यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 13, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
खुलवाने जा रहे हैं बच्चों का Bank Account तो ध्यान रखें ये बातें, सावधानी हटी तो हो सकता है बड़ा नुकसान
Bank Account for Minors बैंकों द्वारा बच्चों के भी बचत खाते खोले जाते हैं। यह काफी हद तक आम बचत ...और पढ़ें

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। आज के समय में वित्तीय सेवाएं एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं रह गई हैं। एक नाबालिग भी बड़ी आसानी से अपना बैंक अकाउंट रख सकता है और उसे ऑपरेट कर सकता है। 2014 के बाद से आरबीआई की ओर से 10 साल के अधिक के बच्चों को ये सुविधा दे गई है, जिसके बाद बच्चों के लिए खाता खुलवाना काफी आसान हो गया है।
बच्चों के लिए आईसीआईसीआईसी बैंक यंग स्टार्स अकाउंट, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया पहला कदम और पहली उड़ान, एचडीएफसी बैंक किड्स एडवांटेज और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का युवा बैंकिंग खाता है। लेकिन नाबालिगों का खाता खोलते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिसके बारे में हम इस रिपोर्ट में बताने जा रहे हैं।

बच्चे की उम्र
ज्यादातर बैंकों में नाबालिगों के लिए दो प्रकार के खाते होते हैं। एक दस साल से कम के बच्चों के लिए और दूसरा 10 साल से 18 साल के बच्चों के लिए होता है। बड़ी बात यह है कि अगर बच्चा 10 साल से छोटा है, तो माता- पिता को उसके साथ संयुक्त रुप से संचालित करना होता है।
न्यूनतम बैंलेस और बैंकिंग सुविधाएं
नाबालिगों को भी बैंक सभी प्रकार की सुविधाएं देते हैं। अधिकतर बैंकों में न्यूनतम बैंलेस की सीमा 2500 रुपये से लेकर 5000 रुपये है। इसके अलावा इन खातों पर सभी प्रकार की बैंकिंग सुविधाएं दी जाती हैं, जिसमें चेक बुक, इंटरनेट बैंकिंग और एटीएम शामिल हैं।
डेबिट कार्ड
कुछ बैंक फोटो के साथ डेबिट कार्ड जारी करते हैं, जबकि कुछ बैंक के कार्ड पर माता-पिता या फिर बच्चे का नाम हो सकता है। सुनिश्चित करें कि खाते पर एसएमएस अलर्ट सुविधा सक्रिय है, जिससे लेनदेन की बारे में जानकारी तुरंत प्राप्त हो। इसके साथ ही बच्चे को यह दिखाने के लिए एटीएम तक ले जाएं कि पैसे सुरक्षित तरीके से कैसे निकाले जाएं।

खर्च करने की सीमा
नाबालिग खाते के साथ खर्च करने की सीमा भी जुड़ी होती है। हालांकि यह बैंक पर निर्भर करती है। आप बैंक की ओर से दी गई सीमा के मुताबिक 1000 रुपये, 2,500 रुपये और 5000 रुपये तक हो सकती है। बैंक से आप एक वित्त वर्ष में माता-पिता की सहमति के बिना 50,000 रुपये और सहमति के साथ 2 लाख रुपये निकाल सकते हैं।

