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बिहार की बेटी ने मॉस्को तक भरी उड़ान, देश की पहली महिला सैन्य राजनयिक बनीं अंजलि 

Published: Wed, 07 Oct 2026 04:14 PM (IST)

समस्तीपुर के मकसूदपुर गांव की विंग कमांडर अंजलि सिंह देश की पहली महिला सैन्य राजनयिक बनकर मास्को से वतन लौटी हैं।

परिवार के साथ विंग कमांडर अंजलि सिंह। फोटो जागरण

परिवार के साथ विंग कमांडर अंजलि सिंह। फोटो जागरण

HighLights

  1. विंग कमांडर अंजलि सिंह देश की पहली महिला सैन्य राजनयिक।

  2. मास्को स्थित भारतीय दूतावास में मिग-29 इंजीनियर के रूप में तैनात।

  3. समस्तीपुर की बेटी अंजलि सेना में जाने वाली बेटियों की प्रेरणा।

जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। समस्तीपुर के वारिसनगर के मकसूदपुर गांव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गर्व कराया है। छोटे से गांव की बेटी और वायुसेना की अधिकारी विंग कमांडर अंजलि सिंह (डिंपल) देश के सैन्य इतिहास में एक नया अध्याय लिखकर वतन लौट आई हैं।

उनके नाम किसी भी भारतीय मिशन के तहत विदेश में तैनात होने वाली देश की पहली महिला सैन्य राजनयिक होने की उपलब्धि है। मिग-29 लड़ाकू विमान की इंजीनियर अंजलि की मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास में 2019 में तैनाती हुई थी।

ग्रामीण दिलीप सिंह, मार्कंडेय सिंह, अनिल सिंह, हिमांशु सिंह बताते हैं कि उनकी गांव की बेटी आज बुलंदियों के आसमान को छू रही है।

फ्लाइट लेफ्टिनेंट के रूप में सेवानिवृत्त पिता मदन प्रसाद सिंह को अपना रोल मॉडल मानने वाली 44 वर्षीय अंजलि ने बचपन से ही सेना में जाने का इरादा कर लिया था।

वे मानती हैं कि 1999 में कारगिल युद्ध के टीवी पर प्रसारण के बाद तो उन्होंने प्रण कर लिया था कि वे हर हाल में एयर फोर्स ज्वाइन करेंगी।

2002 में हुआ था वायुसेना में चयन

जलंधर से शुरुआती पढ़ाई और नासिक से इंटरमीडिएट करने के बाद उन्होंने पूना यूनिवर्सिटी से टेलीकम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री ली।

उत्तर प्रदेश के कोटद्वार में 2 साल तक प्राइवेट नौकरी करने के बाद वर्ष 2002 में उनका चयन भारतीय वायुसेना में हो गया।

24 साल के सैन्य सफर में उन्होंने लड़ाकू स्क्वाड्रन के साथ देश की सेवा की है। भाई डॉ. मनीष कुमार सर्जन हैं, जो अपनी डाक्टर पत्नी स्वाति और पिता के साथ बेंगलुरु में रहते हैं।

दिल्ली रहता है पूरा परिवार

वर्ष 2010 में उनकी शादी बेगूसराय (महना) के रहने वाले इंजीनियर राजकुमार से हुई। उनका आठ साल का बेटा सक्षम है। मॉस्को से 2023, फरवरी में लौटने के बाद फिलहाल उनका पूरा परिवार दिल्ली में ही उनके साथ है।

शिक्षाविद डॉ. विनय कुमार का कहना है कि अंजलि की यह उपलब्धि उन तमाम बेटियों के लिए एक मजबूत पथ प्रदर्शक बनेगी जो सेना में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं।

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