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सहरसा में तैयार होगा मछली का चारा; प्लांट लगाने पर 60% सब्सिडी मिलेगी, समझें पूरी प्र‍क्र‍िया

Published: Mon, 28 Sep 2026 08:58 AM (IST)Updated: Mon, 28 Sep 2026 09:08 AM (IST)

Fish Feed Mill Plant Subsidy: सहरसा के नवहट्टा प्रखंड में लगभग 30 लाख रुपये की लागत से आधुनिक मछली चारा ...और पढ़ें

सहरसा में खुलेगा मछली चारे का प्लांट

सहरसा में खुलेगा मछली चारे का प्लांट

HighLights

  1. नवहट्टा में ₹30 लाख की लागत से आधुनिक मछली चारा मिल।

  2. मत्स्यपालकों को चारा संयंत्र लगाने पर 60% सरकारी अनुदान।

  3. स्थानीय स्तर पर पौष्टिक चारा उपलब्धता से उत्पादन लागत में कमी।

संवाद सूत्र, सहरसा। Fish Feed Mill Plant Subsidy: कोसी के जलप्लावन और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वरोजगार व मत्स्यपालन को नई गति देने के लिए मत्स्य विभाग ने अब बुनियादी ढांचागत संसाधनों के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया है। विभाग की ओर से न केवल मछली पालन की प्रोत्साहन योजनाएं चलाई जा रही हैं, बल्कि इसके लिए अनिवार्य इनपुट (चारा व बर्फ) के स्थानीय स्तर पर उत्पादन के संयंत्र भी लगाए जा रहे हैं।

इसी कड़ी में जिले के नवहट्टा प्रखंड में प्रथम चरण के तहत लगभग 30 लाख रुपये की लागत से आधुनिक 'फीड मिल' (मछली चारा मिल) स्थापित की जा रही है। इस मिल के चालू होने से जिले के किसानों को अब मछली चारे के लिए अन्य राज्यों या दूरदराज के जिलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

विभागीय योजना के तहत आने वाले समय में जिले के अन्य संभावित प्रखंडों में भी अतिरिक्त चारा व बर्फ निर्माण इकाइयां स्थापित की जाएंगी, ताकि कोसी के मत्स्यपालकों को समय पर गुणवत्तापूर्ण संसाधन सुलभ हो सकें।

40 लाख की लागत पर 60% सरकारी अनुदान

सामान्य तौर पर एक आधुनिक मछली चारा निर्माण मिल की स्थापना पर लगभग 40 लाख रुपये तक का खर्च आता है। उद्यमियों और मत्स्यपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार लागत मूल्य पर 60 प्रतिशत का भारी अनुदान (सब्सिडी) प्रदान कर रही है।

स्थानीय स्तर पर फीड मिल शुरू होने से क्षेत्र के मत्स्यपालकों को दोतरफा लाभ मिलेगा। पहला, उन्हें स्थानीय बाजार में ही उचित मूल्य पर ताजा व पोषक आहार मिल सकेगा, जिससे परिवहन व्यय में भारी कटौती होगी। दूसरा, समय पर चारे की आपूर्ति सुनिश्चित होने से किसानों के समय और पूंजी दोनों की बचत होगी।

प्रोटीन और खली के वैज्ञानिक मिश्रण से बनेगा पौष्टिक आहार

मछलियों के तीव्र शारीरिक विकास के लिए वैज्ञानिक अनुपात में आहार तैयार किया जाता है। स्थानीय मिल में मुख्य रूप से प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और आवश्यक वसायुक्त कच्चे मालों को आधुनिक मशीनों के जरिए ब्लेंड और प्रोसेस किया जाएगा।

सहरसा मत्स्य आहार संयंत्र योजना: मुख्य विवरण

  • प्रथम संयंत्र स्थल: नवहट्टा प्रखंड, जिला- सहरसा (कोसी क्षेत्र)।

  • संयंत्र की प्रकृति: फिश फीड मिल (मछली पौष्टिक चारा निर्माण इकाई) एवं बर्फ संयंत्र।

  • प्रथम चरण लागत: लगभग ₹30 लाख से ₹40 लाख।

  • सरकारी अनुदान: कुल लागत पर 60 प्रतिशत (मत्स्य विभाग द्वारा)।

  • चारा सामग्री: चावल की भूसी, सोयाबीन, मूंगफली व सरसों की खली, मक्का व गेहूं का आटा, नमक और गुड़।

  • सीधा लाभ: संतुलित पोषण से मछलियों की तीव्र शारीरिक वृद्धि, समय पर वजन में इजाफा और स्थानीय स्तर पर सस्ती दरों पर उपलब्धता।

इस चारे में उच्च गुणवत्ता वाली चावल की भूसी (राइस ब्रान), सोयाबीन, मूंगफली की खली, सरसों की खली, मक्के व गेहूं का आटा तथा उचित मात्रा में नमक और गुड़ का मिश्रण किया जाता है। यह संतुलित आहार खाने से मछलियों का वजन तेजी से बढ़ता है और वे समय से पहले बिक्री योग्य आकार में आ जाती हैं, जिससे पालकों का मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है।

बर्फ प्लांट भी लगेंगे, अधिकारियों ने दी जानकारी

सहरसा के जिला मत्स्य पदाधिकारी जयप्रकाश सिंह ने बताया कि कोसी क्षेत्र में मत्स्यपालन की अपार संभावनाएं हैं। इसे आर्थिक संबल देने के लिए चारा और बर्फ के प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं, जिस पर 60 फीसदी अनुदान का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि नवहट्टा में फीड मिल शुरू होने के बाद मछली उत्पादकों को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचेगा और उत्पादन लागत में कमी आएगी।

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