बिहार के VTR का नया कलेवर: हेली पैकेज और नए जंगल सफारी रूट से रोमांचक होगी सैर
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में 16 अक्टूबर से नया पर्यटन सत्र शुरू होगा, जिसमें दो नए जंगल सफारी रूट और कई रोमांचक पैकेज पेश किए जाएंगे।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
वीटीआर में 16 अक्टूबर से नया पर्यटन सत्र, दो नए सफारी रूट।
स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड प्रशिक्षण, इतिहास-संस्कृति से परिचय कराएंगे।
गिद्ध संरक्षण केंद्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम और हेली पैकेज भी उपलब्ध।
संवाद सूत्र, वाल्मीकिनगर। वाल्मीकिनगर स्थित वन विभाग के सभागार सह ऑडियो वीडियो हॉल में शनिवार को नेपाल के चितवन राष्ट्रीय निकुंज के नेचर गाइड के सहयोग से वीटीआर के नेचर गाइड को प्रशिक्षण देने के लिए दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वन संरक्षक गौरव ओझा ने बताया कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में संभवतः 16 अक्टूबर से नए पर्यटन सत्र का शुरुआत होगी।
जिसमें स्थानीय ऐसे युवा जो इंटर या बीए में पढ़ रहे है उन्हें नेचर गाइड के रूप में जोड़ने की तैयारी की जा रही है। ताकि ऐसे युवा पढ़ने के साथ ही अपना पढ़ाई आदि का खर्च निकाल सके। ऐसे युवा लोगों के लिए ही दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है।
कार्यशाला में नेपाल के चितवन राष्ट्रीय निकुंज से आए नेचर गाइड सुमंत गुरुंग सहित दो नेचर गाइड के द्वारा वीटीआर के नेचर गाइड को प्रशिक्षित किया जाएगा।
प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद युवा पर्यटकों को सफारी के दौरान सिर्फ वन्य जीव तथा वन क्षेत्र के बारे में ही नहीं बताएंगे। बल्कि पर्यटकों को वाल्मीकिनगर के इतिहास तथा वाल्मीकिनगर से जुड़ी पौराणिक कहानियों से भी परिचय कराएंगे।
साथ ही नेचर गाइड पर्यटकों को वीटीआर में अवस्थित पौराणिक एवं ऐतिहासिक मठ मंदिर के इतिहास एवं धार्मिक गतिविधियों के बारे में भी बताएंगे।
कार्यशाला में नेचर गाइड के प्रशिक्षण के लिए वन प्रमंडल दो तथा वन प्रमंडल एक के लगभग 50 युवा शामिल हुए। वीटीआर का नए पर्यटन सत्र में पर्यटकों के लिए बिल्कुल अलग होने वाला है।
पर्यटक इस नए पर्यटन सत्र में नए पर्यटन स्थल का दीदार करने के साथ ही नए रूट पर जंगल सफारी का आनंद उठाएंगे। पर्यटकों की वीटीआर भ्रमण को रोमांचक बनाने के लिए वन विभाग के द्वारा कई नया पैकेज भी लाया जा रहा है।
वाल्मीकिनगर की तरह गोवर्धना और मंगुराहा में पर्यटकों के लिए कल्चर प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। जिसमें पर्यटक स्थानीय थारू समुदाय के कल्चर प्रोग्राम का आनंद उठा सकते है।
जंगल सफारी के लिए खोला गया दो नया ट्रैक
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व आने वाले पर्यटकों के लिए वन प्रमंडल दो तथा एक में दो नया जंगल सफारी रूट का विस्तार किया गया है।
पर्यटकों के लिए वन प्रमंडल दो के मदनपुर वन क्षेत्र में तथा वन प्रमंडल एक के भवानीपुर वन क्षेत्र में जंगल सफारी के लिए नया रूट का विस्तार किया गया है। पर्यटक अब मदनपुर स्थित गेट वे ऑफ वीटीआर से तथा भवानीपुर से भी जंगल सफारी का आनंद उठा सकते है।
वाल्मीकिनगर जंगल सफारी रूट का किया जाएगा गनौली तक विस्तार
वाल्मीकिनगर में जंगल सफारी के लिए पहुंचने वाले पर्यटक को अब जंगल सफारी के साथ ही विलुप्त हो रहे दुर्लभ प्रजाति के गिद्ध का भी दीदार करने का मौका मिलने वाला है।
वीटीआर प्रशासन की द्वारा पर्यटक को जटाशंकर चेक नाका से जंगल सफारी कराने के पश्चात उन्हें गनौली स्थित गिद्ध संरक्षण केंद्र का अवलोकन कराने के लिए जंगल सफारी रूट का विस्तार गनौली तक किया जाएगा।
पर्यटक अब वीटीआर के वन क्षेत्र में जंगल सफारी करने के साथ ही गनौली स्थित गिद्ध संरक्षण केंद्र में विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुके दुर्लभ प्रजाति के गिद्ध का भी अवलोकन कर सकेंगे।
पर्यटक को 10000 में मिलेगा पूरे दिन का सफारी पैकेज
वाल्मीकिनगर पहुंचने वाले पर्यटकों को वन प्रमंडल दो के पर्यटन स्थल का दीदार करने के साथ ही वन प्रमंडल एक के पर्यटन स्थल का भी दीदार कराने के लिए विभाग के द्वारा दस हजार में पूरे दिन का सफारी पैकेज लाया जा रहा है।
जिसमें पर्यटक को विभाग के द्वारा वाल्मीकिनगर के वीटीआर क्षेत्र में जंगल सफारी कराने के बाद गनौली स्थित गिद्ध संरक्षण केंद्र में गिद्ध का अवलोकन कराया जाएगा। इसके बाद पर्यटक को वन प्रमंडल एक के चिउटाहा, रघिया वन क्षेत्र तथा मंगुराहा के पर्यटन स्थल का भ्रमण कराया जाएगा। इस दौरान पर्यटक को गोवर्धना में लंच भी कराया जाएगा।
हेली पैकेज भी विकल्प
वन संरक्षक ने बताया कि हमारे लिए गर्व की बात है कि बिहार में जिन जगहों पर हेली सर्विस शुरू की जा रही है। उसमें वाल्मीकिनगर हवाई अड्डा को भी चुना गया है।
ऐसे पर्यटकों के लिए वन विभाग के तरफ से हेली पैकेज बनाया गया है। जिसमें जंगल सफारी से लेकर पर्यटकों को गंडक बराज, कालेश्वर मंदिर सहित अन्य पर्यटन स्थल का दीदार कराया जाएगा।
इस दौरान वन संरक्षक गौरव ओझा, वन प्रमंडल दो के डीएफओ विकास अहलावत, डब्लूडब्लूएफ के सौरभ वर्मा के साथ ही वन प्रमंडल दो तथा एक के रेंजर, वनपाल तथा वनरक्षी शामिल थे।
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