'हम तो जीत चुके थे, फिर फैसला ही पलट दिया गया...', JP Associates डील हाथ से फिसलने पर भड़के वेदांता के अनिल अग्रवाल
वेदांता रिसोर्सेज के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने दावा किया है कि जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए उनकी कंपनी सबसे ...और पढ़ें
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अनिल अग्रवाल ने जयप्रकाश एसोसिएट्स पर किया बड़ा दावा

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नई दिल्ली। वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड (Vedanta Resources) के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने रविवार को जयप्रकाश एसोसिएट्स (Jaiprakash Associates) के अधिग्रहण को लेकर एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि कंपनी को जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए सबसे ऊंची बोली लगाने वाला घोषित किया गया था, लेकिन बाद में इस फैसले को पलट दिया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में, अग्रवाल ने कहा कि वेदांता "उचित माध्यमों" के जरिए अपना पक्ष रखेगी, जो रेजोल्यूशन प्रोसेस को कानूनी चुनौती देने का संकेत है।
कई बोलीदाता हुए प्रोसेस से बाहर
अग्रवाल ने बताया कि जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए बोली की प्रक्रिया 'इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड' (IBC) के तहत लेनदारों की समिति (CoC) द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से पूरी हुई। उनके अनुसार, कई बोलीदाताओं ने इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया, लेकिन बाद में वे इससे बाहर हो गए, जिसके बाद वेदांता सबसे बड़ी बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में बची।
'मिल गई थी जीत'
अग्रवाल ने दावा किया, "आखिरकार, हमें सार्वजनिक रूप से सबसे ऊंची बोली लगाने वाला घोषित किया गया। यह एक पारदर्शी प्रक्रिया थी। हमें लिखित रूप में सूचित किया गया कि हम जीत गए हैं"। उन्होंने आगे कहा कि बाद में इस परिणाम को बदल दिया गया।
अग्रवाल के अनुसार, "कुछ दिनों बाद, फैसला बदल दिया गया। मैं डिटेल में नहीं जाना चाहता। यह सही मंच के लिए है।"
This morning, I was reading Chapter 15 of the Bhagavad Gita. One thought stayed with me. “Have courage. Stay humble. Do your duty without attachment.” Life tested this.
— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) March 29, 2026
Some years ago, Shri Jaiprakash Gaur, who built Jaypee Group, came to meet me in London. He had built an… pic.twitter.com/aEPQet0WQH
जयप्रकाश के साथ हुई बातचीत का किया जिक्र
अग्रवाल ने कहा कि इस घटनाक्रम ने उन्हें जयप्रकाश गौर के साथ हुई एक पुरानी बातचीत की याद दिला दी, जिन्होंने वर्षों पहले लंदन में उनसे संपर्क किया था और वो भी अपने कारोबार के फ्यूचर को लेकर। अग्रवाल ने कहा कि "उनकी एकमात्र इच्छा बहुत सीधी-सादी थी: कि उन्होंने जो कुछ भी बनाया है, वह सुरक्षित हाथों में जाए और सही इरादे के साथ उसे आगे बढ़ाया जाए,"।
उन्होंने कहा कि उस समय वेदांता आगे नहीं बढ़ी, लेकिन जब वह एसेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस में गई, तो यह मौका फिर से सामने आया।
गीता का भी किया जिक्र
अग्रवाल ने इस घटना को भगवद् गीता की शिक्षाओं से जोड़ते हुए कहा कि इस मामले को आगे बढ़ाते समय कंपनी बिना किसी मोह के काम करेगी। उन्होंने कहा, "जब धर्म के अनुसार कोई वादा किया जाता है, तो उसे वापस नहीं लिया जाना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा कि वेदांता "तथ्यों को सही तरीके से सामने रखेगी" और उचित मार्ग का पालन करेगी।
अदाणी के प्लान को मिली मंजूरी
अग्रवाल का यह बयान वेदांता के उस कदम के बाद आया है, जिसमें उसने जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज की प्रतिद्वंद्वी बोली को मिली मंजूरी को चुनौती दी थी। इस महीने की शुरुआत में, वेदांता ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के एक आदेश के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) का रुख किया था।
NCLT की इलाहाबाद बेंच ने 17 मार्च को समाधान योजना को मंजूरी दे दी थी, और अदाणी एंटरप्राइजेज को सफल रेजोल्यूशन आवेदक के तौर पर समर्थन दिया था।
