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आरा में Peon की बेटी का कमाल: 6000 रुपये के लकड़ी के धनुष से नेशनल तीरंदाजी में जीता देश का दिल

Published: Fri, 30 Oct 2026 11:06 PM (IST)Updated: Fri, 30 Oct 2026 11:09 PM (IST)

भोजपुर की संस्कृति राज ने कम उम्र में मां को खोने और पिता के संघर्ष के बावजूद तीरंदाजी में राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का नाम रोशन किया है।

संस्कृति राज। (जागरण)

संस्कृति राज। (जागरण)

HighLights

  1. संस्कृति राज ने राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में रजत पदक जीता।

  2. पिता के संघर्ष और कोच के मार्गदर्शन से मिली बड़ी सफलता।

  3. उन्नत रिकर्व धनुष के लिए सरकारी सहायता की है जरूरत।

अरुण प्रसाद, आरा। कहते हैं कि हौसले बुलंद हों तो मुश्किलें भी मंजिल का रास्ता नहीं रोक पातीं। भोजपुर की अख्तियारपुर गांव की संस्कृति राज इसकी मिसाल हैं।

महज आठ साल की उम्र में मां का साया सिर से उठ गया, लेकिन पिता के संघर्ष और साहस को ताकत बनाकर संस्कृति तीरंदाजी की दुनिया में सफलता का निशाना साध रहीं हैं।

आज वह राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का नाम रोशन कर रही हैं। संस्कृति के पिता मुकेश गुप्ता परिवार की जिम्मेदारियां उठाने की लिए लंबे समय तक एक आभूषण दुकान पर काम करते रहे।

हाल ही में उन्हें अपनी मां की स्थान पर अनुकंपा की आधार पर क्षत्रिय उच्च विद्यालय, आरा में आदेशपाल की नौकरी मिली है। सीमित संसाधनों और पारिवारिक परिस्थितियों की बावजूद उन्होंने बेटी की सपनों को आगे बढ़ने का हौसला दिया।

संस्कृति की प्रतिभा वर्ष 2023 में सामने आई। उस समय स्कूलों में तीरंदाजी की लिए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की तलाश की जा रही थी। अख्तियारपुर स्कूल में आठवीं कक्षा की छात्रा संस्कृति पर कोच नीरज कुमार सिंह की नजर पड़ी।

उनकी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें प्रशिक्षण की लिए चुना गया। यहीं से उनके जीवन में तीरंदाजी का नया अध्याय शुरू हुआ।

6000 रुपये का खरीद धनुष

पिता ने किसी तरह पैसे जोड़कर छह हजार रुपये की धनुष और तीर खरीद कर दिए। गांव से वीर कुंवर सिंह स्टेडियम की दूरी करीब छह-सात किलोमीटर है।

बावजूद इसके संस्कृति रोज सुबह सात बजे प्रशिक्षण की लिए पहुंचती हैं। नियमित अभ्यास, अनुशासन और लगन ने उनकी प्रतिभा को निखारा। वर्ष 2023 से अब तक वह स्कूल गेम्स की साथ जूनियर और सीनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बिहार का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

जयपुर में जीता रजत पदक

उनकी मेहनत को बड़ी पहचान हाल ही में जयपुर में आयोजित जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में मिली। यहां देशभर की खिलाड़ियों की बीच दूसरा स्थान हासिल कर उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया।

वर्तमान में वह एसबी स्कूल, मौलाबाग में पढ़ाई कर रही हैं। उनका चयन मेघालय में होने वाली आगामी सीनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता की लिए भी हुआ है। संस्कृति की इस कामयाबी की पीछे अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी प्रशिक्षक नीरज का मार्गदर्शन भी अहम रहा है।

नीरज बताते हैं कि संस्कृति लकड़ी वाला धनुष से तीरंदाजी की सामान्य प्रतिस्पर्धा में भाग ले रही है, लेकिन रिकर्व प्रतिस्पर्धा के लिए उन्नत धनुष की आवश्यकता होती है और यह चार से पांच लाख रुपये में आता है। सरकार मदद करे तो संस्कृति जैसे बिहार के तीरंदाज रिकर्व इवेंट में भी सफलता दिला सकते हैं।

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