पूर्णिया में जीवित बेटी के श्राद्ध और भोज के बाद गांव लौटी रिया; पति मिलन के घर हुआ स्वागत, मां-बाप को कहे ये कठोर शब्द
Purnia Intercaste Marriage Controversy: पूर्णिया में अंतरजातीय प्रेम विवाह के बाद बेटी रिया के पिता ने उसे मृत मानकर श्राद्ध ...और पढ़ें
HighLights
पिता ने जीवित बेटी रिया का श्राद्ध और ब्रह्मभोज किया।
रिया पति मिलन के साथ ससुराल लौटी, परिवार ने स्वागत किया।
रिया ने माता-पिता पर जातिवाद का आरोप लगाया, पिता दुखी।
डिजिटल डेस्क, भागलपुर। Purnia Intercaste Marriage Controversy: बिहार के पूर्णिया जिले के केनगर प्रखंड अंतर्गत गंगेली पंचायत के चपय गांव में अंतरजातीय प्रेम विवाह को लेकर खड़ा हुआ विवाद अब दोनों परिवारों के बीच सीधे टकराव और सामाजिक बहस में बदल चुका है। जिस जीवित बेटी का उसके पिता ने पुतला फूंककर दाह संस्कार किया, सपरिवार मुंडन कराया और पंडितों से पिंडदान कराकर गांवभर को श्राद्ध भोज (ब्रह्मभोज) खिला दिया, वही बेटी अब अपने फैसले पर अडिग रहकर पति के साथ ससुराल पहुंच चुकी है।
18 सितंबर को अंतरजातीय विवाह रचाने वाले रिया और मिलन खुलकर सबके सामने आ गए। शादी के बाद दोनों एक रिश्तेदार के यहां ठहरे हुए थे और मायके में चल रहे श्राद्ध के सारे कर्मकांड पूरे होने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही भोज संपन्न हुआ, रिया अपने पति के साथ गांव पहुंच गई।
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हैरानी की बात यह है कि रिया के मायके और ससुराल के बीच की दूरी महज 150 मीटर यानी सिर्फ तीन घरों की है। रिया के पहुंचते ही मिलन के परिजनों और सगे-संबंधियों ने नवदंपती का जोरदार स्वागत किया और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ रिया का गृह प्रवेश कराया। एक ही गांव में महज चंद कदमों की दूरी पर एक घर में श्राद्ध का सन्नाटा पसरा रहा, तो दूसरे घर में नई बहू के आगमन का उल्लास दिखा।
'दूध-सब्जी का लेन-देन था, शादी पर आ गई जात'
गांव पहुंचते ही रिया ने अपने माता-पिता के कृत्य पर गहरा रोष जताया और उन पर जातिवाद की संकीर्ण मानसिकता में जकड़े होने का सीधा आरोप लगाया। रिया ने कहा कि उसके परिवार और मिलन के परिवार के बीच वर्षों पुराना पारिवारिक संबंध रहा है। दोनों परिवारों के बीच बेरोकटोक आना-जाना था, दूध और सब्जियों का लेन-देन होता था और खान-पान का भी साझा रिश्ता था। लेकिन जैसे ही बात जीवनसाथी चुनने की आई, परिवार ने प्रेम और आत्मीयता को दरकिनार कर जाति को आगे कर दिया।
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रिया का मां-बाप पर प्रहार
रिया ने तीखे शब्दों में कहा, "मेरे माता-पिता ने जिंदा बेटी का श्राद्ध और पिंडदान करा दिया, लेकिन मुझे इसकी रत्ती भर भी परवाह नहीं है। मेरे पति मिलन मेरे साथ खड़े हैं और उनके परिवार ने मुझे पूरे मान-सम्मान के साथ स्वीकार किया है। माता-पिता मुझे कितने दिन अपने पास रखते, आखिरकार शादी के बाद पति के घर ही जाना था। बालिग होने के नाते मैंने अपना जीवनसाथी खुद चुना है। जिस परिवार ने अपनी जीती-जागती बेटी का श्राद्ध कर दिया, उनसे मेरा अब कोई खून या सामाजिक रिश्ता नहीं बचा। अब जो कुछ हैं, मेरे पति और मेरा ससुराल ही हैं।"
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पिता बोले- छीन लिया कन्यादान का हक
दूसरी ओर, रिया के माता-पिता और स्वजनों का दर्द भी आक्रोश बनकर फूट पड़ा। परिजनों का कहना है कि जिस बेटी को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, पढ़ाया-लिखाया और लाड़-प्यार से बड़ा किया, उसने अपने मां-बाप से कन्यादान तक का पुनीत अधिकार छीन लिया। रिया के पिता मनोज गोस्वामी और परिजनों ने कहा, "क्या दुनिया में कोई भी मां-बाप या भाई अपनी बेटी का बुरा चाहते हैं? हम अपनी बेटी के लिए अपनी ही जाति में एक सुयोग्य और संभ्रांत वर तलाश कर धूमधाम से उसकी शादी कराने की तैयारी में थे।
पूर्णिया के चपय गांव में अंतरजातीय प्रेम विवाह के बाद जीवित बेटी रिया का पिता मनोज गोस्वामी ने कराया था मुंडन, पिंडदान और ब्रह्मभोज
श्राद्ध कर्म के अनुष्ठान संपन्न होते ही 18 सितंबर को पति मिलन के साथ गांव लौटी रिया; ससुराल पक्ष ने उत्साह से कराया गृह प्रवेश
रिया का मायके पर तीखा प्रहार; कहा- मां-बाप ने प्यार नहीं केवल जात देखी, जिंदा बेटी का पिंडदान करने वालों से अब कोई वास्ता नहीं
पिता व परिजनों का छलका दर्द; बोले- जिस बेटी को नाजों से पाला उसने कन्यादान का हक भी छीन लिया, स्वजाति में कराते बेहतर शादी
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रिया के पिता ने कहा- आज के दौर में ऐसे तमाम रिश्ते देखे जा रहे हैं जहां प्रेम विवाह कुछ ही दिनों में बिखर जाते हैं। बेटी ने न केवल कुल की मर्यादा तोड़ी, बल्कि दूसरी जाति में भागकर पूरे परिवार को समाज में कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा। जब उसने खुद ही हमारा त्याग कर दिया, तो हमारे लिए भी वह अब पराई हो चुकी है। अब वह जो चाहे करे, हमारे दिल और प्यार से वह हमेशा के लिए बेदखल हो चुकी है।"
8 सितंबर को घर छोड़ा, 164 के बयान से लेकर श्मशान तक की कहानी
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 8 सितंबर को हुई थी, जब मनोज गोस्वामी की पुत्री रिया पड़ोस के ही दिलीप पासवान के पुत्र मिलन के साथ घर से निकल गई थी। दोनों के बीच करीब एक वर्ष से प्रेम संबंध था। पिता द्वारा मरंगा थाने में अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने 12 सितंबर को दोनों को बरामद कर अदालत में पेश किया।
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न्यायालय में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज कराए गए बयान में रिया ने स्पष्ट कहा कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से मिलन के साथ विवाह कर जीवन बिताना चाहती है। अदालत से मिली कानूनी स्वतंत्रता के बाद पिता ने सामाजिक लोकलाज में बेटी को मृत मान लिया। 15 सितंबर को गांव के श्मशान घाट पर रिया की तस्वीर और पुतले की बाकायदा शव यात्रा निकालकर मुखाग्नि दी गई।
17 सितंबर को वैदिक पंडितों की देखरेख में सपरिवार नख-बाल कटवाकर मुंडन कराया गया और तिल, कुश व गंगाजल से पिंडदान कर ग्रामीणों को ब्रह्मभोज खिलाया गया। अब रिया के ससुराल लौटने के बाद गांव में तनाव और कौतूहल का माहौल है, जबकि इस अंतरजातीय विवाह को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
