सोनपुर और अजगैबीनाथ ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को लेकर बड़ा अपडेट, जमीन का होगा डिजिटल वेरिफिकेशन
सोनपुर और अजगैबीनाथ ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में जमीन के रिकॉर्ड और मालिकाना हक की बारीकी से जांच होगी।

HighLights
जमीन के डिजिटल और मैनुअल रिकॉर्ड की जांच होगी।
मालिकाना हक और टाइटल हिस्ट्री का सत्यापन अनिवार्य।
बिहार के राजस्व कानूनों का सख्ती से पालन होगा।
राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य में प्रस्तावित सोनपुर और अजगैबीनाथ ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया में सिर्फ जमीन की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उसके रिकार्ड और मालिकाना हक की भी बारीकी से जांच होगी।
दोनों परियोजनाओं के लिए जमीन के जमाबंदी रिकॉर्ड को डिजिटल रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। मैनुअल और डिजिटल रिकॉर्ड में अंतर मिलने पर परिमार्जन के माध्यम से उसे ठीक कराया जाएगा।
सिविल विमानन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार परियोजना के लिए तैयार दस्तावेज के मुताबिक सोनपुर और अजगैबीनाथ दोनों पैकेजों में जमाबंदी का बिहार भूमि पोर्टल पर डिजिटलीकरण हो चुका है।
हालांकि, जहां मैनुअल और डिजिटल रिकॉर्ड में अंतर है, उसे दूर करना होगा। इसके अलावा नदी वाले क्षेत्रों में जमीन की स्थिति की भी पुष्टि की जाएगी।
सूत्रों ने बताया कि सरकार ने दोनों परियोजनाओं के आकार, अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्र और एक साथ चलने वाली समय-सीमा को देखते हुए दो अलग-अलग सलाहकार एजेंसी नियुक्त करने का निर्णय लिया है।
एक सलाहकार एजेंसी सोनपुर पैकेज और दूसरी अजगैबीनाथ परियोजना पैकेज को देखेगी। दोनों के पास अलग और पूर्णकालिक टीम होगी। इससे दोनों परियोजनाओं में समानांतर काम आगे बढ़ाने के साथ प्रदर्शन की तुलना भी की जा सकेगी।
जमीन की खरीद और सत्यापन में बिहार के राजस्व कानूनों का पालन करना होगा। इसमें बिहार टेनेंसी एक्ट, 1885 और बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 प्रमुख हैं।
खास तौर पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के रैयतों की जमीन के हस्तांतरण से जुड़े प्रविधानों की जांच जरूरी होगी। कुछ मामलों में जमीन हस्तांतरण के लिए कलेक्टर या निर्धारित प्राधिकारी की पूर्व अनुमति भी आवश्यक हो सकती है।
मालिकाना हक की जांच जरूरी
जमीन खरीदने से पहले रैयत के अधिकार और जमीन के इतिहास की जांच होगी। बिहार टेनेंसी एक्ट के तहत कुछ श्रेणी के रैयतों की जमीन के हस्तांतरण पर प्रतिबंध या पूर्व अनुमति का प्रविधान है।
वहीं, बिहार भूमि सुधार कानून के तहत जमीन के राज्य में निहित होने, बकास्त भूमि और पुराने बंदोबस्त से जुड़े रिकॉर्ड भी देखे जा सकते हैं। यानी एयरपोर्ट के लिए जमीन जुटाने में सिर्फ रजिस्ट्री नहीं, बल्कि जमीन की पूरी टाइटल हिस्ट्री की जांच अहम होगी।
