विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

छपरा में जमीन खरीदना होगा महंगा: नए सिरे से होगा सर्वे, अब 7 नई श्रेणियों में बंटेगी ग्रामीण भूमि

Published: Wed, 28 Oct 2026 04:47 PM (IST)

सारण जिले में जमीन की रजिस्ट्री के लिए न्यूनतम मूल्यांकन दर (एमवीआर) में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है, ...और पढ़ें

सारण में जमीन रजिस्ट्री के लिए एमवीआर दरों में बदलाव की तैयारी

सारण में जमीन रजिस्ट्री के लिए एमवीआर दरों में बदलाव की तैयारी

HighLights

  1. प्रधान सड़कों की व्यावसायिक दर में 5% वृद्धि।

  2. भूमि मूल्यांकन में एकरूपता और पारदर्शिता लाने का लक्ष्य।

  3. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की श्रेणियों का पुनर्निर्धारण।

जागरण संवाददाता, छपरा। सारण जिले में जमीन की रजिस्ट्री के लिए न्यूनतम मूल्यांकन दर (एमवीआर) में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत प्रधान सड़कों की व्यावसायिक दर में पांच प्रतिशत वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है।

वहीं, जिन सड़कों की दर निर्धारित नहीं है, वहां शाखा सड़क की आवासीय दर से 10 प्रतिशत कम दर पर भूमि का मूल्यांकन किया जाएगा। औद्योगिक भूमि की अलग दर अधिसूचित नहीं होने पर वर्तमान व्यावसायिक और आवासीय दरों के औसत के आधार पर मूल्य तय किया जाएगा।

बुधवार को समाहरणालय सभागार में जिला समाहर्ता वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में जिला मूल्यांकन समिति की बैठक हुई।

इसमें भूमि की श्रेणियों, सड़कों के वर्गीकरण और न्यूनतम मूल्यांकन दरों के पुनर्निर्धारण पर चर्चा की गई। इसका उद्देश्य भूमि मूल्यांकन में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के साथ सरकारी राजस्व को व्यवस्थित करना है।

विभागीय निर्देशों के अनुसार, ग्रामीण और पेरीफेरल क्षेत्रों की मौजूदा श्रेणियों को एकीकृत कर सात श्रेणियां निर्धारित करने का प्रस्ताव है। शहरी और मेट्रो क्षेत्रों के लिए छह श्रेणियां रखने का निर्णय हुआ।

ग्रामीण क्षेत्रों की विकासशील श्रेणी समाप्त करने और दो आवासीय श्रेणियों को मिलाकर एक श्रेणी बनाने का भी प्रस्ताव है।

नगर निगम की सीमा से आठ किलोमीटर, नगर परिषद से चार किलोमीटर और नगर पंचायत से दो किलोमीटर के दायरे में आने वाले मौजों का सर्वेक्षण कराया जाएगा। अंचल अधिकारियों को अमीन की सहायता से सर्वेक्षण कर प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया गया है।

नगर निकायों को प्रधान, मुख्य, शाखा और अन्य सड़कों के साथ गलियों का वर्गीकरण भी करना होगा। गलियों की श्रेणी निर्धारित करने में पांच फीट की चौड़ाई को आधार बनाया जाएगा।

इसके अलावा अनुपजाऊ भूमि का भौतिक सत्यापन, ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की स्थिति के अनुरूप श्रेणी निर्धारण और जमीन की रजिस्ट्री के दौरान स्थल जांच पर भी जोर दिया गया है।

यह भी पढ़ें- बिहार के 6 शहरी निकायों में होगा विशेष भूमि सर्वेक्षण, सरकार ने जारी की नोटिफिकेशन

यह भी पढ़ें- मधेपुरा में जमीन सर्वे बना सिरदर्द, खतियान-वंशावली जुटाने में रैयत परेशान, कागजात नहीं हैं तो क्या करें