कोसी में फिर लौटेगी मिठास! सहरसा में खुलेगी चीनी मिल, दो प्रखंडों में जमीन चिह्नित; 20 हजार हेक्टेयर में होगी गन्ने की खेती
Saharsa Sugar Mill Setup Saat Nischay 3: बिहार सरकार के 'सात निश्चय-3' कार्यक्रम के तहत सहरसा जिले में जल्द ही ...और पढ़ें

Saharsa Sugar Mill Setup Saat Nischay 3: सहरसा में सात निश्चय-3 के तहत खुलेगी चीनी मिल
HighLights
सहरसा में 'सात निश्चय-3' के तहत नई चीनी मिल।
कहरा और सौरबाजार में चीनी मिल के लिए जमीन चिह्नित।
15-20 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती का लक्ष्य।
संंवाद सूत्र, सहरसा। Saharsa Sugar Mill Setup Saat Nischay 3: लंबे समय से उद्योग विहीनता का दंश झेल रहे कोसी अंचल के सहरसा जिले के लिए बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। बिहार सरकार के महत्वाकांक्षी 'सात निश्चय-3' कार्यक्रम के अंतर्गत सहरसा में शीघ्र ही चीनी मिल की स्थापना की जाएगी। चीनी मिल की स्थापना, आवश्यक भूमि अधिग्रहण और आगे की समग्र कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए गन्ना उद्योग विभाग और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से प्रक्रिया को तेज कर दिया है।
कहरा और सौरबाजार में चिह्नित हुई जमीन, CO से मांगी गई रिपोर्ट
चीनी मिल की स्थापना के लिए अनुकूल भौगोलिक स्थिति और आवागमन की सुगमता को देखते हुए जिले के दो स्थलों को प्राथमिक रूप से संभावित स्थल के तौर पर चिह्नित किया गया है। इनमें कहरा प्रखंड अंतर्गत देवना गोपाल और सौरबाजार प्रखंड अंतर्गत कांप शामिल हैं।
जिलाधिकारी के निर्देश पर दोनों अंचलों के अंचलाधिकारियों (CO) से जमीन की उपलब्धता, रकबा और तकनीकी उपयुक्तता को लेकर विस्तृत प्रतिवेदन मांगा गया है। अंचलाधिकारियों की रिपोर्ट प्राप्त होते ही अंतिम चयन कर प्रस्ताव गन्ना उद्योग विभाग के मुख्यालय (पटना) को भेजा जाएगा।
20 हजार हेक्टेयर में होगी खेती, फिर 'एटीएम' बनेगी ईख
दो दशक पूर्व तक कोसी का यह इलाका गन्ना उत्पादन का प्रमुख गढ़ हुआ करता था। उस दौर में सहरसा के सोनवर्षा कचहरी रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन चीनी मिल के लिए गन्ने की रैक लोड होकर रवाना होती थी। यह नकदी फसल किसानों के लिए एटीएम की तरह थी, जहां माल भेजते ही हाथों-हाथ भुगतान मिल जाता था। हालांकि, बाद के वर्षों में हसनपुर चीनी मिल बंद होने और मांग घटने के कारण किसानों का मोहभंग हो गया था।
अब नई चीनी मिल के नियमित व सुचारू संचालन के लिए सहरसा और आसपास के क्षेत्रों में 15 से 20 हजार हेक्टेयर भूमि में गन्ने की खेती का लक्ष्य रखा गया है। विभाग किसानों को सिंगल बड प्लांटेशन नर्सरी और उन्नत तकनीकों से जोड़ने के लिए अनुदानित दर पर बीज उपलब्ध करा रहा है। वर्तमान में इस वर्ष लगभग 500 हेक्टेयर में शरद कालीन रोपाई कराने के लिए आवेदन लेने की प्रक्रिया चल रही है।
किसानों में खुशी, इलाके की अर्थव्यवस्था को मिलेगी संजीवनी
चीनी मिल की सुगबुगाहट से स्थानीय किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। अमरपुर के प्रगतिशील किसान पंकज कुमार ने कहा कि गन्ना इस क्षेत्र की पारंपरिक और सर्वाधिक लाभकारी फसल रही है। मांग न होने से खेती रुक गई थी, लेकिन अब चीनी मिल लगने से ईख की खेती किसानों के लिए वरदान साबित होगी।
वहीं, विशनपुर निवासी रामकिशुन साह का कहना है कि मिल की स्थापना से जहां हजारों स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, वहीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार आएगा।
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"जिले में चीनी मिल खोलने की प्रशासनिक तैयारी जोर-शोर से चल रही है। इसकी स्थापना से जहां इलाके में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, वहीं गन्ना उत्पादक किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। जिलाधिकारी द्वारा कहरा और सौरबाजार के अंचलाधिकारियों से जमीन का विस्तृत प्रतिवेदन मांगा गया है। रिपोर्ट मिलते ही मुख्यालय को शीघ्र अंतिम प्रस्ताव भेजा जाएगा।"
