'डॉक्टर साहब... इसी ने मेरे बेटे को काटा है', जिंदा सांप को डिब्बे में बंद कर अस्पताल पहुंचा पिता, उड़े सबके होश
सुपौल के बभनगामा में एक पिता ने अपने बेटे को सांप के काटने के बाद हिम्मत दिखाते हुए उसी सांप को पकड़कर डिब्बे में बंद कर अस्पताल पहुंचाया।
HighLights
पिता ने बेटे को काटने वाले सांप को पकड़कर अस्पताल पहुंचाया।
डॉक्टरों ने सांप की पहचान 'साखर' प्रजाति के रूप में की।
समय पर इलाज मिलने से बच्चे की हालत में सुधार हुआ।
संवाद सूत्र, त्रिवेणीगंज (सुपौल)। सर्पदंश के बाद आमतौर पर लोग घबरा जाते हैं और किसी तरह जख्मी को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश करते हैं। लेकिन, बभनगामा में सोमवार की रात एक पिता ने घबराने के बजाय ऐसी हिम्मत दिखाई कि अनुमंडलीय अस्पताल के चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी भी हैरान रह गए।
बेटे को सांप के डसने के बाद पिता ने उसी सांप को पकड़कर डिब्बे में बंद किया और उसे लेकर अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल पहुंचते ही पिता ने चिकित्सक से कहा, "डॉक्टर साहब, इसी सांप ने मेरे बेटे को काटा है।"
थाना क्षेत्र के बभनगामा वार्ड नंबर 11 निवासी विजेंद्र कुमार का 13 वर्षीय पुत्र मुन्ना कुमार सोमवार की रात करीब 10 बजे घर के आंगन की ओर जा रहा था। इसी दौरान अचानक एक सांप ने उसे डस लिया। सांप के डसते ही परिवार में अफरा-तफरी मच गई। इसी बीच विजेंद्र की नजर सांप पर पड़ी, जो देखते ही देखते एक बिल में घुस गया।
बेटे को अस्पताल पहुंचाने के साथ ही विजेंद्र ने सांप की पहचान चिकित्सकों को बताने की ठान ली थी। उन्होंने बिना घबराए कुदाली की मदद से बिल से सांप को बाहर निकाला और उसे सावधानीपूर्वक एक डिब्बे में बंद कर लिया। इसके बाद वह जख्मी बेटे को लेकर सीधे अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचे।
डिब्बे में जिंदा सांप होने की जानकारी मिलते ही अस्पताल में मौजूद मरीजों के परिजनों और अन्य तीमारदारों की भीड़ जुट गई। लोग डिब्बे में बंद सांप को देखने लगे। हालांकि, चिकित्सकों ने सांप के साथ ऐसा अनावश्यक जोखिम न लेने की सलाह दी।
ड्यूटी पर मौजूद डॉ. संजीव कुमार सुमन ने तत्काल मुन्ना की जांच शुरू की। चिकित्सक ने डिब्बे में बंद सांप की पहचान 'साखर' प्रजाति के रूप में की। इसके बाद बच्चे का उपचार शुरू किया गया।
चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने उसकी लगातार निगरानी की। समय पर अस्पताल पहुंचने और तत्काल उपचार मिलने से बच्चे की हालत में सुधार हुआ, जिसके बाद परिजनों ने राहत की सांस ली।
बेटे के लिए खतरे के सामने डटे रहे पिता
घटना के दौरान विजेंद्र कुमार की सूझबूझ और हिम्मत की अस्पताल में चर्चा होती रही। बेटे को सांप के डसने के बाद जहां परिवार के लोग परेशान थे, वहीं विजेंद्र ने धैर्य नहीं खोया। उन्होंने जोखिम उठाकर सांप को पकड़कर सुरक्षित डिब्बे में बंद किया और अस्पताल पहुंच गए।
हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार सर्पदंश की स्थिति में सांप को पकड़ने या उसके करीब जाने की कोशिश करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। प्राथमिकता हमेशा पीड़ित को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की होनी चाहिए।
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