बचे हुए खाने से गरीबों के चेहरे पर मुस्कान ला रहीं जूही, सहरसा में प्रोजेक्ट अन्नपूर्णा से मिट रही भूख
जूही कुमारी ने सहरसा के सिमरीबख्तियारपुर में 'प्रोजेक्ट अन्नपूर्णा' शुरू किया है, जिसके तहत प्रतिदिन जरूरतमंदों को सम्मानपूर्वक भोजन उपलब्ध कराया जाता है।

जरूरतमंदों और अस्पताल परिसर में मरीजों के परिजनों को भोजन वितरित करते स्वयंसेवक।
HighLights
जूही कुमारी ने 10 नवंबर 2022 को 'प्रोजेक्ट अन्नपूर्णा' शुरू किया।
सिमरीबख्तियारपुर में जरूरतमंदों को प्रतिदिन सम्मानपूर्वक भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
यह अभियान स्वयंसेवकों और निजी संसाधनों से संचालित होता है।
संवाद सहयोगी, सहरसा। भूख का वास्तविक दर्द वही समझ सकता है, जिसने किसी को दो वक्त की रोटी के लिए तड़पते या संघर्ष करते देखा हो। "किसी की थाली में भोजन की कमी न रहे और कोई भी इंसान भूखे पेट सोने को मजबूर न हो"—इसी महान मानवीय संकल्प के साथ सहरसा जिले के सिमरीबख्तियारपुर में 'प्रोजेक्ट अन्नपूर्णा' के माध्यम से हर दिन जरूरतमंदों को सम्मानजनक तरीके से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
10 नवंबर 2022 को जूही कुमारी द्वारा शुरू की गई यह छोटी-सी पहल आज सामाजिक सहयोग और सामूहिक प्रयास की एक सशक्त मिसाल बन चुकी है। 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर यह पहल पूरे समाज को याद दिलाती है कि भोजन केवल जीवन की जरूरत नहीं, बल्कि हर व्यक्ति का आत्मसम्मान और अधिकार है।
एक बुजुर्ग महिला की भूख ने बदल दी सोच
प्रोजेक्ट अन्नपूर्णा की नींव सिमरीबख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पर घटी एक भावुक घटना से पड़ी। स्टेशन परिसर में जूही कुमारी को एक असहाय बुजुर्ग महिला मिलीं, जिन्होंने करीब दो दिनों से अन्न का एक दाना तक नहीं खाया था।
महिला की दयनीय स्थिति देखकर उनका मन विचलित हो उठा। उन्होंने अपनी जेब के पैसों से तुरंत खाना मंगवाकर महिला को खिलाया। इस घटना ने उनके मन में विचार डाला कि यदि प्रतिदिन कुछ जरूरतमंदों के भोजन की व्यवस्था की जाए, तो कई लोगों की भूख मिट सकती है।
शुरुआत में रोज 10 से 12 लोगों को खाना खिलाने का लक्ष्य रखा गया, जो धीरे-धीरे दोस्तों और परिचितों के जुड़ने से एक नियमित सेवा अभियान में बदल गया।
अपने निजी संसाधनों से चलाया जा रहा अभियान
प्रोजेक्ट अन्नपूर्णा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके संचालन के लिए किसी बड़े एनजीओ या सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय टीम के सदस्य खुद अपनी जेब से राशि जुटाते हैं।
इसके अलावा, दोस्तों और आसपास के घरों से प्रतिदिन एक-दो प्लेट अतिरिक्त भोजन का सहयोग लिया जाता है। घरों में बना शुद्ध और ताजा खाना एकत्र कर पूरी गरिमा के साथ बिना किसी भेदभाव के जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाता है।
रात 8 से 9 बजे तक जुटता है भोजन, फिर होता है वितरण
अभियान से जुड़े युवा प्रतिदिन रात 8:00 बजे से 9:00 बजे के बीच अलग-अलग घरों और संपर्कों से भोजन एकत्र करने निकलते हैं। इसके बाद प्रत्येक पैकेट में चार रोटी और सब्जी व्यवस्थित कर पैक की जाती है।
फिर टीम के सदस्य तय स्थानों पर जाकर भोजन वितरित करते हैं। अपनी पढ़ाई और दैनिक कामकाज के बीच से समय निकालकर यह युवा पूरी निष्ठा से इस कार्य को अंजाम देते हैं।
इन प्रमुख स्थानों तक पहुँच रही मदद
प्रोजेक्ट अन्नपूर्णा की टीम प्रतिदिन सिमरीबख्तियारपुर रेलवे स्टेशन परिसर, रंगिनियां सादा टोला, रानीबाग के भट्टा टोला और अनुमंडलीय अस्पताल के बाहर बैठे मरीजों के तीमारदारों और असहायों तक भोजन पहुंचाती है। अस्पताल के बाहर अक्सर ऐसे लोग मिलते हैं जो दूर-दराज से आए होते हैं और उनके पास भोजन का प्रबंध करने के साधन नहीं होते।
स्वयंसेवकों की मजबूत टीम संभाल रही कमान
इस सेवा अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने में स्वयंसेवकों की मुख्य भूमिका है। टीम में हेमा देवी, प्रिंस, साहिल श्रीवास्तव, शैली शर्मा, बादल, नंदिनी सोनी, अमन कुमार, मनदीप कुमार, छोटू कुमार भगत, सौरव कुमार सिंह और राहुल कुमार रजक सहित कई समर्पित युवा रात-दिन योगदान दे रहे हैं।
