पश्चिम चंपारण में नवविवाहिता की मौत के 14 माह बाद आया फैसला, पति हत्या का दोषी, सास बरी
पश्चिम चंपारण में शादी के तीन माह बाद नवविवाहिता संध्या यादव की हत्या के मामले में पति प्रमोद यादव को ...और पढ़ें

पुलिस की गिरफ्त में आरोपित।
HighLights
पति प्रमोद यादव नवविवाहिता की हत्या का दोषी करार।
सास लीलावती देवी को साक्ष्य के अभाव में बरी किया।
सजा के बिंदु पर सुनवाई 20 नवंबर को निर्धारित।
संवाद सूत्र, बगहा (पश्चिम चंपारण)। शादी के महज तीन माह बाद नवविवाहिता की हत्या के करीब 14 माह पुराने मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने पिपरासी थाना कांड संख्या 75/2025 में प्रमोद यादव को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 91 एवं 3 (5) के तहत हत्या का दोषी पाया।
दहेज मृत्यु से संबंधित धारा 80(2) के आरोप से उसे दोषमुक्त, जबकि उसकी मां लीलावती देवी को साक्ष्य के अभाव में सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए अदालत ने 20 नवंबर की तिथि निर्धारित की है। मामला पिपरासी थाना क्षेत्र के चनकुहवा गांव का है।
अभियोजन के अनुसार उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के पडरौना थाना क्षेत्र के अरनहवा निवासी गरहन यादव ने अपनी 23 वर्षीय बेटी संध्या यादव की शादी पांच जून 2025 को चनकुहवा निवासी प्रमोद यादव उर्फ भुट्टी यादव के साथ की थी।
शादी के बाद कुछ दिनों तक सब कुछ सामान्य रहा। इसके बाद पति, सास और अन्य ससुराल वालों पर दहेज की मांग को लेकर संध्या को प्रताड़ित करने का आरोप लगा।
आरोप है कि 10 सितंबर 2025 को पति प्रमोद यादव मायके पहुंचा और दो लाख रुपये अतिरिक्त दहेज की मांग की। संध्या के पिता ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कुछ समय देने की बात कही।
इसके अगले ही दिन 11 सितंबर की सुबह ससुराल से फोन कर बताया गया कि संध्या की तबीयत खराब है। मायके वाले जब वहां पहुंचे तो उसकी मौत हो चुकी थी।
मामले में संध्या के पिता गरहन यादव के लिखित आवेदन पर 11 सितंबर 2025 को पिपरासी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने जांच के बाद पति प्रमोद यादव उर्फ भुट्टी यादव और सास लीलावती देवी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक मन्नु राव ने छह गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। इनमें सूचक गरहन यादव, किशोरी, गुड्डी देवी, रामदर्शन यादव, चिकित्सक चंदन कुमार तथा अनुसंधानकर्ता राजीव कुमार शर्मा शामिल थे।
अभियोजन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्राथमिकी से संबंधित दस्तावेज, घटनास्थल के फोटो-वीडियो, मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट, आरोपितों की गिरफ्तारी से संबंधित कागजात और मेडिकल रिपोर्ट समेत अन्य साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए।
बचाव पक्ष की ओर से भी दो गवाह प्रस्तुत किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने सास लीलावती देवी को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। वहीं, पति प्रमोद यादव को दहेज मृत्यु से संबंधित आरोपों से राहत देते हुए हत्या के मामले में दोषी करार दिया।
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