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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 11, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अडानी समूह अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में 70 अरब डॉलर का करेगी निवेश, डिजिटल बुनियादी ढांचे में भी होगा निवेश

By NiteshEdited By:
Published: Thu, 11 Nov 2021 06:54 PM (IST)Updated: Fri, 12 Nov 2021 06:43 AM (IST)

एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अडानी के समूह ने अगले एक दशक में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में ...और पढ़ें

Adani Group will invest dollor 70 billion in renewable energy will also invest in digital infrastructure
Adani Group will invest dollor 70 billion in renewable energy will also invest in digital infrastructure

नई दिल्ली, ब्लूमबर्ग। एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अडानी के समूह ने अगले एक दशक में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में 70 अरब डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके बाद अडानी समूह दुनिया की सबसे बड़ी अक्षय ऊर्जा कंपनी बन जाएगी। यह समूह डिजिटल बुनियादी ढांचे में भी बड़ा निवेश करने जा रही है। अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने गुरुवार को ब्लूमबर्ग इंडिया इकोनॉमिक फोरम में यह बातें कहीं।

अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में आगे बढ़ने के बाद और स्वच्छ बिजली का उत्पादन करने की क्षमता अडानी समूह को भारत के अलावा दुनिया के अधिकांश डेटा को वेयरहाउस करने के लिए "ग्रीनेस्ट चॉइस" बना देगी। कुछ अरबपतियों के मुताबिक, बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बुनियादी ढांचा अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा-खपत उद्योग बन जाएगा।

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BloombergNEF’s के हेड ऑफ इंडिया रिसर्च शांतनु जायसवाल के अनुसार, अडानी को डेटा सेंटर्स को पावर देने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि उन्हें 24X7 बिजली की आपूर्ति की जरूरत होगी। जायसवाल ने कहा, 'अडानी को अक्षय ऊर्जा के भंडारण में निवेश करना चाहिए या अन्य स्रोतों की तलाश करनी चाहिए ताकि जब सूरज की चमक न हो या हवा गति धीमी हो फिर भी बिना किसी बाधा के बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।'

बता दें कि समूह का ध्यान बाधाओं के बावजूद अल्ट्रा-स्पीड 5G सेवाओं, क्वांटम कंप्यूटिंग और क्लाउड स्टोरेज के विस्तार के रूप में डेटा केंद्रों की बढ़ती मांग की देख-रेख करना है। कोविड -19 महामारी के दौरान डिजिटल लेनदेन को भी बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिला, जिसने लोगों को घर से काम करने, स्टडी करने और खरीदारी करने के लिए मजबूर किया। स्मार्टफोन के उपयोग में तेजी और सस्ते मोबाइल डेटा टैरिफ के बीच Amazon.com Inc. और Alphabet Inc. के Google जैसी वैश्विक फर्मों को डेटा स्टोरेज सेवाएं देने के लिए भारत में लगातार मांग आती रही।