से वृद्धि बढ़ती जोखिम संवेदनशीलता को भी दिखाती है, क्योंकि इन कर्ज की एवज किसी तरह की कोई चीज गिरवी नहीं रखी गई है।
क्या होता है अनसिक्योर्ड लोन?
अनसिक्योर्ड लोन, वह बैंक कर्ज होता है जिसमें आपको कोई संपत्ति (गोल्ड, गाड़ी या घर) गिरवी रखने की ज़रूरत नहीं होती है। दरअसल, बैंक इस तरह का लोन पूरी तरह से आपकी आय, क्रेडिट स्कोर (CIBIL स्कोर) और फाइनेंशियल कंडीशन के आधार पर देते हैं। यह आसानी से मिल जाता है लेकिन इसमें ब्याज दरें ज़्यादा होती हैं क्योंकि बैंक के लिए यह ज़्यादा जोखिम भरा होता है। पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड, अनसिक्योर्ड लोन हैं।
तेजी से बढ़ा इस तरह के कर्ज का चलन
कुल कर्ज वृद्धि की तुलना में असुरक्षित कर्ज में वृद्धि तेजी से हुई है, जिससे मध्यम अवधि में क्रेडिट क्वालिटी को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। कुल कर्ज में असुरक्षित कर्ज का बढ़ता हिस्सा बैंकों के कर्ज पोर्टफोलियों में एक प्रणालीगत बदलाव को दिखाता है। वित्त वर्ष 2025 में कुल असुरक्षित कर्ज में सार्वजनिक क्षेत्र के बैकों का हिस्सा लगभग आधा था और इसके बाद निजी क्षेत्र के बैंकों का नंबर आता है। वित्त वर्ष 2025 के लिए बैंकों के आधिकारिक डेटा से पता चलता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का असुरक्षित कर्ज में 53 प्रतिशत हिस्सा था।
निजी क्षेत्रों के बैंकों का हिस्सा 38 प्रतिशत था, विदेशी बैंकों को सात प्रतिशत था जबकि स्माल फाइनेंस बैंकों का कुल असुरक्षित कर्ज में दो प्रतिशत हिस्सा था। हाल ही में आरबीआई ने भी दिसंबर, 2025 में जारी अपनी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में असुरक्षित कर्ज में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया था।
फिनटेक कर्जदाताओं की कुल लोन बुक में असुरक्षित कर्ज की हिस्सेदारी 70% से ज्यादा आरबीआई के अनुसार, बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) दोनों में, अच्छी गुणवत्ता वाले उधारकर्ताओं के बकाया लोन असुरक्षित बिजनेस लोन श्रेणी में सबसे ज्यादा थे, जिससे परिसंपत्ति गुणवत्ता को लेकर कुछ राहत मिली।
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आरबीआइ ने यह भी कहा था कि फिनटेक कर्जदाताओं की कुल लोन बुक में असुरक्षित लोन का हिस्सा 70 प्रतिशत से ज्यादा है। इनमें से आधे से ज्यादा लोन 35 साल से कम उम्र के उधारकर्ताओं को दिए गए थे और यह असुरक्षित कर्ज सेगमेंट में कम उम्र के उधारकर्ताओं की बढ़ती हिस्सेदारी को दिखाता है। यह ठीक है कि असुरक्षित कर्ज बढ़ा रहा है, लेकिन हाल में बैंकों के फंसे कर्जों में कमी आई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बैंकों के सकल एनपीए 2018 में 11.46 प्रतिशत के उच्चस्तर से कम होकर 2025 में 2.31 फीसद हो गए हैं।
एजेंसी इनपुट के साथ
