बिहार की 94% आशा कार्यकर्ता 8 हजार के प्रोत्साहन से दूर, अब बदल जाएगा कामकाज का तरीका
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बिहार में 94% आशा कार्यकर्ता निर्धारित गतिविधियों के अनुरूप कार्य नहीं कर रही हैं, जिससे उनकी प्रोत्साहन राशि कम मिल रही है।
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इसमें आशा की प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
94% आशा कार्यकर्ता निर्धारित कार्य नहीं कर रहीं।
नवंबर 2026 से आशा के लिए नई व्यवस्था।
दो पैकेज में मिलेगी प्रोत्साहन राशि, अधिकतम ₹8000।
प्रकाश कुमार, समस्तीपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत आशा के कामकाज की समीक्षा में सामने आया है कि बड़ी संख्या में आशा निर्धारित गतिविधियों के अनुरूप कार्य नहीं कर रही हैं। इसका असर उनके प्रोत्साहन राशि पर पड़ रहा है।
सितंबर 2026 में राज्य की कुल 92,873 दावा करने वाली आशा में से महज 5,252 यानी 5.66 प्रतिशत ने ही आठ हजार रुपये या उससे अधिक की प्रोत्साहन राशि का दावा किया। शेष 94.34 प्रतिशत आशा का दावा इस निर्धारित राशि से कम रहा।
विभाग ने आशा की कार्य गतिविधियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित करने और प्रोत्साहन राशि के दावे में सुधार लाने पर जोर दिया है।
नवंबर 2026 से आशा के लिए नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत प्रत्येक आशा को निर्धारित तालिकाओं में शामिल गतिविधियों के अनुसार काम करना होगा। दो अलग-अलग पैकेज गतिविधियां निर्धारित की गई हैं।
तालिका-1 और तालिका-2 के माध्यम से क्रमशः आठ हजार रुपये और दो हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि से जुड़ी गतिविधियों का निर्धारण किया गया है। इसे पूरा करने के बाद आशा पोर्टल के माध्यम से प्रोत्साहन राशि का दावा कर सकेंगी।
राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के कार्यपालक निदेशक डा. नवल किशोर चौधरी ने सभी सिविल सर्जन सह सदस्य सचिव और जिला कार्यक्रम प्रबंधक को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
इससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार नियोजन और टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को गति देने की उम्मीद है। सिविल सर्जन डा. राजीव कुमार ने बताया कि राज्य स्तरीय के निर्देश के आलोक में आशा को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
गतिविधियों के तहत करना होगा काम
स्वास्थ्य विभाग ने नवंबर 2026 से आशा के लिए नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत प्रत्येक आशा को निर्धारित तालिकाओं में शामिल गतिविधियों के अनुसार काम करना होगा। दो अलग-अलग पैकेज गतिविधियां निर्धारित की गई हैं।
तालिका-1 और तालिका-2 के माध्यम से क्रमशः आठ हजार रुपये और दो हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि से जुड़ी गतिविधियों का निर्धारण किया गया है।
विभाग ने जिला स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे आशा को नई व्यवस्था और निर्धारित गतिविधियों की जानकारी दें। साथ ही उन्हें नवंबर से नई तालिकाओं के अनुरूप नियमित रूप से कार्य करने के लिए प्रेरित करें।
मुजफ्फरपुर में सबसे अधिक 455 आशा ने किया दावा
समस्तीपुर में कुल 3979 दावे किए गए। इनमें 182 दावे 8000 रुपये या उससे अधिक के हैं, जबकि 3797 दावे इससे कम राशि के हैं। जिले में कुल दावों के मुकाबले अधिक राशि वाले दावों का प्रतिशत 4.57 है।
जिलावार आंकड़ों के अनुसार, 8000 या उससे अधिक राशि का दावा करने में मुजफ्फरपुर जिला सबसे आगे है। यहां कुल 3,966 दावों में 455 दावे निर्धारित राशि के बराबर या उससे अधिक के हैं। इसके बाद खगड़िया में 285, कटिहार में 280, सीतामढ़ी में 261, पूर्णिया में 254, नवादा में 253 और सहरसा में 242 दावे किए गए हैं।
वहीं, अररिया में 219, बांका में 192, बेगूसराय और समस्तीपुर में 182-182 तथा पूर्वी चंपारण में 173 दावे 8000 या उससे अधिक के हैं। गया जी में 169, पश्चिमी चंपारण में 158, नालंदा में 156, सारण में 154 और पटना में 149 दावे इस श्रेणी में शामिल हैं।
आंकड़ों में सबसे कम दावे गोपालगंज और अरवल जिले में सामने आए हैं। गोपालगंज में कुल 2,512 दावों में केवल 14 दावे 8000 या उससे अधिक के हैं।
वहीं अरवल में 752 दावों में महज 11 दावे इस श्रेणी के हैं। सीवान में 3,149 में से 43, किशनगंज में 1,535 में से 31 और मधुबनी में 3,841 में से 79 दावे ही 8000 या उससे अधिक के हैं।
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