धान-मक्का के बाद अब राजमा से चमकेगी सुपौल के किसानों की किस्मत, विभाग बीज पर देगा अनुदान
सुपौल जिले में किसानों की आय बढ़ाने और फसल विविधीकरण के लिए 125 एकड़ में राजमा की खेती का विस्तार किया जाएगा।

धान-मक्का के बाद अब राजमा से चमकेगी सुपौल के किसानों की किस्मत (AI Generated Image)
HighLights
सुपौल में 125 एकड़ भूमि पर राजमा की खेती का लक्ष्य।
कृषि विभाग किसानों को बीज और दवाओं पर देगा अनुदान।
राजमा की खेती से किसानों को आय का नया विकल्प।
जागरण संवाददाता, सुपौल। धान, गेहूं और मक्का की खेती के लिए पहचाने जाने वाले कोसी क्षेत्र के सुपौल जिले में अब राजमा की खेती को विस्तार देने की तैयारी है।
बलुआही मिट्टी और बाढ़ की चुनौती से जूझने वाले जिले के किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आय का नया विकल्प उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने पहल की है।
चालू वर्ष में जिले की 125 एकड़ भूमि में राजमा की खेती कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए आठ क्लस्टर बनाए जाएंगे और किसानों को प्रत्यक्षण के माध्यम से इस नई फसल की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
अब तक जिले में कुछ किसान सीमित स्तर पर ही राजमा की खेती करते रहे हैं, लेकिन इस बार कृषि विभाग ने इसे योजनाबद्ध तरीके से बढ़ाने की तैयारी की है।
इसके तहत चयनित किसानों को खेती के लिए बीज और दवाओं सहित आवश्यक सामग्री की किट उपलब्ध कराने की योजना है। विभागीय पहल से राजमा की खेती का दायरा बढ़ने के साथ किसानों को फसल विविधीकरण का अवसर मिलने की उम्मीद है।
राज्य के 12 जिले चयनित
राज्य में राजमा की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने 12 जिलों का चयन किया है। इनमें सुपौल को भी शामिल किया गया है। जिले में 125 एकड़ में खेती कराने के लिए आठ क्लस्टर बनाए जाने हैं।
क्लस्टर आधारित खेती से किसानों को एक समूह के रूप में नई फसल अपनाने और उसके उत्पादन की तकनीक समझने में मदद मिलेगी। प्रत्यक्षण के माध्यम से किसानों को राजमा की खेती के तौर-तरीकों से भी परिचित कराया जाएगा।
उत्पादन क्षेत्र का विस्तार मकसद
जिले के किसान मुख्य रूप से धान, गेहूं, मक्का सहित अन्य पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं। ऐसे में राजमा की खेती को बढ़ावा देने की पहल किसानों के लिए एक अतिरिक्त विकल्प बन सकती है।
योजना के तहत बीज और दवाओं से युक्त किट मिलने से चयनित किसानों को खेती शुरू करने में मदद मिलेगी।
अनुदान आधारित इस पहल का उद्देश्य राजमा की खेती के प्रति किसानों की रुचि बढ़ाना और जिले में इसका उत्पादन क्षेत्र विस्तारित करना है।
हालांकि, राजमा की खेती की सफलता के लिए स्थानीय मिट्टी और मौसम के अनुकूल किस्मों का चयन, उचित समय पर बुआई, सिंचाई तथा फसल प्रबंधन की जानकारी भी अहम होगी।
यदि किसानों को समय पर जरूरी कृषि सामग्री और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है, तो जिले में राजमा की खेती को नई पहचान मिल सकती है।
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