मोटे आनाज से होगी मोटी कमाई, सारण में 6 गुना बढ़ेगा मडुआ का रकबा
सारण जिले में मड़ुआ की खेती का दायरा बढ़ाने की तैयारी है, जिसका लक्ष्य अगले तीन वर्षों में रकबा छह गुना बढ़ाना है।

मडुआ का बीज तैयार करता किसान। फोटो जागरण
HighLights
मड़ुआ की खेती का रकबा छह गुना बढ़ाने का लक्ष्य।
किसानों को प्रति एकड़ 60 हजार तक मुनाफे की उम्मीद।
कृषि विभाग द्वारा अनुदानित बीज और तकनीकी मार्गदर्शन।
नागेंद्र सिंह, जलालपुर (सारण)। कभी गरीबों के भोजन का प्रमुख हिस्सा रहा मडुआ अब पौष्टिकता के साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने का जरिया बन रहा है।
श्रीअन्न की बढ़ती मांग और कम पानी में अच्छी उपज की संभावना को देखते हुए सारण जिले में इसकी खेती का दायरा बढ़ाने की तैयारी है।
कृषि विभाग ने अगले तीन वर्षों में मडुआ की खेती का रकबा वर्तमान के लगभग 500 हेक्टेयर से बढ़ाकर 3000 हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है।
हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा।
जिले में खरीफ और रबी के दौरान लगभग 12 से 15 हजार हेक्टेयर में मक्के की खेती होती है। इसके मुकाबले मडुआ का क्षेत्रफल अभी काफी कम है।
कृषि विभाग अब किसानों को मोटे अनाज की खेती के प्रति प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि कम पानी वाले क्षेत्रों में भी बेहतर उत्पादन और अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल सके।
जलालपुर में 50 एकड़ से अधिक में खेती
जलालपुर प्रखंड में मडुआ की खेती को लेकर किसानों की दिलचस्पी बढ़ी है। पिछले वर्ष प्रखंड की सभी 15 पंचायतों में 45 किलोग्राम बीज वितरित किए गए थे।
इससे 180 किसानों ने लगभग 5.63 एकड़ में खेती की। इस वर्ष इसका रकबा बढ़कर करीब 50 एकड़ हो गया है।
प्रखंड कृषि पदाधिकारी रवि अटल के अनुसार, उनके मार्गदर्शन में इस वर्ष 50 एकड़ भूमि में मडुआ की खेती हुई है।
रेवाड़ी पंचायत के मंझवलिया गांव के किसान संतोष कुमार सिंह ने लगभग एक एकड़ में इसकी खेती की है। सम्होता के किसान कमल सिंह, शिवनाथ सिंह और उमानाथ सिंह का कहना है कि समय पर पर्याप्त बीज मिले तो वे खेती का क्षेत्रफल और बढ़ा सकते हैं।
एक एकड़ में 60 हजार तक मुनाफे की उम्मीद
कृषि विज्ञान केंद्र, मांझी के वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र चंद्र चंदोला के अनुसार, वैज्ञानिक विधि से खेती करने पर एक एकड़ में 15 से 16 क्विंटल मडुआ की उपज मिल सकती है।
उन्नत किस्मों और बेहतर प्रबंधन से उत्पादन 18 क्विंटल तक पहुंचने की संभावना है। लागत और बाजार भाव अनुकूल रहने पर एक एकड़ से 45 से 60 हजार रुपये तक शुद्ध मुनाफा मिल सकता है।
इसकी कई किस्में 65 से 100 दिनों में तैयार हो जाती हैं। बिरसा मडुआ, वीएल मडुआ और जीपीयू-28 जैसी किस्मों का चयन स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किया जा सकता है।
अनुदानित बीज से खेती को मिलेगा बढ़ावा
सहायक तकनीकी प्रबंधक सह प्रखंड उद्यान पदाधिकारी अजय प्रकाश ने बताया कि मडुआ के अलावा बाजरा, ज्वार, कोदो, कुटकी, सांवा, चेना और कंगनी की खेती भी कम पानी में की जा सकती है।
कृषि विभाग की ओर से श्रीअन्न के बीज अनुदानित दर पर उपलब्ध कराने, प्रति किलोग्राम 30 रुपये की छूट देने और प्रदर्शन के लिए मुफ्त बीज देने का प्राविधान है।
मांझी, एकमा और बनियापुर में भी तकनीकी मार्गदर्शन से खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मढ़ौरा और अमनौर के ऊंचे भू-भागों में भी किसानों को श्रीअन्न की खेती से जोड़ने की पहल की जा रही है।
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