पूर्णिया की झिझिया अब गुजरात में मचाएगी धूम, 16 कलाकार एकतानगर में दिखाएंगे बिहार की लोकसंस्कृति का दम
पूर्णिया का 16 सदस्यीय झिझिया नृत्य दल बिहार की समृद्ध लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए गुजरात ...और पढ़ें

गुजरात के लिए रवाना होने से पहले पूर्णिया कला भवन के 16 सदस्यीय झिझिया नृत्य दल के कलाकार और समिति के सदस्य
HighLights
पूर्णिया का 16 सदस्यीय झिझिया दल गुजरात रवाना हुआ।
एकतानगर में बिहार की लोकसंस्कृति का प्रदर्शन किया जाएगा।
कलाकारों को ट्रैक सूट दिए गए, उत्साहवर्धन हुआ।
संवाददाता, पूर्णिया। बिहार की समृद्ध लोकसंस्कृति और पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से पूर्णिया के कलाकारों का एक दल गुजरात के लिए रवाना हो गया है।
कला भवन से जुड़े 16 सदस्यीय झिझिया नृत्य दल गुजरात के एकतानगर में आयोजित होने वाले भव्य समारोह में अपनी शानदार प्रस्तुति के जरिए बिहार की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करेगा। दल के रवाना होने के साथ ही पूर्णिया के कला प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में भारी उत्साह का माहौल है।
कलाकारों की रवानगी से पहले कला भवन प्रबंध समिति की ओर से सभी 16 कलाकारों को खास तौर पर तैयार किए गए ट्रैक सूट प्रदान किए गए, ताकि राष्ट्रीय मंच पर दल की एकरूपता और अनुशासन साफ तौर पर नजर आ सके।
कला भवन परिसर में कलाकारों को विदाई देने पहुंचे प्रबंध समिति के सदस्य संजय कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष श्रवण कुमार जेजानी, समिति सदस्य जयवर्धन, नाट्य विभाग के निदेशक कुंदन कुमार सिंह, रंगकर्मी शिवाजी राम राव और रेणु रंगमंच संस्थान के सचिव अजीत कुमार सिंह बप्पा ने सभी का उत्साहवर्धन किया।
कलाकारों को तिलक लगाकर और गले मिलकर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं। इस दौरान कला भवन प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. डी. राम और मंत्री रामनारायण सिंह के सराहनीय योगदान को भी याद किया गया।
आस्था और लोकविश्वास का प्रतीक है झिझिया नृत्य
झिझिया बिहार की पारंपरिक लोककलाओं में अपनी बेहद विशिष्ट पहचान रखता है। आस्था, लोकविश्वास और सामूहिक उत्सव से जुड़ा यह अनूठा नृत्य अपनी शैली के कारण दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
इस नृत्य के दौरान कलाकार अपने सिर पर छिद्रों वाले घड़े को रखकर संतुलन बनाते हुए नृत्य करते हैं, जिसके अंदर जलते दीयों की रोशनी इस लोक परंपरा की खूबसूरती को और अधिक बढ़ा देती है। गुजरात में यह दल अपनी प्रस्तुति के माध्यम से बिहार की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय पटल पर जीवंत करने की तैयारी में है।
युवा कलाकारों की प्रतिभाशाली टीम
इस सांस्कृतिक दल का नेतृत्व विश्वजीत कुमार सिंह कर रहे हैं। टीम में शामिल अन्य कलाकारों में स्नेहा झा, रिंकल कुमारी, दीपप्रिया, स्नेहा राज, लकी प्रिया, संजना दास, ज्योति कुमारी, दीक्षा कुमारी, कोमल कुमारी, साक्षी, सांधिल्या, रिया डे, प्रीति डे, आकांक्षा निशु, संजना कुमारी और शिवम कुमार शामिल हैं।
यह सभी कलाकार पारंपरिक परिधानों, लोकसंगीत और झिझिया की विशिष्ट शैली के जरिए दर्शकों के सामने बिहार की मिट्टी की खुशबू बिखेरेंगे। स्थानीय कला जगत के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है, जिससे न केवल युवा कलाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि बिहार की लोककलाओं को व्यापक पहचान भी हासिल होगी। अब देश भर के कला प्रेमियों की निगाहें गुजरात में होने वाले इस समारोह पर टिकी हैं।
