समस्तीपुर की स्मिता ने Gen Z को दिया बड़ा संदेश, तीन-तीन सरकारी सेवाओं में सफल
समस्तीपुर की स्मिता राज ने सीमित संसाधनों के बावजूद दिल्ली मेट्रो, बीईएल और कोल इंडिया लिमिटेड में सहायक प्रबंधक के ...और पढ़ें

तीन सरकारी कंपनियों में नौकरी हासिल करने वाली समस्तीपुर की स्मिता। सौ : स्वजन
HighLights
स्मिता राज ने तीन प्रतिष्ठित सरकारी कंपनियों में सफलता प्राप्त की।
गांव के सरकारी स्कूल से एनआईटी पटना तक का सफर तय किया।
सीमित संसाधनों के बावजूद बेटियों के लिए बनीं बड़ी प्रेरणा।
संवाद सहयोगी, बिथान (समस्तीपुर)। पिता की सीमित कमाई और परिवार की जिम्मेदारियां स्मिता राज के सपनों की राह में बाधा नहीं बन सकीं। गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाली इस बेटी ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर एक नहीं, तीन प्रतिष्ठित सरकारी कंपनियों में सफलता हासिल की।
पहले दिल्ली मेट्रो, फिर भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) और अब कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) में सहायक प्रबंधक के पद तक पहुंचकर उन्होंने परिवार और गांव का नाम रोशन किया है। दीपावली के अवसर पर स्मिता की सफलता उन बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं।
गांव के स्कूल से NIT पटना तक का सफर
बिथान प्रखंड के पुसहो गांव निवासी रामनंदन मालाकार और शिक्षिका सरिता कुमारी की पुत्री स्मिता राज की प्रारंभिक शिक्षा गांव के संध्या देवी सरस्वती शिशु मंदिर में हुई। इसके बाद पीएसपी प्लस टू उच्च माध्यमिक विद्यालय, बिथान से मैट्रिक और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। इंजीनियर बनने का सपना लेकर उन्होंने जेईई मेन्स की परीक्षा उत्तीर्ण की और एनआइटी पटना से बीटेक की डिग्री हासिल की।
कैंपस सेलेक्शन से दिल्ली मेट्रो में मिली नौकरी
बीटेक की पढ़ाई के दौरान ही कैंपस सेलेक्शन के माध्यम से स्मिता का चयन दिल्ली मेट्रो में सिग्नलिंग मेंटेनेंस इंजीनियर के पद पर हुआ। इसके बाद उन्होंने भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) की परीक्षा में सफलता हासिल की। उनका चयन बेंगलुरु में मिसाइल सिस्टम (एसबीयू) के डिप्टी इंजीनियर पद पर हुआ।
अब कोल इंडिया में बनीं सहायक प्रबंधक
दिल्ली मेट्रो और बीईएल में काम करने के बाद स्मिता ने कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) में सफलता हासिल की। वर्तमान में वह रांची में सहायक प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। लगातार तीन प्रतिष्ठित सरकारी कंपनियों में चयन उनकी मेहनत, लगन और तकनीकी दक्षता का प्रमाण है।
मां बोलीं, मेरी लाडो ही मेरी लक्ष्मी
स्मिता की मां सरिता कुमारी कहती हैं कि भारतीय संस्कृति और परंपरा में बेटियों को सदैव विशेष स्थान दिया गया है। बेटियां शक्ति का प्रतीक हैं। मेरी लाडो ही मेरी लक्ष्मी है। दीपावली पर उसके नाम का एक दीया जलाने में मुझे गर्व महसूस होता है। बेटी की सफलता पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय है।
पिता की अपील, बेटियों पर करें भरोसा
पिता रामनंदन मालाकार कहते हैं कि निजी शिक्षण संस्थान में काम करते हुए सीमित आय और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच बेटी को उच्च शिक्षा दिलाने का सपना कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया।
उन्होंने सभी माता-पिता से अपील की कि बेटियों पर भरोसा करें, उन्हें अच्छी शिक्षा दें और अपने सपनों को पूरा करने का अवसर प्रदान करें। बेटियों को सम्मान, शिक्षा और समान अवसर देना ही सशक्त समाज की पहचान है।
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