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मधेपुरा में जमीन सर्वे बना सिरदर्द, खतियान-वंशावली जुटाने में रैयत परेशान, कागजात नहीं हैं तो क्या करें

Published: Sat, 24 Oct 2026 07:22 AM (IST)

मधेपुरा के कुमारखंड प्रखंड में विशेष भूमि सर्वेक्षण से ग्रामीण परेशान हैं क्योंकि उनके पास पुराने भूमि दस्तावेज नहीं हैं या उनमें विसंगतियां हैं।

मधेपुरा के कुमारखंड में भूमि सर्वेक्षण शिविर के बाहर कागजात की जानकारी लेते स्थानीय ग्रामीण (AI generated image)

मधेपुरा के कुमारखंड में भूमि सर्वेक्षण शिविर के बाहर कागजात की जानकारी लेते स्थानीय ग्रामीण (AI generated image)

HighLights

  1. मधेपुरा में विशेष भूमि सर्वेक्षण से ग्रामीण असमंजस में।

  2. पुराने खतियान, वंशावली न होने से कागजात जुटाना मुश्किल।

  3. स्वघोषणा पत्र और पंचायत स्तर पर जागरूकता की मांग।

संवाद सूत्र, कुमारखंड (मधेपुरा)। बिहार सरकार द्वारा चलाए जा रहे महत्वाकांक्षी विशेष भूमि सर्वेक्षण (Land Survey) को लेकर मधेपुरा जिले के कुमारखंड प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।

जमीन के दशकों पुराने दस्तावेजों, खतियान, निबंधित केवाला, अद्यतन जमाबंदी और स्वघोषित वंशावली को लेकर स्थानीय रैयतों के बीच भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

सर्वेक्षण की जटिल प्रक्रिया और आवश्यक कागजातों की स्पष्ट जानकारी न होने के कारण ग्रामीणों को अपने जमीन के रिकॉर्ड दुरुस्त कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

आंकड़ों के अनुसार, भूमि सर्वेक्षण के प्रथम चरण में जिले के चार अंचलों के 114 मौजों को शामिल किया गया था। वहीं, दूसरे चरण में जिले के नौ शिविरों के अंतर्गत 299 मौजे और 11,13,787 खेसरे शामिल हैं। दूसरे चरण की राज्यस्तरीय प्रदर्शन रैंकिंग में मधेपुरा जिला बिहार के 38 जिलों में 16वें स्थान पर है।

पूर्वजों के नाम जमीन और गायब कागजात बने सबसे बड़ी चुनौती

ग्रामीण इलाकों में उन रैयतों की समस्या सबसे अधिक गंभीर है जिनके पास जमीन के पुराने मूल कागजात सुरक्षित नहीं हैं। कई पीढ़ियों से भूमि का उपभोग कर रहे परिवारों की जमीन आज भी दादा या परदादा के नाम पर दर्ज है, जबकि वर्तमान पीढ़ी के पास न तो पुराना खतियान उपलब्ध है और न ही केवाला की प्रति।

कई मामलों में पुराने दस्तावेजों में दर्ज नाम, खाता संख्या, खेसरा (प्लाट) और कुल रकबा (क्षेत्रफल) में भी भिन्नता मिल रही है। ऐसी स्थिति में अंचल प्रशासन और भू-अभिलेख विशेषज्ञों का सुझाव है कि रैयत अपने पास उपलब्ध खतियान, जमाबंदी, अद्यतन लगान रसीद और वंशावली के आधार पर प्रपत्र-2 में स्वघोषणा पत्र तैयार कर शिविर में जमा करें।

व्यापक प्रचार-प्रसार और पंचायत स्तर पर शिविर लगाने की मांग

विशेष भूमि सर्वेक्षण को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए पंचायत स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाने की सख्त आवश्यकता है। ग्रामीणों को सरल और स्थानीय भाषा में यह समझाया जाना चाहिए कि सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य भू-विवादों को समाप्त करना है।

बुजुर्गों, अशिक्षित ग्रामीणों और दूर-दराज रहने वाले परिवारों को विशेष सहायता देने के लिए अंचल कर्मियों व अमिनों द्वारा मार्गदर्शन मिलना बेहद जरूरी है।

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