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मां ने गहने गिरवी रखकर पढ़ाया, राष्ट्रपति से मिला सम्मान; अब आरा में जिंदगियां बचा रहीं छपरा की ममता

Published: Tue, 03 Nov 2026 07:15 PM (IST)

ममता कुमारी ने गरीबी और अभावों को मात देकर सफलता की नई कहानी लिखी है।

ममता कुमारी। (फाइल फोटो)

ममता कुमारी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. मां ने गहने गिरवी रख बेटी को पढ़ाया।

  2. राष्ट्रपति ने समाजसेवा के लिए किया सम्मानित।

  3. अब अग्निशमन विभाग में लोगों की जान बचा रहीं।

अमृतेश, छपरा। जिस घर में सरकारी नौकरी का कोई उदाहरण नहीं था, वहां एक बेटी ने अपनी मेहनत से सफलता की नई इबारत लिख दी।

पिता की छोटी-सी खेती से परिवार का गुजारा मुश्किल से होता था। आर्थिक तंगी ऐसी कि दसवीं के बाद पढ़ाई जारी रखना भी चुनौती बन गया।

लेकिन मां ने अपने गहने गिरवी रख दिए, ताकि बेटी के सपनों पर गरीबी का पहरा न लगे। मां के त्याग को ताकत बनाकर ममता कुमारी आगे बढ़ती रहीं।

खेल के मैदान से समाजसेवा तक अपनी प्रतिभा साबित की। उनकी मेहनत राष्ट्रपति भवन तक पहुंची। आज छपरा की यह बेटी अग्निशमन विभाग में तैनात होकर दूसरों की जिंदगी बचा रही है।

खेल के मैदान से शुरू हुआ सफर

शहर के जटई पोखरा निवासी रघुनाथ चौधरी और निर्मला देवी की पुत्री ममता का बचपन अभावों में बीता। पिता छोटे किसान थे। परिवार में तीन भाई और दो बहनें हैं।

स्कूल में शिक्षक स्व. समीउल हक अंसारी ने ममता की प्रतिभा पहचानी और उन्हें खेलों से जोड़ा। इसके बाद उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी पहचान बनाई।

मां ने गिरवी रखे गहने, नहीं रुकी पढ़ाई

दसवीं के बाद आर्थिक तंगी ने आगे की पढ़ाई में बाधा खड़ी कर दी। तब मां निर्मला देवी ने अपने गहने गिरवी रखकर बेटी की पढ़ाई जारी रखी।

ममता ने जेपीएम कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई शुरू की। यहां डॉ. विद्या वाचस्पति त्रिपाठी के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) से जुड़ीं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, पौधारोपण और सड़क सुरक्षा अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई।

राष्ट्रपति से सम्मान, अब अग्निशमन विभाग में जिम्मेदारी

समाजसेवा में योगदान के लिए वर्ष 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ममता को राष्ट्रीय सेवा योजना का सर्वोच्च पुरस्कार प्रदान किया।

इसके बाद उन्होंने बिहार अग्निशमन सेवा की प्रारंभिक और शारीरिक दक्षता परीक्षा उत्तीर्ण की। जून 2023 में बिहार पुलिस में चयनित हुईं। वर्तमान में आरा में अग्निशमन विभाग में पदस्थापित हैं।

आग की घटनाओं में लोगों की जान और संपत्ति बचाने की जिम्मेदारी निभा रही हैं। मां ने कभी उनके सपनों को बचाने के लिए गहने गिरवी रखे थे, आज ममता दूसरों की जिंदगी बचाकर अपने संघर्ष को सार्थक कर रही हैं।

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