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सुपौल में 232 छात्रों की पढ़ाई खतरे में, दो जर्जर मकानों में पढ़ने को मजबूर

Published: Wed, 15 Apr 2026 03:24 PM (IST)

सुपौल के सरायगढ़ भपटियाही प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय मझौआ में 232 छात्र-छात्राएं मात्र दो जर्जर कमरों में पढ़ने को ...और पढ़ें

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संवाद सूत्र, सरायगढ़ (सुपौल)। सरकार जहां एक ओर प्राथमिक से लेकर उच्च विद्यालयों तक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रयासरत है और भवन, शौचालय, पेयजल सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही है।

वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ अलग ही तस्वीर बयां कर रही है। सरायगढ़ भपटियाही प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय मझौआ इसका जीता-जागता उदाहरण बन गया है, जहां बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई दोनों ही भगवान भरोसे चल रही है।

विद्यालय में कुल 232 छात्र-छात्राओं का नामांकन है, जबकि यहां आठ शिक्षक पदस्थापित हैं। बावजूद इसके, पूरे विद्यालय का संचालन मात्र दो कमरों में किया जा रहा है। ऐसे में एक साथ कई कक्षाओं के बच्चों को बैठाकर पढ़ाना शिक्षकों के लिए चुनौती बना हुआ है, वहीं बच्चों को भी पढ़ाई में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि विद्यालय भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है।

कमरों की छत जगह-जगह से टूटकर गिर रही है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है। बच्चों और शिक्षकों के सिर पर हर समय खतरा मंडराता रहता है। विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक सुचेद्र कुमार ने बताया कि भवन का निर्माण वर्षों पहले हुआ था और अब इसकी स्थिति काफी खराब हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि कई बार इस समस्या को लिखित रूप से शिक्षा विभाग के अधिकारियों के समक्ष रखा गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। विद्यालय के छात्र-छात्राओं का भी कहना है कि वे डर के माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि जर्जर कमरों में बैठने से हमेशा यह डर बना रहता है कि कहीं छत का कोई हिस्सा गिर न पड़े।

इस गंभीर स्थिति को लेकर अभिभावकों में भी गहरी चिंता देखी जा रही है। मझौआ गांव के अनिल कुमार, ललन कुमार सहित कई अभिभावकों ने बताया कि वर्तमान स्थिति में बच्चों को विद्यालय भवन के अंदर बैठाकर पढ़ाना जोखिम भरा है।

उनका कहना है कि जब तक भवन की मरम्मत या नया निर्माण नहीं हो जाता, तब तक बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए। अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिला पदाधिकारी स्वयं मामले का संज्ञान लेते हुए विद्यालय भवन की तत्काल जांच कराएं और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द उचित कदम उठाए जाएंगे।

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