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सुपौल के स्कूलों में शिक्षकों के जींस-टीशर्ट पहनने पर रोक, डीजे-डिस्को पर भी प्रतिबंध

Published: Sat, 31 Oct 2026 07:29 PM (IST)

शिक्षा विभाग ने सुपौल समेत अन्य जिलों के स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए जींस-टीशर्ट पर प्रतिबंध लगा दिया है, उन्हें औपचारिक परिधान पहनना अनिवार्य होगा।

शिक्षकों के जींस-टीशर्ट पहनने पर रोक (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

शिक्षकों के जींस-टीशर्ट पहनने पर रोक (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

जागरण संवाददाता, सुपौल। स्कूल अब पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन, संस्कार और गरिमामय व्यवहार के केंद्र के रूप में भी नजर आएंगे। शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मी विद्यालय में जींस-टीशर्ट पहनकर नहीं आ सकेंगे। उन्हें शिक्षण और कार्यालय अवधि में अनिवार्य रूप से औपचारिक परिधान पहनना होगा। 

इतना ही नहीं, स्कूल परिसर में डीजे, डिस्को और निम्न स्तर की गतिविधियों के आयोजन पर भी शिक्षा विभाग ने सख्ती दिखाई है। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में एक बार फिर से सुपौल समेत अन्य जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। 

शालीनता और गरिमामय वातावरण से किसी तरह का समझौता नहीं 

विभाग ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में शालीनता और गरिमामय वातावरण से किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। पत्र में कहा है कि विद्यालयों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों में मर्यादित व्यवहार और शालीनता बनाए रखने के लिए पहले भी निर्देश दिए गए थे। 

इसके बावजूद विभिन्न माध्यमों से लगातार ऐसी सूचनाएं मिल रही हैं कि बड़े पैमाने पर इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मी कार्यालय संस्कृति के विपरीत जींस-टीशर्ट जैसे अनौपचारिक परिधान पहनकर विद्यालय पहुंच रहे हैं। 

विद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान

वहीं, कुछ शैक्षणिक संस्थानों में नृत्य, डीजे, डिस्को और अन्य अशालीन गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं। विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि शिक्षकों और कर्मियों का इस तरह का आचरण विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। 

यह किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। विद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, संस्कार और अनुशासन निर्माण का केंद्र भी है। ऐसे में शिक्षकों का पहनावा और व्यवहार भी गरिमापूर्ण होना चाहिए।

नृत्य और संगीत पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं

कहा है कि विद्यालयों में नृत्य और संगीत पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं हैं। शिक्षा कैलेंडर के अनुसार निर्धारित विशेष अवसरों पर ही अनुशासित और शालीन तरीके से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे लेकिन विद्यालय परिसर में डीजे, डिस्को और अशालीन गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। 

विभाग ने ऐसे आयोजनों को शैक्षणिक माहौल के प्रतिकूल माना है। निदेशक प्रशासन ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि अपने-अपने जिले के विद्यालयों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों में इस आदेश का सख्ती से अनुपालन कराएं। 

सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों को शिक्षण और कार्यालय अवधि में औपचारिक परिधान में ही संस्थान पहुंचना होगा। विभाग ने इस बार दोबारा निर्देश जारी कर यह संकेत दिया है कि विद्यालयों में शालीनता और अनुशासन बनाए रखने को लेकर अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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