2019 में पूर्णिया से शुरू हुआ सफर और 7 साल में बन गईं 10 भूखंड व G+4 अपार्टमेंट की ऑनर, किशनगंज DPO रूबि पर EOU की FIR
Kishanganj DPO Rubi Kumari EOU FIR Katihar Property: आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने किशनगंज की DPO रूबि कुमारी के खिलाफ ...और पढ़ें

Kishanganj DPO Rubi Kumari EOU FIR Katihar Property: नियोजित शिक्षक से शिक्षा सेवा में आईं किशनगंज DPO रूबि कुमारी पर EOU का शिकंजा
HighLights
किशनगंज DPO रूबि कुमारी पर EOU ने दर्ज की FIR
7 साल में 10 करोड़ से अधिक की संपत्ति अर्जित
कटिहार में 10 भूखंड और आलीशान G+4 अपार्टमेंट
जागरण संवाददाता, पूर्णिया। Kishanganj DPO Rubi Kumari EOU FIR Katihar Property: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की मुहिम में शिक्षा विभाग का एक और बड़ा चेहरा बेनकाब हुआ है। किशनगंज की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) रूबि कुमारी के खिलाफ ईओयू ने पद का दुरुपयोग कर अकूत काली कमाई अर्जित करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है।
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि महज सात साल पहले तक एक साधारण नियोजित शिक्षक रहीं रूबि कुमारी ने बिहार शिक्षा सेवा में आते ही कटिहार में करोड़ों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया। ईओयू के आकलन के अनुसार, उनके और उनके रेलकर्मी पति द्वारा अर्जित परिसंपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य 10 करोड़ रुपये से अधिक है।
श्रीमती रूबि कुमारी बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 56वीं से 59वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से वर्ष 2018 में बिहार शिक्षा सेवा में चयनित हुई थीं।
वर्ष 2019 में उनकी पहली पदस्थापना पूर्णिया जिले में हुई। इसके बाद वर्ष 2023 में वे जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) के रूप में कटिहार में पदस्थापित हुईं और वर्ष 2025 से वे किशनगंज में DPO के पद पर अपनी सेवाएं दे रही थीं। बिहार शिक्षा सेवा में आने से पूर्व वे एक साधारण नियोजित शिक्षक थीं।
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कटिहार की ऑफिसर्स कॉलोनी में खड़ा किया आलीशान G+4 अपार्टमेंट
ईओयू द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, रूबि कुमारी के पति गौरव कुमार वर्ष 2004 में रेलवे के ग्रुप-सी वर्ग में सहायक लोको पायलट के रूप में बहाल हुए थे और वर्तमान में कटिहार स्टेशन पर कार्यरत हैं। दोनों ने मिलकर अपनी ज्ञात और वैध आय से कई गुना अधिक परिसंपत्तियां अर्जित कीं।
7 वर्षों में खरीदे 10 बेशकीमती भूखंड, रजिस्ट्री के आंकड़ों ने उड़ाई नींद
ईओयू की छानबीन में यह पुख्ता हुआ है कि 2019 से अब तक के सेवा काल में रूबि कुमारी और उनके पति ने कटिहार निबंधन कार्यालय के जरिए 10 बेशकीमती आवासीय व व्यावसायिक भूखंडों की रजिस्ट्री कराई:
6 जुलाई 2022: पति गौरव कुमार के नाम मौजा रामपुर हसनगंज (खाता 47, खेसरा 374) में 20 डिसमिल आवासीय जमीन (डीड संख्या 14287/2022) 10 लाख रुपये में खरीदी गई।
6 जुलाई 2022: उसी दिन उसी मौजा और खेसरा में गौरव कुमार के नाम 90 डिसमिल आवासीय जमीन (डीड संख्या 14289/2022) 45 लाख रुपये में ली गई।
29 मई 2024: मौजा मधुरा बुद्ध चौक (ऑफिसर्स कॉलोनी) में खाता 885, खेसरा 2231 के तहत 2 डिसमिल पर बना व्यावसायिक निर्माण (डीड संख्या 7042/2024) 16.51 लाख रुपये में खरीदा गया।
29 मई 2024: उसी दिन गौरव कुमार के नाम बुद्ध चौक में खाता 24, खेसरा 226 पर 1.5 डिसमिल व्यावसायिक भूखंड (डीड संख्या 7043/2024) 8.75 लाख रुपये में लिया गया।
7 दिसंबर 2024: DPO रूबि कुमारी के नाम मौजा रामपुर हसनगंज में 8.9 डिसमिल व्यावसायिक जमीन (डीड संख्या 26226) 7.51 लाख रुपये में खरीदी गई।
19 दिसंबर 2024: रूबि कुमारी के नाम रामपुर हसनगंज (खाता 47, खेसरा 600) में 34 डिसमिल आवासीय जमीन (डीड संख्या 27207) 17 लाख रुपये में ली गई।
5 जून 2025: रूबि कुमारी के नाम रामपुर हसनगंज में 80 डिसमिल व्यावसायिक जमीन (डीड संख्या 10632/2025) 61 लाख रुपये में निबंधित हुई।
6 जून 2025: अगले ही दिन रूबि कुमारी के नाम 61 डिसमिल व्यावसायिक जमीन (डीड संख्या 10667) 46 लाख रुपये में खरीदी गई।
20 जून 2025: पति गौरव कुमार के नाम रामपुर हसनगंज में 17.70 डिसमिल आवासीय जमीन (डीड संख्या 11900/2025) की रजिस्ट्री कराई गई।
अपार्टमेंट भूखंड: गौरव कुमार के नाम पर खाता 885, खेसरा 2231 के तहत 10 डिसमिल भूमि ली गई, जिस पर वर्तमान में G+4 अपार्टमेंट और अन्य निर्माण स्थित है।
कटिहार शहर के सबसे पॉश इलाके मिरचाईबाड़ी (ऑफिसर्स कॉलोनी, सहायक थाना क्षेत्र) में वर्ष 2018 में 30 लाख रुपये की भूमि खरीदी गई थी। इसके बाद वर्ष 2024 के दौरान लगभग 3200 से 3600 वर्गफुट के रकबे पर एक भव्य व आलीशान G+4 अपार्टमेंट का निर्माण कराया गया। ईओयू के मुताबिक, इस बहुमंजिला इमारत के निर्माण में न्यूनतम 2.10 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है।
इस विशाल निर्माण को वैध दिखाने के लिए रूबि कुमारी ने मात्र 55 लाख रुपये का गृह ऋण और उनके पति ने 24.47 लाख रुपये का निजी ऋण लिया, जिसमें से 22.50 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। यही नहीं, वर्ष 2025 में रूबि कुमारी ने 10 लाख रुपये का एक अन्य व्यक्तिगत ऋण लिया और महज एक साल के भीतर ब्याज समेत उसका पूरा चुकता कर दिया, जो उनकी भारी नकद आमदनी की ओर इशारा करता है।
ईओयू ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद संबंधित बैंक खातों, निवेश पत्रों और अघोषित संपत्तियों का गहन तकनीकी व वित्तीय विश्लेषण शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि जांच का दायरा बढ़ने पर शिक्षा विभाग के कई अन्य बिचौलियों और सहयोगियों पर भी गाज गिर सकती है।
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