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एक ही काफी है! UPI के दौर में भी ₹1 के सिक्के की खनक कायम, 5499 करोड़ सिक्कों और 38.4% हिस्सेदारी के साथ नंबर-1

Published: Sat, 27 Jun 2026 11:44 AM (GMT+05:30)

डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बावजूद, भारत में 1 रुपये का सिक्का आज भी सबसे अधिक प्रचलन में है, जिसकी संख्या 5499 करोड़ है।

भारत में 5499 करोड़ 1 रुपये के सिक्के प्रचलन में।

भारत में 5499 करोड़ 1 रुपये के सिक्के प्रचलन में।

HighLights

  1. भारत में 5499 करोड़ 1 रुपये के सिक्के प्रचलन में।

  2. कुल सिक्कों में 38.4% हिस्सेदारी के साथ नंबर वन।

  3. मंदिरों, ग्रामीण इलाकों और छोटे लेनदेन में अहम।

नई दिल्ली। आज का जमाना डिजिटल है। हर गली-मोहल्ले में UPI की गूंज होती है। पेटीएम पर 10 रुपये प्राप्त हुए से लेकर गूगल पे पर 101 रुपये मिले तक। लेकिन तेजी से बढ़ती इस डिजिटल आबादी के बीच आज भी 1 रुपये की कीमत जस की तस बनी है। और जब भी 1 रुपये की बात होती है, तो हमारे दिमाग में एक रुपये का सिक्का ही आता है। 

सिक्कों और उनके सर्कुलेशन को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक ने 2025-26 की एनुअल रिपोर्ट में जानकारी दी है। आइए जानते हैं कि देश में 1 रुपये के सिक्कों की संख्या और इनकी वैल्यू कितनी है।

देशभर में 1 रुपये के 5499 करोड़ सिक्के

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार मार्च 2026 तक भारत में 1 रुपये के कुल 5499 करोड़ सिक्के चलन में थे। यह भारत में चल रहे अन्य सिक्कों के मुकाबले सबसे ज्यादा है। वित्त वर्ष 2026 में भारतीय सिक्कों में 1 रुपये के सिक्के की हिस्सेदारी 38.4% थी।

हालांकि, पिछले साल के मुकाबले इसमें थोड़ी गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2025 में 1 रुपये के सिक्के की हिस्सेदारी 39.3% थी। लेकिन इसके बावजूद एक रुपये का सिक्का भारत में चलन और हिस्सेदारी के मामले में नंबर वन पर बना हुआ है।

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1 रुपये के सिक्के का यह दबदबा लंबे अरसे से चला रहा है। RBI की एनुअल रिपोर्ट के अनुसार साल 2014 से 2016 तक भारत में 1 रुपये के सिक्कों के प्रचलन की कुल हिस्सेदारी 42% थी।

साल 2016 में 1 रुपये के 4500 करोड़ सिक्के थे। सिक्कों की संख्या इस लिए लगातार बढ़ती रहती है, क्योंकि ₹1 के सिक्के बहुत कम मात्रा में चलन से बाहर किए जाते हैं। यही कारण है कि 2016 में 4500 करोड़ का आंकड़ा 2026 में 5499 करोड़ तक पहुंच गया। 2025 में एक रुपये के सिक्कों की वैल्यू 5387 करोड़ और 2024 में 5299 करोड़ थी।

वैल्यू के हिसाब 5 और 10 रुपये की हिस्सेदारी ज्यादा

एक बैंक अधिकारी ने कहा, "अगर समय के साथ चलन में मौजूद सिक्कों की वैल्यू पर नजर डालें, तो 1 रुपये के सिक्कों का हिस्सा कम हुआ है। अब 5 और 10 रुपये के सिक्कों का हिस्सा ज्यादा है।"

19 जून, 2026 तक चलन में मौजूद कुल सिक्कों में 5 और 10 रुपये के सिक्कों की संख्या भले ही सिर्फ 23.5% थी, लेकिन कुल वैल्यू में इनका हिस्सा 53.5% था, जो 22,209 करोड़ रुपये के बराबर है।

क्यों और कहां 1 रुपये के सिक्के का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है?

रेडिएंट कैश मैनेजमेंट सर्विसेज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डेविड देवसहायम के अनुसार, 1 रुपये के सिक्के का इस्तेमाल आज भी मंदिरों और छोटे-मोटे लेन-देन में बड़े पैमाने पर होता है।

उन्होंने कहा, "इस सिक्के का इस्तेमाल आने-जाने के लिए भी किया जाता है और यह खास तौर पर भारत के ग्रामीण इलाकों में काफी प्रचलित है।"

क्वांटेस रिसर्च के MD और CEO और स्मॉलकेस मैनेजर कार्तिक जोनागदला ने कहा कि UPI ने भारत के कई हिस्सों में, खासकर शहरों और रोजमर्रा के पेमेंट के लिए कैश की जरूरत को काफी कम कर दिया है। हालांकि, इसने सिक्कों की जरूरत को खत्म नहीं किया है। 1 रुपये का सिक्का इसलिए बना हुआ है क्योंकि यह एक बहुत ही बुनियादी समस्या को हल करता है। किराना स्टोर, बसों, सड़क किनारे सामान बेचने वालों, ग्रामीण बाजारों और अनौपचारिक सेवाओं में कैश का इस्तेमाल आज भी आम है और सही छुट्टे पैसे का महत्व आज भी बना हुआ है।"

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