पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस पहुंचा, यूरोपीय बाजार में बढ़ रही डिमांड
पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस के बाजार में पहुंच गया है, जिसकी एक मैट्रिक टन की पहली खेप भेजी गई ...और पढ़ें

पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस पहुंचा, यूरोपीय बाजार में बढ़ रही डिमांड (AI Generated Image)
HighLights
पूर्णिया का मखाना ग्रीस के बाजार में पहुंचा, पहली खेप निर्यात।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने एपीईडीए की पहल को सराहा।
किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने पर बेहतर मूल्य मिलेगा।
प्रकाश वत्स, पूर्णिया। अलग-अलग फ्लेवर के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी धमक बना रहा पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस के बाजार में भी पहुंच चुका है। एक मैट्रिक मखाना की पहली खेप ग्रीस पहुंची है। यह जानकारी केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्याेग मंत्री पियूष गोयल ने भी ट्रविट कर साझा की है।
उन्होंने अपने ट्रविट में इसे केंद्र सरकार के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण की महत्वपूर्ण पहल बताया है। इससे पूर्व हाल में संपन्न हुए ब्रिक्स सम्मेलन में भी पूर्णिया के आचारी फ्लेवर के मखाना की धूम रही थी।
इससे पूर्व यूरोप के कुछ देशों में भी यहां का मखाना पहुंच चुका है और इसमें निरंतरता भी आयी है। इस निर्यात से न केवल वैश्विक स्तर पर पूर्णिया के मखाने की धूम बढ़ेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ाव के चलते किसानों को अच्छी कीमत भी मिलेगी।
बेलौरी के इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट से भेजा गया है मखाना
ग्रीस भेजी गई इस खेप की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग पूर्णिया के बेलौरी स्थित इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट द्वारा की गई है। इसके बाद दिल्ली की एसएस फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से समुद्री मार्ग द्वारा इसे ग्रीस के ऐतिहासिक पिराएस पोर्ट भेजा गया।
इस पहली खेप के लिए स्थानीय मखाना उत्पादकों को घरेलू मंडी के औसत भाव की तुलना में काफी बेहतर और प्रीमियम मूल्य प्राप्त हुआ है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे स्थानीय किसानों को सीधे वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने वाला एक बड़ा कदम करार दिया है।
एपीईडीए की पहल ला रही रंग
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण की पहल अब रंग लाने लगी है। एपीईडीए द्वारा किसानों और स्थानीय किसान उत्पादक संगठनों को दी जा रही पैकेजिंग, ब्रांडिंग, लैब टेस्टिंग और एक्सपोर्ट सर्टिफिकेशन की ट्रेनिंग से अब किसान खुद निर्यातक बनने की ओर अग्रसर हैं। मखाना उत्पादन के क्षेत्र में पूर्णिया का वर्चस्व लगातार बढ़ रहा है।
दुनिया भर में खपत होने वाले कुल मखाने का लगभग 80 से 85 प्रतिशत उत्पादन अकेले बिहार में होता है। इसमें भी पूर्णिया का अहम स्थान है।
पूर्णिया, कटिहार, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज समेत राज्य के लगभग एक दर्जन जिलों में 35,000 हेक्टेयर से अधिक जलक्षेत्र में इसकी खेती होती है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत से अमेरिका, कनाडा, खाड़ी देशों और यूरोपीय संघ सहित 20 से अधिक देशों में मखाना निर्यात किया जा रहा है।
पौष्टिकता के कारण बढ़ रही मांग
प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर मखाना अब केवल भारतीय व्रत-त्योहारों या पारंपरिक स्नैक तक सीमित नहीं रहा है।
यूरोप और अमेरिका में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ता इसे लो-कैलोरी हेल्दी सुपरफूड और ग्लूटेन-फ्री स्नैक के रूप में अपना रहे हैं। मिथिला मखाना को मिले जीआई टैग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी प्रामाणिकता को और बढ़ा दिया है।
