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West Champaran : डंपिंग स्थल छोड़ नहर में फेंका मौत का कचरा, छह भैंसों की मौत से नगर परिषद पर उठे सवाल

Published: Sun, 01 Nov 2026 07:24 PM (IST)

बगहा में एक नंबरा के पास नहर में फेंके गए मेडिकल कचरे को खाने से छह भैंसों की मौत हो ...और पढ़ें

बगहा में कचरा खाने से बीमार भैंस व नहर में डाला गया कचरा। जागरण

बगहा में कचरा खाने से बीमार भैंस व नहर में डाला गया कचरा। जागरण 

HighLights

  1. एक नंबरा नहर में फेंका गया जहरीला मेडिकल कचरा।

  2. कचरा खाने से छह भैंसों की दर्दनाक मौत हुई।

  3. नगर परिषद की कचरा निस्तारण व्यवस्था पर गंभीर सवाल।

संवाद सहयोगी, बगहा (पश्चिम चंपारण)। नगर परिषद की सफाई व्यवस्था व कचरा निस्तारण पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के एक नंबरा सड़क के समीप खुले में फेंके जा रहे अस्पताल के कचरे को खाने से आधा दर्जन भैंसों की मौत हो गई।

घटना के बाद पशुपालकों में आक्रोश है। उनका आरोप है कि सफाई एजेंसी की लापरवाही के कारण पशुओं की जान गई है। कचरे में फेंके गए परित्यक्त और जहरीले पदार्थ पशुओं के लिए जानलेवा साबित हुए।

मृत भैंसों में वार्ड संख्या 31 के अहिरानी टोला निवासी मुकेश यादव की तीन, कन्हैया यादव की एक भैंस शामिल है। इसके अलावा दो अन्य भैंसों की भी मौत हुई है। मुकेश की दो भैंस बीमार हैं, जिनका उपचार जारी हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, एक नंबरा सड़क के समीप नहर और आसपास के खुले स्थानों पर अस्पताल का कचरा लाकर फेंका गया था। इसी कचरे में मौजूद पदार्थों को खाने के बाद भैंसों की तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। कुछ पशुओं को समय रहते दवा देकर बचाया गया।

डंपिंग स्थल रहने के बावजूद खुले में फेंका जा रहा कचरा

बताते चलें कि नगर परिषद का निर्धारित डंपिंग स्थल औसानी में है। इसके बावजूद सफाई कार्य में लगी एजेंसियों दास एंड कंपनी और साज ट्रेडर्स पर शहर के अलग-अलग स्थानों पर कचरा फेंकने का आरोप लग रहा है।

पशुपालकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल से निकलने वाले कचरे को निर्धारित स्थान पर निस्तारण करने के बजाय खुले में फेंका जा रहा है। इससे न केवल पशुओं की जान पर खतरा है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

पशुपालकों ने नगर परिषद प्रशासन से मृत भैंसों के बदले उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि पशुओं की मौत से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं, इस घटना ने मेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच के बाद होगी कार्रवाई : ईओ

नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सरोज कुमार बैठा ने बताया कि कचरा निर्धारित डंपिंग स्थल पर ही डाला जाना चाहिए। यदि एक नंबरा सड़क, नहर या उसके आसपास खुले में कचरा फेंका गया है तो इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में लापरवाही सामने आने पर संबंधित एजेंसी के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

बयान :
प्रथम दृष्टया भैंसों की मौत जहरीले पदार्थ खाने से हुई प्रतीत होती है। कुछ पशुओं को दवा देकर बचाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पशुपालन विभाग में पशुओं की मौत के बाद मुआवजा देने का कोई प्राविधान नहीं है।
डा. सुधीर कुमार, पशुपालन विभाग, बेतिया।

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