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Bihar News : दीपावली की खुशियों में न करें ऐसी गलती, पटाखों का बारूद आंख और आवाज कान को पहुंचाएगी नुकसान

Published: Sun, 08 Nov 2026 12:31 PM (IST)

Diwali Firecracker Safety : दीपावली पर पटाखों से होने वाली अप्रिय घटनाओं से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह ...और पढ़ें

डा. नवीन कुमार, डा. अनुपम पाल व् डा. सैयद मेराज इमाम ।

डा. नवीन कुमार, डा. अनुपम पाल व् डा. सैयद मेराज इमाम ।

HighLights

  1. पटाखों का बारूद आंखों के लिए काफी खतरनाक होता है।

  2. तेज आवाज वाले पटाखे कान का पर्दा फाड़ सकते हैं।

  3. श्वास रोगियों को पटाखों के धुएं से बचना चाहिए।

जागरण संवाददाता, समस्तीपुर । दीपावली के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना से निपटने के लिए खुद सजग रहने की जरूरत है। दीपों के इस पर्व के दौरान लोग आतिशबाजी वगैरह करते हैं जिसमें कई तरह की घटनाएं होने की संभावना बनी रहती है।

रोशनी का पर्व दीपावली में पटाखा फोड़े लेकिन सावधानी भी जरूरी है। पटाखा का बारूद आंख के लिए खतरनाक रहने के साथ ही ज्यादा आवाज से कान का पर्दा फट जाता है।

हर साल दीपावली के बाद देखा जाता है कि आंख, कान व अस्थमा के मरीजों की संख्या में इजाफा होती है। ऐसे में इस बार भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

पटाखा का बारूद आंख के लिए खतरनाक

मिथिला आंख हास्पीटल के प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. नवीन कुमार कहते हैं है कि आंख बहुत ही संवेदनशील अंग है। पटाखों का बारूद आंख के लिए काफी खतरनाक माना जाता है। इसलिए पटाखा छोड़ते वक्त सावधानी जरूरी है।

नजदीक से पटाखा नहीं छोड़े। कई बार देखा जाता है कि पटाखा नहीं फटने से बच्चे दोबारा उसके नजदीक चले जाते है और इसी दौरान अचानक से फट जाता है। इससे बच्चे के आंख, कान डैमेज होने का खतरा बना रहता है। अगर आंख में कुछ भी पड़ जाए तो तुरंत ठंडा पानी से धोएं।

ज्यादा आवाज वाले पटाखे से फट जाता कान का पर्दा 

ईएनटी विशेषज्ञ डा. सैयद मेराज इमाम ने बताया कि दीपावली में बच्चे ज्यादा आवाज वाले पटाखा फोड़ना पसंद करते हैं लेकिन यह उनके और बुजुर्गों के लिए काफी खतरनाक साबित होता है। इससे कान का पर्दा क्षतिग्रस्त हो सकता है।

140 डेसिबल से ज्यादा आवाज के पटाखे आपको बहरा बना सकते हैं। ऐसे में 85 डेसिबल से नीचे की आवाज वाले पटाखे ही फोड़े। गर्भवती महिलाओं को भी पटाखा से दूर रहना चाहिए।

श्वास व हृदय रोगियों को एहतियात बरतने की जरूरत

फिजिशियन डा. अनुपम पाल ने कहा कि दीपावली में पटाखा छोड़ते और दीया जलाते समय सावधानी नहीं बरतने पर लोग झुलस जाते है। ऐसे में कई लोग उस जगह को रगड़ने लगते है। जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए।

जले हुए भाग को ठंडे पानी में करीब 15 मिनट तक डाले रखें। फफोला बन जाने पर छेड़छाड़ न करें। पटाखे छोड़ते समय सिंथेटिक के बजाए सूती कपड़े पहनना चाहिए।

पटाखे जलाने से वायुमंडल में प्रदूषण बढ़ जाता है। ऐसे में फेफड़े व श्वांस रोगियों की समस्या बढ़ जाती है। अत्यधिक धुएं से अस्थमा का अटैक पड़ सकता है। इनहेलर साथ रखें।

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