मसाला खेती से चमकेगी समस्तीपुर के किसानों की किस्मत, धनिया-मेथी और सौंफ पर 40% की बंपर सब्सिडी
समस्तीपुर जिले में किसानों को धनिया, मेथी और सौंफ की खेती पर 40% अनुदान मिलेगा। यह योजना एकीकृत बागवानी विकास ...और पढ़ें

धनिया-मेथी और सौंफ पर 40% की बंपर सब्सिडी (AI Generated Image)
HighLights
मसाला फसलों की खेती पर 40% अनुदान मिलेगा।
धनिया, मेथी, सौंफ के लिए ऑनलाइन आवेदन जारी।
समस्तीपुर के किसानों को मिलेगा योजना का लाभ।
जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। जिले में किसानों की आय बढ़ाने और मसाला फसलों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए धनिया, मेथी और सौंफ की खेती पर अनुदान दिया जाएगा। एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत इन फसलों के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया चल रही है।
जिले में धनिया की खेती का लक्ष्य 50 हेक्टेयर, जबकि मेथी और सौंफ का लक्ष्य 25-25 हेक्टेयर रखा गया है। कुल 100 हेक्टेयर में खेती कराई जाएगी। बीज मसाला फसलों की खेती की लागत 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित है। इस पर 40 प्रतिशत की दर से 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान मिलेगा।
राशि दो किस्तों में दी जाएगी। पहली किस्त में बीज और अन्य सामग्री खरीदने के लिए 12 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तथा दूसरी किस्त में भौतिक सत्यापन के बाद आठ हजार रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाएंगे।
बीज राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, पटना और बिहार राज्य बीज निगम लिमिटेड, पटना के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे।
इन पंचायतों के किसान कर सकते हैं आवेदन
धनिया के लिए मोहिउद्दीननगर प्रखंड की कल्याणपुर बस्ती पूरब, राजाजान और रासपुर पतसिया पश्चिम पंचायतों के साथ पटोरी प्रखंड की शिउरा पंचायत चुनी गई है।
मेथी के लिए मोहिउद्दीननगर प्रखंड की कल्याणपुर बस्ती पूरब, राजाजान और रासपुर पतसिया पश्चिम पंचायतें शामिल हैं।
सौंफ के लिए कल्याणपुर प्रखंड की चकमहेसी और सोमनाहा पंचायतों का चयन किया गया है। इन पंचायतों के किसान निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं।
जमीन से जुड़े दस्तावेज देना अनिवार्य
जिला उद्यान पदाधिकारी तारिक असलम ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र, दो वर्ष पूर्व से अद्यतन राजस्व रसीद, ऑनलाइन अद्यतन रसीद, वंशावली या निर्धारित प्रारूप में एकरारनामा के आधार पर विधिमान्य भू-स्वामित्व प्रमाण से जुड़े दस्तावेजों में से कोई एक देना होगा।
भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र या राजस्व रसीद में आवेदक का नाम स्पष्ट नहीं होने पर वंशावली भी लगानी होगी। गैर-रैयत किसान निर्धारित प्रारूप में एकरारनामा के आधार पर आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन से पहले किसान डीबीटी में पंजीकृत अपने बैंक खाते का विवरण जांच लें। अनुदान का भुगतान डीबीटी कार्यक्रम के तहत सीएफएमएस के माध्यम से होगा।
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