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भोजपुर नगर निगम की लापरवाही से सड़कों पर ‘यमदूत’ बने आवारा पशु, शहर में बढ़ा जाम और हादसों का खतरा

Published: Thu, 02 Apr 2026 02:20 PM (IST)

आरा में नगर निगम की लापरवाही से सड़कों पर आवारा पशुओं की संख्या बढ़ गई है, जिससे यातायात बाधित हो ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, आरा। शहर में नगर निगम की लापरवाही का खामियाजा अब आम लोगों को सीधे तौर पर भुगतना पड़ रहा है। शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

खासकर सांड और गाय खुलेआम सड़कों पर घूमते नजर आते हैं, जिससे न केवल यातायात बाधित हो रहा है बल्कि लोगों की जान भी खतरे में पड़ गई है। हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में सड़क पर निकलना तक लोगों के लिए चुनौती बन गया है।

शहर के प्रमुख मार्गों में जैसे शीश महल चौक, महिला कालेज रमना, स्टेशन रोड, गोपाली चौक, धर्मन चौक और कतीरा मोड़ पर आवारा पशुओं का जमावड़ा आम बात हो गई है। पशु बीच सड़क पर बैठ जाते हैं या अचानक दौड़ने लगते हैं, जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है। नतीजतन, अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है और घंटों तक यातायात प्रभावित रहता है। सुबह और शाम के व्यस्त समय में यह समस्या और गंभीर रूप ले लेती है।

स्थानीय लोगों में मंटू पांडेय, शेखर कुमार कहना है कि कई बार ये पशु आक्रामक भी हो जाते हैं। सांडों के आपसी लड़ाई के दौरान राहगीरों को चोट लगने की घटनाएं सामने आई हैं। कुछ दिन पहले ही एक बच्चे पर सांड ने हमला कर दिया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

ऐसी घटनाएं लोगों के मन में भय पैदा कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। व्यापारियों पर भी इस समस्या का असर साफ दिख रहा है। दुकानों के सामने पशुओं के बैठने से ग्राहकों को आने-जाने में दिक्कत होती है, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है।

कई दुकानदारों ने बताया कि वे खुद अपने स्तर पर पशुओं को हटाने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह अस्थायी समाधान ही साबित होता है। नगर निगम की ओर से समय-समय पर अभियान चलाने के दावे जरूर किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। न तो पशुओं को पकड़ने की कोई नियमित व्यवस्था दिखती है और न ही उनके लिए स्थायी आश्रय की व्यवस्था की गई है। इससे समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

शहरवासियों का कहना है कि यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है। उन्होंने नगर निगम से मांग की है कि आवारा पशुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर रखा जाए और इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी नीति बनाई जाए।

फिलहाल, नगर निगम की उदासीनता के कारण आरा की सड़कों पर आवारा पशु ‘यमदूत’ बनकर घूम रहे हैं और आम जनता हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर है।

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नगर निगम के तरफ से अभियान चलाकर सभी पशुओं को पड़कर गौशाला में दिया जाएगा। जिसमें जिस पशु मालिक सड़क पर छोड़ रहे हैं, उनसे जुर्माना भी वसूल किया जाएगा। इन पशुओं के कारण आवागमन के साथ भय की स्थिति पैदा होती है।


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रत्नेश कुमार, सिटी मैनेजर आरा नगर निगम।