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2000 Rupees Note: नोटबंदी के लगभग छह साल बाद RBI ने क्यों बंद किया दो हजार का नोट, क्या है इस फैसले की वजह

2000 Rs Note रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने शुक्रवार को एक अहम फैसला लेते हुए 2000 रुपये के नोट वापस लेने का फैसला किया है। आखिरकार सरकार ने 2016 में नोटबंदी के साढ़े छह साल बाद यह फैसला क्यों लिया है। (फोटो-जागरण)

By Jagran NewsEdited By: Anand PandeyPublished: Fri, 19 May 2023 09:26 PM (IST)Updated: Fri, 19 May 2023 09:44 PM (IST)
2000 Rupees Note Ban After almost six years of demonetization, why did RBI stop Rs 2000 note

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को 2000 रुपये के नोट को सर्कुलेशन से बाहर करने का एलान किया है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि 2000 रुपये के नोट की वैधता समाप्त होगी। फिलहाल 2000 रुपये के नोट चलते रहेंगे। रिजर्व बैंक के इस कदम से एक बार फिर नोटबंदी की यादें ताजा हो गई हैं।

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इस बार लोगों को किसी भी तरह से घबराने की जरूरत नहीं है, क्‍योंकि फिलहाल 2000 रुपये के नोट बाजार में चलते रहेंगे। आरबीआई ने यह भी बताया कि यह नोट 30 सितंबर तक बैंकों में वापस लिए जा सकेंगे। इस आर्टिकल में हम आपको ये बताने वाले हैं कि आखिरकार सरकार ने 2016 में नोटबंदी के साढ़े छह साल बाद यह फैसला क्यों लिया है।

2000 के नोट जारी करने का उद्देश्य?

RBI ने नवंबर 2016 में 2000 के नोट जारी किया था। इन नोट को RBI कानून 1934 की धारा 24(1) के तहत जारी किया गया था। सरकार ने ये फैसला इसलिए लिया था ताकि उस समय बाजार में मौजूद 500 और 1000 रुपये की जो करंसी नोटबंदी के तहत हटाई गई थी,उससे अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके।

नोट की पूरी हो चुकी है समय सीमा?

आरबीआई के मुताबिक 2000 के करीब 89% नोट मार्च 2017 से पहले ही जारी हो गए थे। सरकार का कहना है कि ये नोट चार-पांच साल तक अस्तित्व में रहने की उनकी सीमा पार कर चुके हैं या पार करने वाले हैं। ये भी एक बड़ी वजह है जिसकी वजह से 2000 के नोट को सरकार बैन करने का फैसला किया है।

नोट के सर्कुलेशन में कमी?

31 मार्च 2018 को 6.73 लाख करोड़ रुपये के नोट बाजार के सर्कुलेशन में थे। यानी मार्केट में मौजूद कुल नोटों की हिस्सेदारी पहले 37.3% थी। 31 मार्च 2023 तो यह आंकड़ा घटकर 3.62 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानि चलन में मौजूद कुल नोटों में से दो हजार रुपये की नोटों की हिस्सेदारी सिर्फ 10.8% ही रह गई है।

2 हजार रुपये के नोट लाने का उद्देश्य पूरा

जब नोटबंदी हुई थी तब सरकार ने 2000 रुपये के नए नोट लाए थे। नोटबंदी में 500 और 1000 रुपये के नोट को बैन कर दिया गया था। बाजार में उतारने के बाद नोट चलन में लाने का उद्देश्य भी पूरा हो गया है। साल 2018-2019 में सरकार ने 2 हजार रुपये के नोट की छपाई बंद कर दी थी।

2 हजार रुपये के नोट का कम हो रहा इस्तेमाल?

RBI के मुताबिक 2000 रुपये के नोट आमतौर पर लेनदेन में बहुत ज्यादा इस्तेमाल में नहीं कर रहे हैं। आरबीआई की क्लीन नोट पॉलिसी के तहत यह फैसला लिया गया है कि दो हजार रुपये के नोटों को चलन से हटा लिया जाए। हालांकि, आपके पास पुरा समय होगा की आप बैंक जाकर अपने पास रखे 2 हजार रुपये के नोट को बदल सकते हैं।

क्या है क्लीन नोट पॉलिसी?

केंद्रीय बैंक की "क्लीन नोट पॉलिसी" के तहत 2,000 रुपये के नोट वापस ले लिए गए हैं। 1999 में शुरू की गई आरबीआई की इस नीतिओ का उद्देश्य अच्छी गुणवत्ता वाले करेंसी नोट और सिक्के उपलब्ध कराना है, जबकि गंदे नोटों को चलन से बाहर कर दिया जाता है। रिजर्व बैंक ने तब बैंकों को निर्देश दिया था कि वे जनता को केवल अच्छी गुणवत्ता वाले स्वच्छ नोट जारी करें और गंदे नोटों को अपने काउंटरों पर रिसाइकिल करने से बचें।

इसके लिए कई अन्य कदम उठाए गए, जिसमें बैंकों को नोट पैकेटों के स्टैपलिंग को खत्म करने और पैकेटों को पेपर/पॉलीथीन बैंड के साथ बैंडिंग करने का निर्देश देना शामिल है, ताकि करेंसी नोटों का जीवन बढ़ाया जा सके। लोगों से यह भी आग्रह किया गया कि वे करेंसी नोटों पर न लिखें। बैंकों को गंदे और कटे-फटे नोटों को बदलने के लिए सुविधाएं प्रदान करने का निर्देश दिया गया।

इन बातों को भी समझ लें

सर्कुलेशन: करेंसी नोटों का प्रचलन नोटों को एक व्यक्ति या संगठन से दूसरे व्यक्ति तक ले जाने की प्रक्रिया को संदर्भित करता है। 2000 रुपये के नोट को चलन से वापस लेने का मतलब होगा कि ये नोट अब भारतीय अर्थव्यवस्था में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध नहीं होंगे।

लीगल टेंडर: कानूनी निविदा मुद्रा का एक रूप है, जिसे सरकार द्वारा ऋण के भुगतान के लिए मान्य माना जाता है। 2000 रुपये का नोट भारत में कानूनी निविदा है, जिसका मतलब है कि इसका इस्तेमाल वस्तुओं और सेवाओं के भुगतान के लिए किया जा सकता है।

डिमोनेटाइजेशन: डिमोनेटाइजेशन कानूनी निविदा मुद्रा को संचलन से वापस लेने की प्रक्रिया है। 2016 में भारत सरकार की डिमोनेटाइजेशन योजना के परिणामस्वरूप 500 और 1000 रुपये के नोटों को प्रचलन से हटा दिया गया।

नकली नोट: नकली नोट नकली करेंसी नोट होते हैं जो असली नोटों की तरह दिखने के लिए बनाए जाते हैं। नकली नोट अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी समस्या हो सकते हैं। नकली नोट मुद्रास्फीति का कारण बन सकते हैं।

आर्थिक प्रभाव: 2000 रुपये के नोट को बंद करने का भारतीय अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है। इससे आर्थिक गतिविधियों में कमी आने की संभावना है, क्योंकि लोगों द्वारा नकदी का इस्तेमाल करने की संभावना कम होगी।

जनता की प्रतिक्रिया: 2000 रुपए के नोट को वापस लिए जाने पर जनता की प्रतिक्रिया मिलीजुली रही है। कुछ लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि उनका मानना है कि इससे भ्रष्टाचार और जालसाजी को कम करने में मदद मिलेगी। कई लोगों ने इस निर्णय की आलोचना की है, उनका मानना है कि यह असुविधाजनक होगा और लोगों के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। 

कैशलेस इंडिया का भविष्य: 2000 रुपये के नोट को वापस लेने से कैशलेस भारत में बदलाव की गति तेज होने की संभावना है। सरकार कई सालों से कैशलेस समाज को बढ़ावा दे रही है और 2000 रुपये के नोट को बंद करना इस दिशा में एक बड़ा कदम है।

 


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