खुदाई हुई, नहर बनी, पर पानी नसीब नहीं! पूर्णिया के डगरूआ में हरखेली नहर सूखी, महंगे डीजल पंप से सिंचाई को मजबूर किसान
पूर्णिया के डगरूआ प्रखंड की हरखेली पंचायत में नहर सूखी होने से किसान गंभीर सिंचाई संकट का सामना कर रहे ...और पढ़ें

पूर्णिया के डगरूआ में पानी के अभाव में सूखी पड़ी हरखेली नहर
HighLights
पूर्णिया के हरखेली पंचायत में नहर सूखी, किसान परेशान।
खुदाई के बाद भी पानी नहीं, महंगे डीजल पंप का सहारा।
नहर भूमि पर अतिक्रमण, किसानों ने की जीर्णोद्धार की मांग।
संवाद सहयोगी, डगरूआ (पूर्णिया)। Purnia Canal Dry Irrigation Crisis Farmers: पूर्णिया जिले के डगरूआ प्रखंड की हरखेली पंचायत से गुजरने वाली नहर में पानी न आने से क्षेत्र के किसान गंभीर सिंचाई संकट का सामना कर रहे हैं।
कसबा बड़ी नहर से निकली यह छोटी उपनहर वसंतपुर, सब्दलपुर और संथाली टोला होते हुए हरखेली गांव तक पहुंचती है। एक समय था जब इस नहर में नियमित पानी आता था और आसपास की सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि की सुगमता से सिंचाई हो जाती थी।
पूर्णिया जिले के डगरूआ प्रखंड अंतर्गत हरखेली पंचायत से होकर गुजरने वाली उपपेक्षी नहर वर्षों से पड़ी है पूरी तरह सूखी
कसबा बड़ी नहर से निकलकर वसंतपुर, सब्दलपुर और संथाली टोला होते हुए हरखेली जाने वाली नहर में पानी न आने से सैकड़ों एकड़ खेत प्रभावित
खुदाई और सफाई के वर्षों बीत जाने के बाद भी नहीं छोड़ा गया पानी; किसान महंगे डीजल पंपसेट से सिंचाई करने को मजबूर
देखरेख के अभाव में नहर की मिट्टी
जिससे किसानों को कम लागत में बेहतर पैदावार हासिल होती थी। हालांकि, पिछले कई वर्षों से नहर में पानी का प्रवाह पूरी तरह बंद पड़ा है, जिससे खेती-किसानी की लागत कई गुना बढ़ गई है।
खुदाई और सफाई के बाद भी नहीं छोड़ा गया पानी, महंगे डीजल पंपसेट के भरोसे किसान
देखरेख के अभाव में नहर जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। कुछ वर्ष पूर्व विभाग द्वारा नहर की खुदाई और सफाई का कार्य कराया गया था, जिससे स्थानीय किसानों में आस जगी थी कि अब खेतों तक पानी पहुंचेगा और उन्हें राहत मिलेगी।
अफसोसजनक पहलू यह है कि खुदाई संपन्न होने के वर्षों बीत जाने के बाद भी इसमें एक बूंद पानी नहीं छोड़ा गया। मजबूरन किसानों को फसलों को बचाने के लिए महंगे डीजल पंपसेट का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
नहर की जमीन पर घर-दुकान बनाकर अतिक्रमण, किसानों ने की जीर्णोद्धार की मांग
पानी न छोड़े जाने और प्रशासनिक अनदेखी के कारण नहर के किनारों से मिट्टी का दोबारा कटाव होने लगा है। इतना ही नहीं, सुरक्षा और निगरानी के अभाव में कई स्थानों पर दबंगों द्वारा नहर की जमीन पर अतिक्रमण कर पक्के घर और दुकानें बना ली गई हैं।
इसके चलते नहर का मूल अस्तित्व ही खतरे में पड़ता दिख रहा है। पीड़ित किसानों ने जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि नहर को अविलंब अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, इसकी आवश्यक मरम्मत हो और पानी छोड़ा जाए ताकि वे सुगमतापूर्वक अपनी फसलों की सिंचाई कर सकें।
