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शास्त्रीय संगीत से शॉर्ट फिल्म तक: अपनी जादुई आवाज से देश का दिल जीत रही बिहार की सुरपरी, PM भी कर चुके सम्मानित

Published: Wed, 04 Nov 2026 03:19 PM (IST)

कैमूर की बेटी और शास्त्रीय संगीत की गायिका तनु श्री, जिन्हें 'सुरपरी' के नाम से जाना जाता है, ने अपनी बेमिसाल प्रतिभा से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।

शास्त्रीय संगीत से शॉर्ट फिल्म तक: अपनी जादुई आवाज से देश का दिल जीत रही बिहार की सुरपरी

शास्त्रीय संगीत से शॉर्ट फिल्म तक: अपनी जादुई आवाज से देश का दिल जीत रही बिहार की सुरपरी

HighLights

  1. तनु श्री को पीएम मोदी ने वाराणसी में सम्मानित किया।

  2. शास्त्रीय संगीत में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

  3. उन्होंने एक हिंदी फिल्म में अंग्रेजी गीत भी गाया।

संवाद सूत्र, रामगढ़। कैमूर की बेटी और शास्त्रीय संगीत की गायिका तनु श्री अपने सुर, लय और ताल की बेमिसाल संगत से सर्वोपरि बन गई हैं। 'सुरपरी' के रूप में तनु ने छठी कक्षा में ही अपने सुर और ताल से देशभर में जिले का नाम रोशन किया था। इसी की बदौलत अब वे राष्ट्रीय क्षितिज पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।

वर्ष 2023 में वाराणसी 'सांसद सांस्कृतिक महोत्सव' में गायन और वादन, दोनों विधाओं में प्रथम स्थान हासिल कर उन्होंने देश-स्तरीय हस्तियों को अपना मुरीद बना लिया था। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में प्रमाण-पत्र देकर 'सुरपरी' तनु श्री को सम्मानित किया था।

रामगढ़ क्षेत्र के दुर्गावती प्रखंड के निपरान गांव निवासी रिंकू यादव और रमेश सिंह की पुत्री तनु श्री की उपलब्धियों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। वह यूपी और बिहार, दोनों राज्यों में शास्त्रीय संगीत का परचम लहरा रही हैं। बीते वर्ष उन्होंने यूपी में लोक संगीत में प्रथम स्थान प्राप्त किया था।

काशी सांसद महोत्सव में दोहरी जीत के अलावा, दो वर्ष पूर्व पटना के प्रमंडलीय कला उत्सव में भी उन्होंने शास्त्रीय गायन में प्रथम स्थान हासिल किया था।

उनकी प्रतिभा को देखते हुए कैमूर के तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. नवदीप शुक्ला ने भी उन्हें 'नारी सशक्तिकरण सम्मान' से नवाजा था। वह मां मुंडेश्वरी महोत्सव सहित जिले के सभी बड़े सांस्कृतिक मंचों के अलावा राष्ट्रीय मंचों पर भी शास्त्रीय व सुगम संगीत की प्रस्तुति देती रही हैं।

दिव्यांग माता-पिता की उम्मीदों की किरण हैं तनु

तनु की कहानी सिर्फ सुरों की नहीं, बल्कि संघर्ष की भी है। उनकी मां दोनों पैरों से दिव्यांग हैं और पिता भी दिव्यांग हैं। दो बहनों में बड़ी तनु, छोटी उम्र से ही अपने माता-पिता के अधूरे सपनों को साकार करने में जुटी हैं। सरस्वती शिशु मंदिर, रामगढ़ में कक्षा आठवीं में पढ़ते हुए ही उन्होंने विद्या भारती की प्रमंडलीय संगीत प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता था।

आज वह चित्रकूट में स्नातक की पढ़ाई के साथ-साथ संगीत के अभ्यास में भी जुटी हैं। राग यमन, भैरव, भीमपलासी, केदार, तिलंग और अल्हैया बिलावल जैसे कठिन रागों पर उनकी पकड़ अब बेहद मजबूत हो गई है, तभी तो जिले में लोग प्यार से उन्हें ''सुरपरी'' कहते हैं।

यूट्यूब से बॉलीवुड तक का सफर, अंग्रेजी गीत से बटोरीं सुर्खियां:

तनु की दिलकश आवाज ने डिजिटल दुनिया में भी धूम मचाई है। उनके यूट्यूब चैनल पर गीत सुनकर फिल्म निर्माता संजीव श्रीवास्तव ने उन्हें हिंदी फिल्म में गाने का ऑफर दिया।

तनु ने इस चुनौती को स्वीकार किया और शॉर्ट हिंदी फिल्म ''आई एम सॉरी पापा'' में अंग्रेजी गीत ''नो, आई डोंट नो हू आई एम'' गाकर पार्श्वगायन (प्लेबैक सिंगिंग) में भी छलांग लगा दी।

तनु कहती हैं, "संगीत के माध्यम से मैं देश का मान बढ़ाती रहूंगी।" वाकई, जब 'हम भारत की बेटी हैं' का नारा गूंजता है, तो बरबस ही तनु जैसी बेटियों की तस्वीर जेहन में आ जाती है, जो तमाम वर्जनाओं और मुश्किलों को तोड़कर सफलता की नई इबारत लिख रही हैं।

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