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जीविका दीदी की बेटी ने BHU से मुजफ्फरपुर कोर्ट तक गाड़े सफलता के झंडे, जज बनकर रोशन किया वैशाली का नाम

Published: Wed, 04 Nov 2026 06:50 PM (IST)

प्रियंका कुमारी ने अपने संघर्ष से जज बनकर करहटिया बुजुर्ग गांव का नाम रोशन किया है। वर्तमान में मुजफ्फरपुर न्यायालय ...और पढ़ें

करहटिया बुजुर्ग की बेटी प्रियंका कुमारी ने जज बनकर बढ़ाया गांव का मान

करहटिया बुजुर्ग की बेटी प्रियंका कुमारी ने जज बनकर बढ़ाया गांव का मान

HighLights

  1. प्रियंका कुमारी ने संघर्ष कर जज का पद हासिल किया।

  2. वह अपने गांव करहटिया बुजुर्ग की पहली महिला जज हैं।

  3. मुजफ्फरपुर न्यायालय में सेवारत, अन्य बेटियों को प्रेरित कर रही हैं।

रमेश प्रसाद सिंह, चेहराकलां (वैशाली)। प्रखंड क्षेत्र के ग्रामीण इलाके करहटिया बुजुर्ग पंचायत के करहटिया बुजुर्ग गांव निवासी प्रियंका कुमारी ने अपने संघर्ष के दम पर जज बनकर इलाके का नाम रोशन किया है। वह न्यायिक सेवा में पूरी निष्ठा के साथ जुटी हुई हैं।

उनके पिता योगेंद्र साह एक छोटे कपड़ा व्यवसायी होने के साथ-साथ कृषक भी हैं, जबकि उनकी मां अनीता देवी गृहिणी होने के साथ-साथ 'जीविका' से भी जुड़ी हैं।

माता-पिता के अनुसार, प्रियंका की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई। उन्होंने वर्ष 2008 में राजकीयकृत उच्च माध्यमिक विद्यालय, बखरीदौआ से मैट्रिक की परीक्षा पास की।

BHU से किया लॉ

वैशाली नवोदय विद्यालय से इंटर करने के बाद उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी से लॉ में स्नातक किया। इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से वर्ष 2020 में एलएलएम की डिग्री हासिल की और अपनी मेहनत के दम पर जज बनीं।

न्यायिक सेवा में जज के रूप में उन्होंने अपना पहला योगदान समस्तीपुर में दिया। वर्तमान में वह मुजफ्फरपुर न्यायालय में जज के पद पर रहकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रही हैं। बचपन से ही मेधावी और मेहनती प्रियंका अपने गांव की पहली बेटी हैं, जिन्हें जज बनने का गौरव प्राप्त हुआ है।

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मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मीं प्रियंका का प्रयास है कि उनकी तरह गांव की अन्य बेटियां भी मेहनत कर अपने पैरों पर खड़ी हों और परिवार का मजबूत स्तंभ बनें। संसाधनों और सुविधाओं के अभाव के बावजूद उन्होंने अपनी लगन से यह मुकाम हासिल किया है।

उनकी मां अनीता देवी ने बेटी के नाम दीप जलाकर कहा कि प्रियंका ही उनके घर की लक्ष्मी है और उसकी सफलता से परिवार को सामाजिक स्तर पर एक नई पहचान मिली है।

उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि बेटियों को बराबरी का सम्मान और अवसर मिलना चाहिए, क्योंकि बेटियां घर-आंगन की रौनक होती हैं।

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