Navratri 2026: पंचमी तिथि पर आज मां स्कंदमाता की पूजा, पटना के मंदिरों में उमड़ेगी भीड़
शारदीय नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा के बाद, गुरुवार को पंचमी तिथि पर मां स्कंदमाता की आराधना ...और पढ़ें
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पंचमी पर मां स्कंदमाता की पूजा: संतान सुख और मोक्ष का मार्ग
HighLights
गुरुवार को होगी मां स्कंदमाता की विशेष पूजा।
संतान सुख और मनोकामना पूर्ति के लिए आराधना।
पटना के मंदिरों में उमड़ेगी भक्तों की भारी भीड़।
जागरण संवाददाता, पटना। शारदीय नवरात्र के चौथे दिन बुधवार को श्रद्धालुओं ने देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। प्रीति, सिद्ध और रवि योग के शुभ संयोग में भक्तों ने मां की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
राजधानी के बांस घाट काली मंदिर, अखंडवासिनी मंदिर, गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी समेत अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से लेकर शाम तक लगी रही। घरों से लेकर मठ-मंदिरों में मां दुर्गा के जयकारे लगते रहे।
ज्योतिष आचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि आश्विन शुक्ल पंचमी पर गुरुवार को सौभाग्य और सिद्ध योग के संयोग में ज्येष्ठा नक्षत्र के दौरान देवी दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा होगी।
पवित्र मन से मां की आराधना करने से संतान सुख, अलौकिक तेज और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। देवी की कृपा से मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त होता है।
देवासुर संग्राम में देवसेना के सेनापति भगवान स्कंद की माता होने के कारण देवी के इस स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है। मार्कंडेय पुराण में वर्णित मां स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत शुभ्र और दिव्य है।
चार भुजाओं वाली देवी कमल के आसन पर विराजमान हैं। उनकी एक भुजा में बालरूप भगवान स्कंद हैं, जबकि दो भुजाओं में कमल पुष्प सुशोभित हैं। चौथी भुजा से वे भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।
सिंह उनका वाहन है। स्कंदमाता को सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी भी माना जाता है। उनके तेजस्वी स्वरूप की आराधना से भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति प्राप्त होने की मान्यता है।
मां को अलसी का भोग लगाने से सुख-शांति, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति की मान्यता है। इस दिन नीले रंग के वस्त्र धारण करने के साथ मां को सुनहरी चुनरी और चूड़ियां अर्पित करना शुभ माना जाता है। पद्मासन या सिद्धासन में बैठकर एकाग्र भाव से मां की आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
