MBBS और इंजीनियरिंग छोड़ पूर्णिया के तीन भाइयों ने ₹1 लाख से खड़ा किया ₹50 करोड़ का स्टार्टअप 'क्रिएटर माइंड'
Startup Creator Mind: पूर्णिया के जानकीनगर गांव के तीन भाइयों ने एमबीबीएस और इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ एक लाख रुपये ...और पढ़ें

Startup Creator Mind: पूर्णिया जिले के जानकीनगर गांव निवासी एक साधारण किसान के तीन मेधावी बेटों—रजनीश वत्स, गंधर्व वत्स और मोहसिन वत्स ने पेश की मिसाल
HighLights
पूर्णिया के तीन भाइयों ने एमबीबीएस-इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ी।
मात्र एक लाख से 'क्रिएटर माइंड' स्टार्टअप की शुरुआत की।
आज कंपनी का मूल्यांकन 50 करोड़ रुपये से अधिक है।
जागरण संवाददाता, पूर्णिया। Startup Creator Mind: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब सार्वजनिक मंचों से यह कहते हैं कि नए भारत का भविष्य केवल मेट्रो शहरों में नहीं, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों से निकलने वाले युवाओं के इनोवेटिव आइडिया में बसता है, तो पूर्णिया के जानकीनगर गांव की यह जमीनी हकीकत उस सोच पर सटीक मुहर लगाती दिखती है।
यह कहानी सिर्फ एक सफल व्यवसाय की नहीं, बल्कि उस 'जेन-जी' (Gen-Z) पीढ़ी की अडिग सोच और जोखिम उठाने की क्षमता की है, जो पारंपरिक लीक से हटकर कुछ नया करने का माद्दा रखती है। सीमांचल के एक छोटे किसान के तीन बेटों—रजनीश वत्स, गंधर्व वत्स और मोहसिन वत्स ने महज एक लाख रुपये की जमा पूंजी से जिस तकनीकी स्टार्टअप की शुरुआत की थी, आज उसका वैल्यूएशन 50 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है।
डिग्री की जगह कंपनी को दी तरजीह, छोड़ी मेडिकल व इंजीनियरिंग
इस सफलता की सबसे अनोखी बात तीनों भाइयों का अद्भुत जोखिम और समर्पण है। मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करते ही तीनों भाइयों ने पिता का आर्थिक संबल बनने की ठानी। उन्होंने एक लैपटॉप और छोटी प्रिंटिंग दुकान के साथ काम शुरू किया। इसके साथ ही पढ़ाई भी जारी रखी। बड़े भाई ने कड़ी मेहनत से नीट (NEET) परीक्षा क्रैक कर एमबीबीएस में दाखिला ले लिया, वहीं छोटे भाई अपनी मेधा के बल पर पूर्णिया इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश पाने में सफल रहे।
क्रिएटर माइंड: स्टार्टअप सफरनामा एक नजर में
संस्थापक: रजनीश वत्स, गंधर्व वत्स और मोहसिन वत्स (वत्स ब्रदर्स)।
मूल निवास: जानकीनगर गांव, पूर्णिया (बिहार)।
शुरुआती पूंजी: मात्र ₹1 लाख और 1 लैपटॉप।
कंपनी का नाम: क्रिएटर माइंड (नींव: 2018-19, औपचारिक निबंधन: 2023)।
वर्तमान वैल्यूएशन: ₹50 करोड़ से अधिक (वार्षिक टर्नओवर: ₹10 करोड़+)।
मुख्य सेवाएं: स्मार्ट क्लास सॉल्यूशंस, कस्टमाइज्ड एजुकेशनल व फाइनेंशियल सॉफ्टवेयर, वन-स्टॉप आईटी सॉल्यूशंस।
विस्तार व रोजगार: दिल्ली, नोएडा, कोलकाता और पटना में शाखाएं; 100+ प्रोफेशनल्स को रोजगार।
लेकिन इसी बीच वेबसाइट डेवलपमेंट और सॉफ्टवेयर निर्माण का उनका व्यवसाय तेजी से बढ़ने लगा। जब कंपनी का दायरा बढ़ा, तो दोनों क्षेत्रों को एक साथ संभालना चुनौती बन गया। ऐसे में डिग्री का लंबा इंतजार करने के बजाय बड़े भाई ने एमबीबीएस की डॉक्टरी और छोटे ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर अपनी कंपनी को आगे बढ़ाने का ऐतिहासिक फैसला लिया।
वेबसाइट बनाने से शुरू हुआ सफर
वत्स ब्रदर्स ने अपने स्टार्टअप 'क्रिएटर माइंड' की अनौपचारिक शुरुआत वर्ष 2018-19 में की थी, जिसे 2023 में विधिवत निबंधित कराया गया। वेबसाइट निर्माण से शुरुआत करने के बाद उन्होंने डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं तलाशीं। उन्होंने 'स्मार्ट क्लास' के आधुनिक कॉन्सेप्ट पर काम शुरू किया और निजी कोचिंग शिक्षकों व शैक्षणिक संस्थानों से सीधा संपर्क साधा। उनका तैयार किया गया कस्टमाइज्ड लर्निंग एप्लिकेशन मार्केट में हाथों-हाथ लिया गया।
स्मार्ट क्लास से मिली रफ्तार
इसके बाद उन्होंने शैक्षणिक व वित्तीय संस्थानों के लिए सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का 'वन-स्टॉप सॉल्यूशन' देना शुरू किया। वत्स ब्रदर्स का स्पष्ट मानना रहा कि नौकरी मांगने वाला बनने से कहीं बेहतर है कि ऐसा मंच तैयार किया जाए, जो दूसरों को नौकरी दे सके। यह जोखिम पूरी तरह रंग लाया। आज कंपनी का सालाना टर्नओवर 10 करोड़ रुपये को पार कर चुका है और कंपनी में 100 से अधिक स्किल्ड प्रोफेशनल्स प्रत्यक्ष रोजगार पा रहे हैं।
दिल्ली-कोलकाता तक पहुंचा गांव का विजन
पूर्णिया के सुदूर जानकीनगर गांव से शुरू हुआ यह सफर अब देश के बड़े औद्योगिक व कारोबारी महानगरों तक पहुंच चुका है। कंपनी ने दिल्ली और कोलकाता जैसे महानगरों के साथ-साथ नोएडा और पटना में भी अपने सुसज्जित कार्यालय स्थापित कर लिए हैं। स्थानीय प्रतिभाओं और मजबूत डिजिटल नेटवर्क के सहारे यह ग्रामीण टेक-स्टार्टअप अब राष्ट्रीय पटल पर अपनी मजबूत धाक जमा रहा है।
डीएम ने बताया रोल मॉडल
पिछले दिनों बियाडा (BIADA) और जिला उद्योग केंद्र के तत्वावधान में आयोजित उद्योग वार्ता में पूर्णिया के जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने वत्स ब्रदर्स की उद्यमिता की खुले दिल से सराहना की। डीएम ने कहा कि यह प्रेरक कहानी देश के हर उस युवा के लिए एक नजीर है, जो सीमित संसाधनों और छोटे शहरों का बहाना बनाकर रुक जाता है। जब सोच में नवाचार और इरादों में फौलादी मजबूती हो, तो बिहार का कोई भी गांव वैश्विक बाजार से सीधे जुड़ सकता है।
