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दिसंबर में खत्म हो रही गंगा जल संधि! MP पप्पू यादव ने CR पाटिल से की भेंट, नई व्यवस्था से पहले सुनें बिहार की आवाज

Published: Tue, 22 Sep 2026 05:07 PM (IST)

Ganga Water Treaty 2026 Pappu Yadav: पप्पू यादव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मिलकर 2026 में समाप्त हो रही ...और पढ़ें

Ganga Water Treaty 2026 Pappu Yadav: नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल को फरक्का बैराज और गंगा जल प्रबंधन को लेकर ज्ञापन सौंपते सांसद पप्पू यादव

Ganga Water Treaty 2026 Pappu Yadav: नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल को फरक्का बैराज और गंगा जल प्रबंधन को लेकर ज्ञापन सौंपते सांसद पप्पू यादव

HighLights

  1. बिहार के हितों को गंगा जल संधि नवीनीकरण में प्राथमिकता मिले।

  2. फरक्का बैराज के प्रभावों का स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक।

  3. बाढ़ प्रबंधन हेतु गंगा नदी का दीर्घकालिक वैज्ञानिक प्रबंधन हो।

जागरण संवाददाता, पूर्णिया। Ganga Water Treaty 2026 Pappu Yadav:  पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से नई दिल्ली में मुलाकात कर फरक्का बैराज और गंगा जल प्रबंधन से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं पर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। सांसद ने मांग की कि दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही ऐतिहासिक भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि के नवीनीकरण से पहले बिहार के हितों को सर्वोपरि रखा जाए और राज्य को निर्णय प्रक्रिया में स्पष्ट व औपचारिक भूमिका दी जाए।

उन्होंने कहा कि बिहार दशकों से गंगा में भारी गाद जमाव (सिल्टेशन), नदी की घटती जल-वहन क्षमता, कटाव और विनाशकारी बाढ़ की विभीषिका झेल रहा है। ऐसे में आने वाले वर्षों के लिए कोई भी नई अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय व्यवस्था तय करने से पूर्व बिहार की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना अनिवार्य है।

पप्पू यादव ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि वर्ष 2026 की बाढ़ ने राज्य में स्थिति की भयावहता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। इस वर्ष पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.53 मीटर तक पहुंच गया, जिसने वर्ष 2016 के पिछले उच्चतम स्तर (50.52 मीटर) का ऑल टाइम रिकॉर्ड तोड़ दिया।

इसी प्रकार पंडारक में भी 2021 का रिकॉर्ड टूट गया। उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अकेले सितंबर माह में बिहार के 15 जिलों के करीब 48.70 लाख लोग बाढ़ की त्रासदी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बाढ़ के बढ़ते खतरे के पीछे कई कारक हो सकते हैं, लेकिन फरक्का बैराज के कारण गंगा में हो रहे गाद जमाव और नदी के तलछट में आए बदलावों की वैज्ञानिक जांच अब अपरिहार्य हो चुकी है।

50 वर्षों के प्रभाव का स्वतंत्र वैज्ञानिक आकलन जरूरी

सांसद ने फरक्का बैराज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका निर्माण 1961 में शुरू होकर 1975 में पूरा हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य गंगा का पानी फीडर नहर के जरिए भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली तक पहुंचाकर कोलकाता बंदरगाह की नौवहन क्षमता को बनाए रखना था।

  • संधि में हिस्सेदारी: 1996 की गंगा जल संधि के नवीनीकरण से पहले बिहार सरकार से औपचारिक और प्रभावी परामर्श सुनिश्चित हो।

  • 2050 का विजन: नई संधि में वर्ष 2050 तक बिहार की पेयजल, सिंचाई, औद्योगिक विकास और बाढ़ प्रबंधन की जरूरतों को प्राथमिकता मिले।

  • वैज्ञानिक अध्ययन: बक्सर से फरक्का तक गंगा के तलछट, गाद जमाव और नदी के स्वरूप का स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए।

  • पारदर्शिता और श्वेत पत्र: 2017-18 की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक हो और पिछले 5 दशकों में ड्रेजिंग व रखरखाव पर हुए खर्च का श्वेत पत्र जारी किया जाए।

  • रियल-टाइम प्रोटोकॉल: मानसून के समय फरक्का बैराज के फाटकों के संचालन का समयबद्ध प्रोटोकॉल बने और बिहार को जलस्तर का रियल-टाइम डेटा मिले।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस राष्ट्रीय उद्देश्य का सम्मान करते हुए भी यह समीक्षा करना आवश्यक है कि बीते पांच दशकों में इस बैराज के कारण बिहार में गाद जमाव, नदी के स्वरूप में विकृति और बैकवाटर प्रभाव से बाढ़ पर क्या असर पड़ा है। उन्होंने पर्यावरणविदों और पुराने अध्ययनों की चेतावनियों का उल्लेख करते हुए बक्सर से लेकर फरक्का तक गंगा के समूचे प्रवाह क्षेत्र का स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन कराने की पुरजोर मांग की।

1996 की संधि में बिहार की अनदेखी

पप्पू यादव ने कहा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुए 30 वर्षीय गंगा जल समझौते में बिहार सीधे तौर पर कोई पक्षकार नहीं था, जबकि इस समझौते के तमाम प्रतिकूल प्रभाव राज्य को भुगतने पड़े हैं। वर्तमान संधि में केवल पानी के बंटवारे का प्रावधान है, लेकिन गाद प्रबंधन, नदी की घटती गहराई, मानसून के दौरान फाटकों के संचालन और कटाव नियंत्रण पर कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है।

2050 की जरूरतों का रखा जाए ख्याल

उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि 2026 के बाद की नई व्यवस्था तैयार करते समय बिहार की वर्ष 2050 तक की पेयजल, सिंचाई, औद्योगिकीकरण और बाढ़ नियंत्रण संबंधी दीर्घकालिक जरूरतों को केंद्र में रखकर ही कोई समझौता किया जाए।

बैराज संचालन का बने स्पष्ट प्रोटोकॉल

सांसद ने बिहार की सुरक्षा के लिए मांग रखी कि बाढ़ काल में फरक्का बैराज के फाटकों के संचालन (गेट ऑपरेशन) को लेकर एक पारदर्शी और समयबद्ध मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तय की जाए। साथ ही, बिहार सरकार को फरक्का के जलस्तर और जलप्रवाह की वास्तविक समय (रियल-टाइम) जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था हो।

जारी हो श्वेत पत्र

उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि वर्ष 2017-18 में गठित विशेषज्ञ समिति की जांच रिपोर्ट को अविलंब सार्वजनिक किया जाए और पिछले 50 वर्षों में बैराज व फीडर नहर की ड्रेजिंग, रखरखाव और गाद निष्कासन पर हुए कुल वित्तीय खर्च का पूरा ब्योरा श्वेत पत्र के माध्यम से देश के सामने रखा जाए।

उन्होंने अंत में कहा कि समस्या का स्थायी हल महज तटबंध ऊंचे करने या अस्थायी ड्रेजिंग से संभव नहीं है, बल्कि नदी की गाद, प्रवाह और प्रकृति के अनुकूल दीर्घकालिक वैज्ञानिक नदी प्रबंधन प्रणाली विकसित करने से ही बिहार को बाढ़ से मुक्ति मिल सकेगी।

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