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आरा के गुदरी बाजार में नालियों की गाद और कचरे से Gold निकालने का अनोखा कारोबार, राजस्थान-MP तक से आते हैं लोग

Published: Thu, 29 Oct 2026 04:49 PM (IST)

आरा के गुदरी बाजार में सोने के कणों को कचरे से निकालने का एक अनोखा कारोबार चलता है, जहाँ नालियों ...और पढ़ें

नालियों की गाद में तलाशते हैं सोने के कण

नालियों की गाद में तलाशते हैं सोने के कण

HighLights

  1. आरा में कचरे और गाद से सोना निकालने का अनोखा कारोबार।

  2. घरों के धूल-कचरे, सोनार अवशेषों से भी कीमती कण।

  3. राजस्थान, मध्य प्रदेश से लोग सोने के कण तलाशने आते।

जागरण संवाददाता, आरा(भोजपुर)। भोजपुर के आरा शहर का गुदरी बाजार और जगजीवन मार्केट सोने-चांदी के कारोबार के लिए मशहूर है। यहां आभूषण बनाने, उनकी कटिंग, घिसाई और मरम्मत के दौरान सोने के बेहद महीन कण निकलते हैं। ये कण अक्सर फर्श की धूल, बुरादे और दूसरे अवशेषों में मिल जाते हैं।

आमतौर पर बेकार समझे जाने वाले इन अवशेषों में कीमती धातुओं के अंश छिपे हो सकते हैं। इसी संभावना ने यहां एक अलग तरह के कारोबार को जन्म दिया है।

नालियों की गाद में तलाशते हैं सोने के कण

गुदरी बाजार की सोनार दुकानों से निकलने वाले कुछ महीन कण पानी के साथ नालियों तक पहुंच सकते हैं। ऐसे में नालियों की सफाई करने वाले कुछ लोग गाद और दूसरे अवशेषों को इकट्ठा कर उनमें सोने के कण तलाशते हैं।

इस काम में अनुभव और बारीकी से अवशेषों को छांटना महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, नालियों से वास्तव में कितनी मात्रा में सोना मिलता है, यह वहां जमा सामग्री और आसपास की दुकानों के कामकाज पर निर्भर करता है।

राजस्थान और मध्य प्रदेश से भी पहुंचते हैं लोग

स्थानीय स्तर पर इस कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत दूसरे राज्यों से भी कुछ लोग आरा पहुंचते हैं।

वे बाजार की नालियों में जमा गाद और अन्य अवशेषों में कीमती धातुओं के अंश तलाशते हैं। आभूषण निर्माण के दौरान निकलने वाली धूल और बुरादे का आर्थिक महत्व इस गतिविधि की प्रमुख वजह है। हालांकि, बाहर से आने वाले लोगों की संख्या और उनकी कमाई के बारे में किसी निश्चित आंकड़े की पुष्टि जरूरी है।

घरों में सालभर जमा होता है कचरा, फिर होती है बिक्री

इस कारोबार का एक दिलचस्प पहलू घरों में जमा होने वाले अवशेषों की खरीद-बिक्री भी है। कुछ परिवार धूल, बुरादा और दूसरे उपयोगी अवशेषों को लंबे समय तक इकट्ठा करते हैं।

बाद में इन्हें ऐसे लोगों को बेच दिया जाता है, जो इनमें मौजूद धातुओं या दूसरी उपयोगी सामग्री को अलग करते हैं। दीपावली से पहले ऐसे अवशेषों की बिक्री किए जाने की बात भी सामने आती है। हालांकि, हर तरह के घरेलू कचरे में सोना होना जरूरी नहीं है।

सोनारों से लेकर महिलाओं तक की भागीदारी

गुदरी बाजार में आभूषण बनाने और उनकी कटिंग करने वाले कारीगरों के लिए सोने के छोटे-से-छोटे कण भी मायने रखते हैं। काम के दौरान निकले अवशेषों को अलग रखना धातु की बर्बादी कम करने का एक तरीका है।

वहीं, कुछ परिवारों में घरों से निकलने वाले बुरादे और दूसरे अवशेषों को अलग-अलग जमा किया जाता है। इस काम में महिलाएं भी भूमिका निभाती हैं। इस तरह सोने के कारोबार से जुड़ी गतिविधि दुकानों से निकलकर घरों तक पहुंचती है।

कटिंग की धूल भी कारोबारियों के लिए कीमती

आभूषणों की कटिंग और घिसाई के दौरान निकलने वाले अवशेष इस कारोबार का अहम हिस्सा हैं। इन अवशेषों में सोने की मौजूदगी और उसकी मात्रा के आधार पर उनका मूल्य तय हो सकता है।

इसलिए इन्हें सामान्य कचरे की तरह फेंकने के बजाय अलग इकट्ठा किया जाता है। बाद में उचित प्रक्रिया से इनमें मौजूद कीमती धातुओं को अलग किया जा सकता है। इस काम में अवशेषों की गुणवत्ता और उनमें मौजूद सोने की मात्रा सबसे महत्वपूर्ण होती है।

कचरे में छिपी कीमत, लेकिन कमाई की कोई गारंटी नहीं

आरा के गुदरी बाजार की यह गतिविधि दिखाती है कि आभूषण निर्माण के दौरान निकलने वाले छोटे-छोटे अवशेष भी आर्थिक रूप से उपयोगी हो सकते हैं।

नालियों की गाद से लेकर दुकानों की धूल और घरों में जमा बुरादे तक की खरीद-बिक्री इसी संभावना से जुड़ी है। हालांकि, इससे होने वाली कमाई या मिलने वाले सोने की मात्रा का कोई निश्चित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

इसलिए इस कारोबार की वास्तविक आर्थिक तस्वीर समझने के लिए स्थानीय दुकानदारों और इससे जुड़े लोगों से विस्तृत जानकारी जुटाना जरूरी है।