बिहार के सहरसा में गन्ने के साथ आलू-हल्दी की खेती से किसानों की बढ़ेगी कमाई, एक खेत से मिलेगा दोहरी फसल का लाभ
सहरसा में किसान शरदकालीन गन्ने के साथ आलू, हल्दी और अदरक की सह-फसली खेती कर रहे हैं।

सहरसा में शरदकालीन गन्ना की नर्सरी तैयार करते किसान और सह-फसली खेती का दृश्य (AI generated image)
HighLights
गन्ने के साथ आलू, हल्दी, अदरक की सह-फसली खेती।
किसानों को कम लागत में मिलेगा दोगुना लाभ।
20-25 हजार हेक्टेयर में गन्ना रकबा बढ़ाने का लक्ष्य।
संवाद सहयोगी, सहरसा। कोसी प्रभावित सहरसा जिले में कृषि के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जिले में जहां शरदकालीन गन्ना (Autumn Sugarcane) की खेती के लिए किसान जोर-शोर से नर्सरी तैयार कर रहे हैं, वहीं ईख विकास विभाग द्वारा गन्ना के साथ आलू, हल्दी और अदरक जैसी सह-फसली (Intercropping) खेती की एक महत्वाकांक्षी योजना बनाई गई है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य इलाके के किसानों को कम लागत में दोगुना लाभ पहुंचाना और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। इस योजना के तहत किसानों को गन्ना की खेती के लिए अनुदानित दर पर बीज और वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, साथ ही सह-फसली खेती की आधुनिक तकनीकों के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
20 से 25 हजार हेक्टेयर में गन्ने का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य
सहरसा एवं आसपास के क्षेत्रों में भविष्य में चीनी मिल स्थापित होने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए गन्ने के उत्पादन को गति दी जा रही है। विभाग ने सहरसा और समीपी इलाकों में 20 से 25 हजार हेक्टेयर भूमि में गन्ना की खेती कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। वर्तमान समय में किसान सिंगल बड प्लांटेशन (Single Bud Plantation) विधि से गन्ने की नर्सरी तैयार करने हेतु खेतों को समतल व तैयार कर रहे हैं।
सह-फसली से किसानों को मिलेगा तुरंत दोहरा लाभ
चूंकि प्रस्तावित चीनी मिल के पूर्ण रूप से चालू होने में अभी समय है और किसानों को शुरुआत में अपना गन्ना बाहर की मिलों में भेजना पड़ सकता है, इसलिए विभाग ने शरदकालीन गन्ने की दो पंक्तियों के बीच की खाली जमीन पर आलू, अदरक और हल्दी जैसी अल्पकालिक फसलों की खेती का खाका तैयार किया है। इससे किसानों को मुख्य फसल तैयार होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और सह-फसलों की बिक्री से समय-समय पर नकद आय होती रहेगी।
