विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सुपौल में 2008 के बाढ़ में ध्वस्त हुआ पुल आज भी अधूरा, 18 साल से त्रासदी झेल रहे ग्रामीण

Published: Thu, 02 Apr 2026 03:18 PM (IST)

सुपौल के मानगंज पश्चिम पंचायत में 2008 की भीषण बाढ़ में ध्वस्त हुआ एक आरसीसी पुल 18 साल बाद भी ...और पढ़ें

News Article Hero Image
timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

संवाद सूत्र, जदिया (सुपौल)। क्षेत्र में आई भीषण प्रलयकारी बाढ़ को करीब 18 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन उस आपदा की भयावहता आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। जगह-जगह मौजूद बाढ़ के निशान उस दौर की याद दिलाते हैं, जब हर तरफ तबाही का मंजर था। उस त्रासदी को याद करते ही आज भी लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

भले ही उस आपदा को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय आपदा का दर्जा नहीं मिला हो, लेकिन इसकी विभीषिका आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। इस प्रलय का जीता-जागता उदाहरण मानगंज पश्चिम पंचायत के वार्ड नंबर 5 में आज भी देखने को मिलता है, जहां वर्ष 2008 की बाढ़ में ध्वस्त हुआ आरसीसी पुल अब भी अपनी बदहाली की कहानी कह रहा है।

यह पुल कभी मानगंज सहित आसपास के करीब 20 पंचायतों के लिए जीवनरेखा हुआ करता था। इसी रास्ते से लोगों का सीधा संपर्क प्रखंड मुख्यालय त्रिवेणीगंज से जुड़ा हुआ था।

मानगंज पूरब पंचायत स्थित एनएच-91 से निकलकर लक्ष्मीनियां के पास एनएच-327ई को जोड़ने वाला यह मार्ग छातापुर क्षेत्र के लोगों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण था, जिससे त्रिवेणीगंज की दूरी काफी कम हो जाती थी। लेकिन बाढ़ में पुल ध्वस्त होने के बाद यह संपर्क पूरी तरह टूट गया और लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती गईं।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि 18 वर्षों के लंबे इंतजार के बावजूद इस पुल का पुनर्निर्माण आज तक नहीं हो सका है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि न तो जनप्रतिनिधियों ने इस दिशा में कोई ठोस पहल की और न ही प्रशासनिक अधिकारियों ने कभी इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता दी।

ग्रामीणों की मानें तो आज भी लोग इसी रास्ते से आने-जाने को मजबूर हैं, लेकिन हर बार उन्हें अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। पुल के नीचे आज भी गहरा पानी भरा हुआ है, जिससे खतरा हमेशा बना रहता है।

सखिया देवी, बुचनी देवी सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि करीब तीन वर्ष पूर्व एक बच्चे की इसी स्थान पर डूबकर मौत हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद न तो कोई सुरक्षा व्यवस्था की गई और न ही समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि 2008 की बाढ़ के बाद क्षेत्र के विकास के लिए सरकारों के साथ-साथ देश-विदेश से भी मदद मिली थी।

लोगों को उम्मीद थी कि क्षेत्र तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ेगा, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। आज यह जर्जर पुल न केवल उस प्रलय की याद दिलाता है, बल्कि सिस्टम पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है, क्या विकास सिर्फ हाईवे तक ही सीमित है।

आखिर कब तक ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर रहेंगे। स्थानीय लोगों ने सरकार और प्रशासन से अविलंब पुल के पुनर्निर्माण की मांग की है, ताकि वर्षों पुरानी इस समस्या का समाधान हो सके और क्षेत्र को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

यह भी पढ़ें- हाजीपुर में नवविवाहिता की हत्या मामले में पति समेत तीन पर FIR दर्ज, सास गिरफ्तार

यह भी पढ़ें- भोजपुर नगर निगम की लापरवाही से सड़कों पर ‘यमदूत’ बने आवारा पशु, शहर में बढ़ा जाम और हादसों का खतरा