बाढ़ के राहत कैंप में रहती थी, मवेशियों के साथ बीती जिंदगी; सहरसा में 60 वर्षीय बुचिया देवी की हत्या से सनसनी
सहरसा के कुम्हराघाट स्थित बाढ़ आश्रय स्थल में 60 वर्षीय बुचिया देवी की निर्मम हत्या कर दी गई, जहाँ वे ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
बुचिया देवी की बाढ़ आश्रय स्थल में निर्मम हत्या।
60 वर्षीय महिला वर्षों से आश्रय स्थल में रह रही थी।
ग्रामीणों ने आश्रय स्थल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए।
संवाद सूत्र, सत्तरकटैया (सहरसा)। कुम्हराघाट स्थित बाढ़ आश्रय स्थल ही बुचिया देवी का वर्षों से आशियाना बना हुआ था। जिस जगह को उन्होंने अपना ठिकाना समझकर जिंदगी के कई साल गुजारे, उसी जगह शुक्रवार की रात उनकी निर्मम हत्या कर दी गई।
60 वर्षीय बुचिया देवी की मौत ने न केवल परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि ग्रामीणों को भी झकझोर कर रख दिया है।
बताया जाता है कि बाढ़ आश्रय स्थल के निर्माण काल से ही बुचिया देवी वहां रह रही थीं। आवासीय परिसर में जगह की कमी के कारण वह अपने मवेशियों को भी इसी स्थल पर रखती थीं।
पति गोनर मुखिया के निधन के बाद वह आश्रय स्थल पर अकेले ही जीवन गुजार रही थीं। हालांकि, परिवार के अन्य सदस्य पास में ही अपने घर में रहते थे।
वर्षों से इस आश्रय स्थल पर रहने के कारण आसपास के लोग भी उन्हें अच्छी तरह जानते थे। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि दीपावली की खुशियों के बीच बुचिया देवी की जिंदगी का इस तरह अंत हो जाएगा।
ग्रामीणों के अनुसार, शाम ढलने के बाद बाढ़ आश्रय स्थल पर नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगता था। देर रात तक संदिग्ध लोगों की आवाजाही बनी रहती थी।
इसको लेकर स्थानीय लोगों द्वारा पूर्व में पुलिस को सूचना दिए जाने की बात भी सामने आई है। अब बुचिया देवी की हत्या के बाद ग्रामीणों के बीच आश्रय स्थल की सुरक्षा और निगरानी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। लोगों को पुलिस जांच से हत्याकांड के खुलासे और दोषियों की गिरफ्तारी की उम्मीद है।