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'हमारी बहन मरी, कोई दरवाजे तक नहीं आया'; वैशाली नाव हादसे के पीड़ित परिवार ने बयां किया दर्द

Published: Fri, 16 Oct 2026 04:49 PM (IST)

राघोपुर नाव हादसे में बेटी खोने वाले एक पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि कई बड़े नेताओं के आने के बावजूद कोई उनके दरवाजे तक नहीं पहुंचा।

HighLights

  1. पीड़ित परिवार ने नेताओं पर अनदेखी का आरोप लगाया।

  2. बेटी खोने के गम में डूबा परिवार, तीन इलाजरत।

  3. जर्जर घर और दयनीय आर्थिक स्थिति से जूझ रहा परिवार।

संवाद सूत्र, राघोपुर। राघोपुर प्रखंड की रामपुर श्यामचंद पंचायत के भगतान टोला में मंगलवार की रात हुए नाव हादसे में 13 बच्चों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों से मिलने नेताओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। केंद्रीय मंत्री, बिहार के उपमुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, राज्य सरकार के मंत्री और सांसद मृतक परिवारों से मिल चुके हैं। हा

लांकि, इसी बीच एक पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि कई बड़े नेता उनके दरवाजे तक नहीं पहुंचे और उनकी सुध नहीं ली। हालांकि शुक्रवार को बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश डोमन राय के घर पहुंचे और पीड़ित परिवार के सदस्यों से मुलाकात की।

परिवार के सदस्यों का कहना है कि बगल के एक घर में सात और दूसरे घर में पांच बच्चों की मौत हुई थी। वहां सभी नेता पहुंचे, घटना की जानकारी ली और स्वजन को ढांढस बंधाया, लेकिन उनके घर कोई नहीं आया।

पीड़ित डोमन राय के पुत्र आकाश कुमार ने शुक्रवार को अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि यहां बहुत सारे नेता आते हैं, लेकिन उधर से ही लौट जाते हैं। इधर नहीं आते।

जब उनसे पूछा गया कि क्या किसी नेता ने उनसे मुलाकात की है, तो उन्होंने कहा कि अब तक कोई भी नेता उनके दरवाजे पर नहीं आया है, चाहे तेजस्वी हों या कोई अन्य नेता।

बेटी की मौत, तीन स्वजन पटना में इलाजरत

इस हादसे में डोमन राय की पुत्री पिंकी कुमारी की मौत हो गई, जबकि उनकी दूसरी पुत्री चांदनी कुमारी, अनुष्का कुमारी और नाती तेज प्रताप कुमार को बचा लिया गया। तीनों पटना के अस्पताल में इलाजरत हैं।

परिवार के लिए एक ओर बेटी को खोने का गम है, तो दूसरी ओर अस्पताल में भर्ती तीन स्वजन की चिंता बनी हुई है। पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति भी दयनीय है। टूटी-फूटी ईंट की दीवारें, टिन और फूस की झोपड़ी तथा दीवार पर टंगे फटे कपड़े घर की हालत बयां करते हैं।

बहन को खोने के गम में आकाश का चेहरा उदास है, जबकि परिवार की महिलाओं की आंखों से आंसू थम नहीं रहे हैं।

गोद में छोटा बच्चा लिए खड़ी महिला और पीली साड़ी पहने बुजुर्ग मां की निगाहें मदद की आस में दरवाजे पर टिकी हैं। आकाश ने बताया कि उनका घर भी जर्जर है और कभी भी गिर सकता है, लेकिन अब तक उसकी स्थिति देखने कोई नहीं आया।

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